Garuda Purana: हिंदू धर्म में व्यक्ति की मृत्यु के बाद शव को जलाया जाता है. अंतिम संस्कार के दौरान कई पंरपराओं और नियमों का ध्यान रखना बेहद जरूरी होता है. गरुड़ पुराण में इनके बारे में बताया गया है. किसी के दाह संस्कार से लौटते समय श्मशान में पीछे की ओर मुड़कर नहीं देखना चाहिए. यह अच्छा नहीं माना जाता है. लोगों ने इस नियम के बारे में सुना होगा लेकिन कम ही लोग इसके पीछे छिपे कारण के बारे में जानते हैं. चलिए जानते हैं कि, दाह संस्कार के बाद पीछे मुड़कर देखना क्यों मना होता है.
दाह संस्कार के बाद पीछे मुड़कर क्यों नहीं देखना चाहिए?
धार्मिक कारण
दाह संस्करा के बाद पीछे मुड़कर नहीं देखान चाहिए इसको लेकर अलग-अलग कारण हैं. इसके पीछे गरुड़ पुराण में छिपे धार्मिक कारण के बारे में बताते हैं. गरुड़ पुराण के अनुसार, जब शरीर का दाह संस्कार होता है तो आत्मा का मोह भंग होने में समय लगता है. इसके कारण परलोक की यात्रा में बाधा आ सकती है. ऐसी मान्यता है कि, शरीर जलने के बाद आत्मा परिजनों के आसपास होती है. अगर कोई परिजन पीछे मुड़कर देखता है तो आत्मा को सांसारिक मोह से मुक्त होने में समय लगता है.
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मनोवैज्ञानिक कारण
ऐसा माना जाता है कि, अगर कोई व्यक्ति दाह संस्कार के बाद श्मशान में पीछे मुड़कर देखता है तो इससे व्यक्ति की भावना कमजोर होती हैं. अगर आप चिता और अग्नि के दृश्य देखते हैं तो यह मन पर लंबे समय तक असर छोड़ सकते हैं. आपको मानसिक आघात हो सकता है इस वजह से आप श्मशाम घाट से वापस लौटते समय पीछे मुड़कर न देखें.
नकारात्मक ऊर्जा के कारण
श्मशान घाट को नकारात्मक ऊर्जा का स्थान माना जाता है. यहां पर अतृप्त आत्माएं होती हैं. इस वजह से आपको श्मशान से लौटते समय पीछे मुड़कर नहीं देखना चाहिए. पीछे मुड़कर देखने से मन नकारात्मक शक्तियों की ओर आकर्षित हो सकता है. इस गलती को करने से बचें.
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