Neem Karoli Baba: रट लीजिए नीम करोली बाबा की ये 5 बातें, ओवरथिंकिंग से व्याकुल मन को मिलेगी शांति

Neem Karoli Baba: नीम करोली बाबा भारत के महान संतों में गिने जाते हैं. वे कहते थे- ;सुख आएगा तो जाएगा, दुख आएगा तो जाएगा.’ हर चीज अस्थायी है. उनके शब्द हमें याद दिलाते हैं कि समय हर घाव भर देता है और धैर्य ही मन की असली शक्ति है. आइए जानते हैं, बाबा की अनमोल सीख, जो व्याकुल मन को शांत कर देती है.

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Neem Karoli Baba: नीम करोली बाबा अपने उपदेश में अक्सर कहते थे- ‘सुख आएगा तो जाएगा, दुख आएगा तो जाएगा.’ यही जीवन का सरल सत्य है. जब हम इसे समझ लेते हैं, तो मन का बोझ हल्का होने लगता है. ओवरथिंकिंग की सबसे बड़ी वजह यही होती है कि हम हर भावना को स्थायी मान बैठते हैं. बाबा की यह सीख हमें याद दिलाती है कि समय हर घाव को भर देता है. इसलिए किसी भी स्थिति में घमंड या घबराहट नहीं, बस धैर्य रखना चाहिए.

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‘टेंशन मत ले, सब माया है’

बाबा का यह मंत्र आज की तेज जिंदगी में वरदान है. वे कहते थे- ‘जो होना है, होकर रहेगा. इसलिए टेंशन मत ले, सब माया है.’ यह वाक्य जितना साधारण है, उतना ही गहरा. जब भी मन बेचैन हो, यह पंक्ति दोहराएं. इससे मन तुरंत शांत होने लगता है. हम नियंत्रण से बाहर चीजों पर सोचते-सोचते थक जाते हैं, पर बाबा सिखाते हैं कि जीवन की डोर किसी बड़ी शक्ति के हाथ में है. भरोसा रखो और अपने कर्तव्य पर ध्यान दो.

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चिंता नहीं, चिंतन करो

नीम करोली बाबा स्पष्ट कहते थे- ‘बुद्धिमान चिंतन करता है, मूर्ख चिंता करता है.’ चिंता मन को कमजोर करती है, जबकि चिंतन रास्ता दिखाता है. ओवरथिंकिंग को रोकने का सबसे आसान तरीका है, समस्या को लिखो, समाधान सोचो और कदम उठाओ. जो हो गया, वह बीत चुका है. अब आगे क्या करना है, यही सोचना जीवन को आगे बढ़ाता है.

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गुरु स्मरण कठिन समय में बनती है ढाल

बाबा कहते थे- ‘गुरु को याद करो, सब ठीक हो जाएगा.’ गुरु कोई भी हो सकता है, माता-पिता, शिक्षक, आध्यात्मिक मार्गदर्शक या कोई ऐसा व्यक्ति जिसने तुम्हें दिशा दी हो. कठिन समय में उनका स्मरण मन को स्थिर करता है. गुरु की डांट अगर कड़वी भी लगे, तो उसमें भलाई ही छिपी होती है. उनकी सीखें अंधेरे में रास्ता दिखाने वाली रोशनी बन जाती हैं.

प्रेम और सेवा

नीम करोली बाबा का सबसे बड़ा संदेश था- ‘सबको प्रेम करो, सेवा करो.’ यह मन की सारी उलझनों की सबसे बड़ी दवा है. जब हम दूसरों की मदद करते हैं, मन की सारी नकारात्मकता पिघलने लगती है. सेवा भाव मन को हल्का करता है और ओवरथिंकिंग की ग्रंथियों को खोल देता है. यह सच्चा राम-नाम है- ‘प्रेम, करुणा और विनम्रता.’

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है। News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।

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लेखक के बारे में

Shyamnandan

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श्यामनंदन कुमार News24.com में चीफ सब-एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले श्यामनंदन ज्योतिष, अंक शास्त्र, सामुद्रिक शास्त्र, पर्व-त्योहार सहित भारतीय धर्म-संस्कृति के जानकार पत्रकार हैं. उन्होंने पत्रकारिता में एम.ए. की पढ़ाई काशी हिन्दू विश्वविद्यालय (BHU) से की है और ज्योतिष का अध्ययन भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से किया है. अपने पेशे में डिजिटल करियर की शुरुआत उन्होंने एनडीटीवी कन्वर्जेंन्स के साथ की. श्यामनंदन हिंदुस्तान टाइम्स, बंसल न्यूज (भोपाल) जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स के साथ भी जुड़े रहे हैं. उन्होंने देश के प्रसिद्ध संतों के सत्संग और समागम की रिपोर्टिंग की है.
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