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नासा का आर्टेमिस 2 मिशन अंतरिक्ष विज्ञान के इतिहास में एक नया अध्याय लिखने के लिए तैयार है, जो दशकों बाद इंसानों को गहरे अंतरिक्ष की यात्रा पर ले जाएगा.
मंगल ग्रह बना 'बॉडीगार्ड'

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मंगल पर मौजूद परसेवरेंस रोवर अपने Mastcam-Z कैमरों से सूर्य के उन धब्बों की तस्वीरें लेता है, जो पृथ्वी से ओझल होते हैं और बड़े धमाकों का संकेत देते हैं. इस तकनीक की मदद से वैज्ञानिकों को 14 दिन पहले ही सौर तूफानों का पता चल जाता है, जिससे अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त समय मिल सके.
स्पेसक्राफ्ट के अंदर सुरक्षा कवच

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ओरियन स्पेसक्राफ्ट में 'हेरा' (HERA) नाम के छह हाई-टेक सेंसर्स लगाए गए हैं, जो हर सेकंड रेडिएशन के स्तर को मापते हैं और खतरा होने पर अलार्म बजाते हैं. अलार्म बजते ही अंतरिक्ष यात्री जहाज के भीतर मौजूद सामान और भारी वजन का इस्तेमाल कर एक सुरक्षा घेरा बनाएंगे, जो उन्हें रेडिएशन की सीधी मार से बचाएगा.
समय की असली चुनौती

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सूरज से निकलने वाले खतरनाक कण एक घंटे से भी कम समय में स्पेसक्राफ्ट तक पहुंच सकते हैं, जिससे वैज्ञानिकों के पास फैसले लेने का वक्त बहुत कम होता है. नासा ने सूर्य के चारों ओर सैटेलाइट्स का एक पूरा नेटवर्क तैनात किया है, जो मार्स रोवर के डेटा के साथ मिलकर मिशन के लिए एक अभेद्य सुरक्षा कवच तैयार कर रहा है.
गहरे अंतरिक्ष का नया अनुभव

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पिछले 50 सालों में यह पहली बार होगा जब इंसान पृथ्वी के सुरक्षित चुंबकीय क्षेत्र को छोड़कर चंद्रमा की ओर उड़ान भरेगा, जहां रेडिएशन का खतरा सबसे ज्यादा है. आर्टेमिस 2 मिशन के तहत चार अंतरिक्ष यात्री चंद्रमा के चारों ओर चक्कर लगाकर वापस लौटेंगे, जो भविष्य के चंद्र आधार (Moon Base) के लिए मील का पत्थर साबित होगा.
इंसान बनाम कुदरत की जंग

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अंतरिक्ष में यह मुकाबला इंसान की उन्नत तकनीक और कुदरत की बेहिसाब ताकत के बीच है, जहां हर एक सेकंड और सटीक डेटा की कीमत जान बचाना है. 1 अप्रैल 2026 को होने वाली यह लॉन्चिंग न केवल चांद तक पहुंचने की कोशिश है, बल्कि अंतरिक्ष में इंसानी सुरक्षा के नए मानकों को स्थापित करने का एक बड़ा इम्तिहान भी है.
सूरज का अदृश्य खतरा

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सूरज से निकलने वाले सोलर एनर्जेटिक पार्टिकल्स (SEPs) इतने शक्तिशाली होते हैं कि वे स्पेसक्राफ्ट की दीवारों को चीरकर अंतरिक्ष यात्रियों के डीएनए को नुकसान पहुंचा सकते हैं. नासा ने इस खतरे से निपटने के लिए 'मून टू मार्स स्पेस वेदर एनालिसिस ऑफिस' बनाया है, जो अंतरिक्ष के मौसम और सौर तूफानों पर 24 घंटे पैनी नजर रख रहा है.