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Premanand Maharaj Quotes: क्या पति-पत्नी के कर्म एक-दूसरे के जीवन को प्रभावित करते हैं? जानिए क्या कहते हैं प्रेमानन्द महाराज

Premanand Maharaj Quotes: सनातन धर्म में विवाह एक पवित्र बंधन है, जहां पति-पत्नी जीवन में एक-दूसरे के साथी होते हैं. लेकिन प्रश्न यह है कि क्या उनके कर्म आपस में असर डालते हैं? आइए जानते हैं, इस प्रश्न के उत्तर में प्रेमानंद जी महाराज क्या कहते हैं?

Author Written By: Shyamnandan Updated: Jan 5, 2026 22:41
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Premanand Maharaj Quotes: सनातन धर्म में विवाह को सबसे पवित्र बंधन माना गया है. पति और पत्नी केवल जीवनसाथी नहीं होते, बल्कि एक-दूसरे के सुख-दुख में साझेदार भी होते हैं. कहा जाता है कि विवाह के समय दोनों का भाग्य आपस में जुड़ जाता है. लेकिन क्या पति-पत्नी के कर्म एक-दूसरे के जीवन को प्रभावित करते हैं? इस सवाल का उत्तर प्रेमानंद महाराज ने बहुत सरल तरीके से समझाया है. आइए इसे विस्तार से जानते हैं…

पत्नी के अच्छे कर्मों का प्रभाव

यदि पत्नी धार्मिक, भक्ति करने वाली और पति के प्रति समर्पित हो, तो उसके अच्छे कर्म और पुण्य केवल उसे ही लाभ पहुंचाते हैं. पति पर इसका कोई असर नहीं पड़ता. यह स्पष्ट करता है कि प्रत्येक व्यक्ति के अच्छे कर्म सीधे उसी के जीवन में फल लाते हैं. पति पर इसका असर न होने का कारण यह है कि पुण्य का प्रभाव उसी की आत्मा से जुड़ा होता है.

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पति के पुण्य का लाभ पत्नी को

वहीं, पति के अच्छे कर्म और धार्मिकता का लाभ पत्नी को मिलता है. शादी के समय जो संस्कार किया जाता है, उसे पाणिग्रहण कहते हैं. इस संस्कार में पत्नी का हाथ पति के हाथ पर रखा जाता है. यह प्रतीक है कि पति के शुभ कर्मों का लाभ पत्नी भी प्राप्त कर सकती है. इसका मतलब है कि पति की भक्ति, दान, तीर्थ यात्रा या अन्य अच्छे कार्यों का परिणाम पत्नी को भी मिलता है.

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बुरे कर्मों का फल

गलत आदतों या बुरे कर्मों का असर केवल उसी व्यक्ति पर पड़ता है जिसने कर्म किए हैं. यदि पति बुरे कर्म करता है, तो केवल उसे ही उसका परिणाम भुगतना पड़ता है. पत्नी पर इसका कोई असर नहीं होता. इसी प्रकार, पत्नी के बुरे कर्म भी केवल उसे ही प्रभावित करते हैं. यह नियम साफ करता है कि नकारात्मक कर्मों का जिम्मा किसी और पर नहीं डाला जा सकता.

इस तरह प्रेमानंद महाराज ने कर्म और विवाह के बीच के संबंध को सरल और स्पष्ट शब्दों में समझाया है. वे कहते हैं, विवाह पवित्र बंधन है और इसमें पति-पत्नी एक-दूसरे के जीवन में सहारा बनते हैं. लेकिन कर्म और पुण्य की दृष्टि से नियम स्पष्ट है. पति के अच्छे कर्मों का लाभ पत्नी को मिलता है, लेकिन पत्नी के पुण्य का लाभ केवल उसे ही मिलता है. बुरे कर्म हमेशा उसी व्यक्ति को भुगतने पड़ते हैं जिसने उन्हें किया है. यह हमें यह भी सिखाता है कि प्रत्येक व्यक्ति अपने कर्मों के लिए स्वयं जिम्मेदार है.

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डिस्क्लेमर:
 यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है।News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है।

First published on: Jan 05, 2026 10:41 PM

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