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Gauri Ganesh Chaturthi 2026: आज है गौरीगणेश चतुर्थी व्रत, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि

Gauri Ganesh Chaturthi 2026 आज 22 जनवरी को गौरीगणेश चतुर्थी व्रत और पूजा मनाई जा रही है, जिसे माघ विनायक चतुर्थी या गणेश जयंती भी कहते हैं। जानिए, इस दिन गणेश और गौरी माता की पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है, क्यों यह व्रत जीवन की बाधाएं दूर करता है और इसे करने का सही तरीका क्या है?

Author Written By: Shyamnandan Updated: Jan 22, 2026 07:58
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Gauri Ganesh Chaturthi 2026: आज 22 जनवरी 2026, गुरुवार को माघ माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को गौरी गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जा रहा है। इसे माघ विनायक चतुर्थी या गणेश जयंती के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व भगवान गणेश के गौरी गणेश स्वरूप को समर्पित है और इसे श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाना विशेष शुभ माना गया है। आइए जानते हैं, पूजा का शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि क्या है?

शुभ समय और मुहूर्त

इस दिन चतुर्थी तिथि रात के 02:47 AM बजे से प्रारंभ हुई है और यह 23 जनवरी 2026 की 02:28 AM बजे तक रहेगी। आज मध्याह्न पूजा का विशेष मुहूर्त सुबह 11:29 से दोपहर 01:37 बजे तक है। इस समय का पालन कर पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। इस दिन सुबह 09:22 से रात 09:19 तक चंद्रमा का दर्शन नहीं करना चाहिए, क्योंकि ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इससे नकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं।

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गौरी गणेश चतुर्थी का धार्मिक महत्व

गौरी गणेश चतुर्थी का धार्मिक महत्व बहुत प्राचीन है। इस दिन माता पार्वती और भगवान गणेश की संयुक्त पूजा करने से घर में सुख, समृद्धि और सौभाग्य का वास होता है। माना जाता है कि इस व्रत और पूजा से जीवन की सभी बाधाएं दूर होती हैं और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यह पर्व विशेष रूप से परिवार की खुशहाली और सामूहिक भक्ति का प्रतीक माना जाता है।

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पूजा की सरल विधि

आज के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान कर पूजा का संकल्प लेते हैं। पूजा के लिए घर की पूजा स्थल को यथेष्ट रूप से साफ करते हैं। लाल या पीले कपड़े से छोटा आसन बिछाकर उस पर गणेश जी और गौरी माता की मूर्ति या चित्र स्थापित कर पूजा करते हैं। दीपक और धूप जलाकर और श्रद्धा भाव से गणेश जी के मंत्रों का जाप करते हैं। विशेष रूप से मोदक, लड्डू, फल, दूर्वा और पुष्प अर्पित की जाती है।

व्रत और नियम

इस दिन व्रत रखने वाले निर्जला या फलाहारी व्रत कर सकते हैं। सुबह संकल्प लेकर पूजा स्थल पर समयानुसार पूजा पूरी करें। चंद्र दर्शन से बचना और पूजा के दौरान ध्यान एवं भक्ति बनाए रखना शुभ माना जाता है। यह व्रत न केवल धार्मिक दृष्टि से, बल्कि मानसिक शांति और आत्मिक संतोष के लिए भी महत्वपूर्ण है।

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डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक शास्त्र की मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: Jan 22, 2026 07:58 AM

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