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Holashtak 2026: कल या परसों, कब से शुरू होगा होलाष्टक, जानिए इन्हें क्यों माना जाता है अशुभ?

Holashtak 2026: होली का पर्व हर साल बड़े ही हर्षोल्लास से मनाया जाता है. इस साल होली 3 मार्च को है. इस दिन होलिका दहन किया जाएगा और अगले दिन यानी 4 मार्च को रंगोत्सव होगा. होली के पर्व से पहले होलाष्टक की शुरुआत होती है. इन दिनों को शुभ कार्य के लिए वर्जित माना जाता है. जानते हैं होलाष्टक की शुरुआत कब से हो रही है.

Author Edited By : Aman Maheshwari
Updated: Feb 22, 2026 08:40
Holashtak 2026
Photo Credit- News24GFX

Holashtak 2026: होली से ठीक 8 दिन पहले होलाष्टक की शुरुआत होती है. होलाष्टक के दौरान मांगलिक कार्य पर रोक होती है. इन दिनों शुभ कार्य करने से बचना चाहिए. होली का पर्व फाल्गुन माह पूर्णिमा को मनाया जाता है. होली इस साल 3 मार्च को है और 4 मार्च को रंगोत्सव मनाया जाएगा. होली से पहले आठ दिनों होलाष्टक होते हैं. इस बार होलाष्टक कब शुरू हो रहे हैं और कब तक रहेंगे चलिए जानते हैं.

कब शुरू होगा होलाष्टक?

होलाष्टक का आरंभ 24 फरवरी को सुबह 07:03 बजे से होगा. होलाष्टक का समापन 3 मार्च को फाल्गुन पूर्णिमा के दिन होलिका दहन के साथ होगा. होली से पहले के इन 8 दिनों को ज्योतिष शास्त्र में शुभ कार्यों के लिए वर्जित माना गया है. ऐसी मान्यता है कि, होलाष्टक के दौरान ब्रह्मांड के ग्रहों का स्वभाव उग्र होता है. इससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव रहता है. होलाष्टक के दौरान विवाह, नामकरण, मुंडन, ग्रह प्रवेश आदि कार्य नहीं करने चाहिए.

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होलाष्टक क्यों मानते हैं अशुभ?

होलाष्टक को ग्रहों के उग्र स्वभाव के कारण अशुभ माना जाता है. होलाष्टक के दौरान आठ दिनों तक सौरमंडल के प्रमुख आठ ग्रह उग्र होते हैं. होलाष्टक से पहले अष्टमी तिथि पर चंद्रमा, नवमी तिथि पर सूर्य, दशमी तिथि पर शनि, एकादशी पर बुध, द्वादशी तिथि पर देवगुरु बृहस्पति, त्रयोदशी पर शुक्र, चतुर्दशी को मंगल और पूर्णिमा को राहु का नकारात्मक प्रभाव होता है. यह ग्रह उग्र होते हैं और समय शुभ कार्य के लिए अच्छा नहीं होता है.

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होलाष्टक के दौरान प्रहलाद को कष्ट झेलने पड़े थे. हिरण्यकश्यप ने शुक्ल अष्टमी से लेकर पूर्णिमा तक अपने पुत्र प्रहलाद को मृत्यु के समान कष्ट दिये थे. इस समय को शोक और कष्ट का प्रतीक माना जाता है. होलिका दहन के बाद प्रहलाद बच गए और होलिका जल गई. इस प्रकार बुराई पर अच्छाई की जीत हुई. इसके बाद वातावरण शुद्ध और मंगलकारी हो गया. इन्हीं कारणों से होलाष्टक में मांगलिक कार्य को करना शास्त्रों में वर्जित बताया गया है.

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: Feb 22, 2026 08:40 AM

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