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Pitru Paksh 2024: श्राद्ध पक्ष में रोजाना इन 3 उपायों से प्रसन्न होते हैं पितर, सदैव बनी रहती है कृपा!

Pitru Paksh 2024: हिंदू धर्म में पितृपक्ष या श्राद्ध पक्ष पूर्वजों और पितरों की आत्मा का शांति का महाअनुष्ठान है. इस पक्ष में रोजाना 3 उपायों को करने से वे बेहद प्रसन्न होते हैं और घर-परिवार पर अपनी कृपादृष्टि बनाए रखते हैं. आइए जानते हैं, क्या हैं ये ख़ास उपाय?

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Pitru Paksh 2024: हिंदू धर्म में साल के 365 दिनों में से 16 दिन पूर्वजों को याद करने और उनकी आत्मा की शांति के लिए श्रद्धांजलि देने के लिए निश्चित किया गया है। यह तथ्य अपने आप में हिंदू धर्म में पितृपक्ष या श्राद्ध पक्ष के महत्व को स्थापित करता है। मान्यता है कि पितृपक्ष के दौरान पितर लोक से पूर्वज और पितर पृथ्वी पर आते हैं और उनके लिए किए गए तर्पण, पिंडदान और भोज को ग्रहण कर तृप्त होते हैं। इस साल पितृपक्ष 17 सितंबर से 2 अक्टूबर तक है। आइए जानते हैं, श्राद्ध पक्ष में रोजाना किन 3 उपायों करने से पितर सदैव प्रसन्न रहते हैं और घर-परिवार पानी कृपादृष्टि बनाए रखते हैं।

पितरों की प्रसन्नता और शांति के उपाय

गीता के 11वें अध्याय का पाठ

श्रीमद्भगवद्गीता हिंदू धर्म का सबसे पवित्र ग्रंथ माना गया है। इसके 11वें अध्याय में भगवान श्रीकृष्ण ने अपने विश्वरूप का विराट दर्शन दिया है। मान्यता कि पितृपक्ष में एक लोटे में जल, काला तिल और सिद्ध यंत्र रखकर गीता के 11वें अध्याय का पाठ करने के बाद लोटे के जल पीपल पेड़ की जड़ में डालना चाहिए। इसे नियम पूर्वक श्राद्ध के सभी दिनों में करने से पितर से प्रसन्न होते है।

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सिद्ध शांति यंत्र का पूजन

पितृपक्ष के दिनों में एक दोने में एक सिद्ध शांति यंत्र, एक फल, कुछ पुष्प और गंगाजल डालकर रोजाना पूजा कर जल में प्रवाहित करने से लाभ होता है। वहीं, पितृपक्ष की अमावस्या तिथि यानी सर्वपितृ अमावस्या को अपने सब पितरों की आत्मा की शांति के लिए 16 सिद्ध शांति यंत्रों को 16 दोनों में पुष्प और  गंगाजल डालकर बहते जल में विसर्जित कर देने से सभी प्रकार के पितृदोष समाप्त हो जाते हैं।

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पितर समेत इनको भी दें भोजन का अंश

पितृपक्ष में अपने भोजन का अंशदान एक अनिवार्य हिंदू रिवाज है। इस रिवाज के मुताबिक श्राद्ध के दिनों में रोजाना अपनी भोजन की थाली यानी संपूर्ण भोजन में से इस प्रकार अंश निकालना चाहिए:

  • पहला अंश – अग्नि देवता के लिए
  • दूसरा अंश – गऊ माता के लिए
  • तीसरा अंश – पक्षियों के लिए
  • चौथा अंश – कुत्ते के लिए
  • पांचवां अंश – चींटियों एक लिए
  • छठा अंश – ब्राह्मण के लिए

संपूर्ण भोजन में से इस प्रकार अंश निकालने के बाद जल का अर्घ्य देना चाहिए और इसके बाद भोजन करना चाहिए। शास्त्रों के मुताबिक इससे पूर्वजों और पितरों की आत्मा सदैव तृप्त रहती है और घर-परिवार पर सदैव उनकी कृपा बनी रहती है।

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First published on: Sep 18, 2024 12:11 PM

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About the Author

Shyamnandan

साल 2006 में 'सिविल सर्विसेज क्रॉनिकल' मैगजीन से बतौर सब-एडीटर जर्नलिज्म की दुनिया में एंट्री करने वाले श्यामनंदन को लगभग 20 वर्षों का कार्यानुभव है। बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी (BHU) के स्टूडेंट रहे ये हमेशा से एक्सपेरिमेंटल रहे हैं। डिजिटल दुनिया में इनकी पैठ साल 2009 में मोबाइल वैस (Mobile VAS) कंटेंट से हुई। हिंदुस्तान टाइम्स (HT Media), इंडिकस एनालिटिक्स की लाइव मोबाइल (LiveMobile), इंस्टामेज जैसी कंपनियों में मोबाइल प्लेटफॉर्म के लिए काम करते-समझते और जल्द ही कई पायदान लांघते हुए प्रोडक्ट मैनेजर बने। मोबाइल प्लेटफॉर्म की समझ ने इनके एनडीटीवी (NDTV) में जाने का रास्ता आसान बनाया। इनके खाते में एनडीटीवी (NDTV) की 'आस्था' और 'जॉब अलर्ट्स' पेज लॉन्च करने का श्रेय दर्ज है। यहीं से इनकी वास्तविक ऑनलाइन जर्नलिज्म शुरू हुई। इंटरनेशनल रिलेशंस, जियो-पॉलिटिक्स, एनवायरनमेंट, साइंस टेक, एजुकेशन, हेल्थ, लाइफस्टाइल, फैशन और व्यंजन-रेसपी पर काफी लिखने के बाद ये 'धर्म और ज्योतिष' कंटेंट में रम गए। इस विषय को और गहराई से समझने और प्रस्तुत करने लिए इन्होंने भारतीय विद्या भवन (BVB), नई दिल्ली से एस्ट्रोलॉजी का कोर्स कंप्लीट किया। वर्तमान में News24 में धर्म और ज्योतिष सेक्शन के लिए अपनी सेवाएं दे रहे श्यामनंदन, बंसल न्यूज (भोपाल) के 'वेबसाईट हेड' भी रह चुके हैं। इनकी एक बड़ी खासियत है, रणनीति और योजना के साथ आगे बढ़ना। इनको YouTube और Facebook के लिए कंटेंट क्रिएशन और कंटेंट प्रमोशन के साथ-साथ SEO, SMO और SMM की अच्छी समझ है। जहां तक हॉबी की बात है, इनको पटकथा (Screenplay) और गजल लिखने, फिल्म देखने, खाना बनाने और पेंटिंग में विशेष रूचि है। संपर्क करें: 📧 Email: shyam.nandan@bagconvergence.in 🔗 LinkedIn: https://www.linkedin.com/in/shyamnandan-kumar/ 🐦 Twitter/X: @Shyamnandan_K

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