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Amla Navami Vrat Ki Katha: आज आंवला नवमी पर जरूर पढ़ें मां लक्ष्मी की ये कथा, सुख-समृद्धि से भर जाएगा घर

Amla Navami 2025 Vrat Ki Katha: आज 31 अक्टूबर 2025, वार शुक्रवार को देशभर में आंवला नवमी का पर्व मनाया जा रहा है. आज के दिन मां लक्ष्मी और आंवले के पेड़ की पूजा-अर्चना करने के साथ व्रत रखना शुभ होता है. हालांकि, आंवला नवमी की पूजा इस पर्व के व्रत की कथा सुने या पढ़े बिना अधूरी होती है. आइए अब जानते हैं आंवला नवमी व्रत की सही और संपूर्ण कथा के बारे में.

Author By: Nidhi Jain Updated: Oct 31, 2025 09:26
Amla Navami Vrat Ki Katha
Credit- Social Media

Amla Navami 2025 Vrat Ki Katha: द्रिक पंचांग के अनुसार, हर साल कार्तिक माह में आने वाली शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को आंवला नवमी मनाई जाती है, जो कि देवउठनी एकादशी से एक दिन पहले आती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार, प्राचीन काल में इसी तिथि से सतयुग की शुरुआत हुई थी. इस दिन मां लक्ष्मी और आंवले के पेड़ की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की जाती है. साथ ही व्रत रखना शुभ माना गया है. इस बार आज यानी 31 अक्टूबर 2025, वार शुक्रवार को आंवला नवमी का व्रत रखा जा रहा है.

हालांकि, आंवला नवमी की पूजा इस पर्व के व्रत की कथा सुने या पढ़े बिना अधूरी होती है. माना जाता है कि जो लोग आज सच्चे मन से पूजा करने के बाद आंवला नवमी व्रत की कथा सुनते या पढ़ते हैं, उनके घर में सुख, समृद्धि, धन, वैभव, ऐश्वर्या और खुशहाली आदि का वास होता है. आइए अब जानते हैं आंवला नवमी व्रत की कथा के बारे में.

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आंवला नवमी व्रत की कथा (Amla Navami Vrat Ki Katha)

पौराणिक कथा के अनुसार, प्राचीन काल में एक दिन धन की देवी मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करने आईं. भ्रमण के दौरान उनके मन में भगवान विष्णु और शिव जी की साथ में पूजा करने की इच्छा प्रकट हुई, लेकिन उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि कैसे वो दोनों देवताओं को साथ लाएं. तब उनके मन में ख्याल आया कि तुलसी और बेल की गुणवत्ता आंवले के पेड़ में एक साथ पाई जाती है. तुलसी श्री हरि विष्णु को अत्यंत प्रिय है, जबकि बेल भगवान भोलेनाथ का पसंदीदा फल है. ऐसे में उन्होंने आंवले के पेड़ को विष्णु और शिव का प्रतीक चिह्न मानकर उसकी पूजा-अर्चना की.

मां लक्ष्मी की पूजा से भगवान विष्णु और शिव जी दोनों प्रसन्न हुए और उन्होंने माता रानी को दर्शन दिए. माता लक्ष्मी ने दोनों देवताओं से आग्रह किया कि वो उनके हाथ का भोजन खाएं, जिसके बाद माता रानी ने आंवले के पेड़ के नीचे भोजन बनाया और दोनों देवताओं को प्रेम व आदरपूर्वक परोसा.

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दोनों देवताओं ने जब भोजन खा लिया तो माता रानी ने स्वयं भी भोजन को प्रसाद रूप में ग्रहण किया. धार्मिक मान्यता के अनुसार, जिस दिन ये घटना घटी, उस दिन कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि थी. इसी के बाद से नवमी तिथि पर आंवले के पेड़ की पूजा और उसके नीचे बैठकर भोजन बनाने की परंपरा शुरू हो गई. माना जाता है कि जो लोग सच्चे मन से इस परंपरा का पालन करते हैं, उनके जीवन में मां लक्ष्मी की कृपा से सुख, शांति, समृद्धि, खुशहाली, वैभव, धन और ऐश्वर्या का स्थायी वास होता है.

ये भी पढ़ें- Amla Navami 2025: आंवला नवमी पर करें आंवले से जुड़े खास उपाय, सुख-समृद्धि में होगी वृद्धि

डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है और केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.

First published on: Oct 31, 2025 09:26 AM

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