अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद कब तक नॉर्मल होगी कच्चे तेल की सप्लाई? अभी लगने वाले हैं कितने दिन

Iran Israel War: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने ग्लोबल ऑयल मार्केट को हिला दिया है. सप्लाई में रुकावट आने की वजह से कीमतों में उछाल आया है. जानिए ये संकट कब तक रह सकता है और इसका भारत पर क्या असर होगा.

Iran Israel War
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Credit: News24

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होर्मुज जलडमरूमध्य- दुनिया की तेल लाइफलाइन

 होर्मुज जलडमरूमध्य- दुनिया की तेल लाइफलाइन2 / 9

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है. ये संकरा जलमार्ग ग्लोबल एनर्जी सप्लाई की रीढ़ माना जाता है क्योंकि दुनिया का करीब 20% कच्चा तेल इसी रास्ते से गुजरता है. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव की वजह से इस क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं, जिससे तेल टैंकरों की आवाजाही पर खतरा बढ़ गया है. कई शिपिंग कंपनियों ने सुरक्षा कारणों से अपने जहाजों को रोक दिया या रूट बदल दिया है. इससे सप्लाई चेन पर तुरंत असर पड़ा है और वैश्विक बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है.

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टैंकर मूवमेंट पर असर

टैंकर मूवमेंट पर असर 3 / 9

युद्ध जैसे हालात बनने के बाद तेल टैंकरों की आवाजाही में भारी कमी देखी गई है. बीमा कंपनियों ने इस रूट को ‘हाई रिस्क जोन’ घोषित कर दिया है, जिससे शिपिंग लागत भी कई गुना बढ़ गई है. कई टैंकर समुद्र में ही रुक गए या सुरक्षित बंदरगाहों की ओर मुड़ गए. इससे तेल की डिलीवरी में देरी होने लगी और सप्लाई चेन टूटने लगी. ये स्थिति खासतौर पर उन देशों के लिए चिंता की वजह बन गई है जो पूरी तरह आयातित तेल पर निर्भर हैं.

कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल

कच्चे तेल की कीमतों में जबरदस्त उछाल4 / 9

तेल सप्लाई में रुकावट आते ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला. ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई दोनों के दाम तेजी से बढ़े, जिससे ग्लोबल मार्केट में अस्थिरता फैल गई. ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि सप्लाई में थोड़ी सी भी कमी कीमतों को तेजी से बढ़ा देती है क्योंकि मांग लगातार बनी रहती है. इस स्थिति ने दुनिया भर की सरकारों और कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है.

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कितना लंबा चल सकता है ये संकट?

कितना लंबा चल सकता है ये संकट?5 / 9

विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर ये संकट कुछ हफ्तों में खत्म हो जाता है तो असर सीमित रहेगा. लेकिन अगर ये 3 से 4 महीने या उससे ज्यादा समय तक चलता है, तो इसका असर गहरा और व्यापक हो सकता है. लंबे समय तक सप्लाई बाधित रहने से न सिर्फ तेल की कीमतें बढ़ेंगी, बल्कि ट्रांसपोर्ट, मैन्युफैक्चरिंग और बाकी उद्योगों पर भी भारी दबाव पड़ेगा. इससे ग्लोबल आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी हो सकती है.

सप्लाई कब तक हो सकती है सामान्य?

सप्लाई कब तक हो सकती है सामान्य?6 / 9

तेल सप्लाई को सामान्य स्थिति में लौटने में समय लगता है क्योंकि इसमें लॉजिस्टिक्स, सुरक्षा और राजनीतिक स्थिरता तीनों अहम भूमिका निभाते हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर संघर्ष जल्दी खत्म भी हो जाए, तब भी सप्लाई चेन को पूरी तरह नॉर्मल होने में कई हफ्तों से लेकर महीनों तक का समय लग सकता है. वैकल्पिक मार्गों और स्टॉक का इस्तेमाल अस्थायी राहत दे सकता है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं है.

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भारत में महंगाई का खतरा

भारत में महंगाई का खतरा7 / 9

भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल आयात करता है, इसलिए ग्लोबल कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर यहां पड़ता है. तेल महंगा होने से पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं, जिससे ट्रांसपोर्ट और रोजमर्रा की चीजों की लागत भी बढ़ेगी. इसका असर आम लोगों की जेब पर पड़ेगा और महंगाई बढ़ सकती है. सरकार को सब्सिडी या टैक्स में बदलाव जैसे कदम उठाने पड़ सकते हैं.

रिजर्व का सहारा

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कई देशों ने इस संकट से निपटने के लिए अपने रणनीतिक तेल भंडार (Strategic Petroleum Reserves) का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है. ये भंडार इमरजेंसी में सप्लाई बनाए रखने के लिए बनाए जाते हैं. हालांकि, यह केवल सीमित समय तक ही राहत दे सकते हैं. अगर संकट लंबा चलता है, तो इन भंडारों पर भी दबाव बढ़ सकता है और कीमतों को कंट्रोल करना मुश्किल हो जाएगा.

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ग्लोबल इकॉनमी पर असर

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तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से ग्लोबल इकॉनमी पर बड़ा असर पड़ता है. ऊर्जा महंगी होने से प्रोडक्शन लागत बढ़ती है, जिससे वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें भी बढ़ती हैं. एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर ये स्थिति लंबे समय तक बनी रही, तो कई देशों में आर्थिक मंदी का खतरा पैदा हो सकता है. खासतौर पर विकासशील देशों पर इसका असर ज्यादा गंभीर होगा. (All Photos Credit: Social Media)

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लेखक के बारे में

Varsha Sikri

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वर्षा सिकरी News24 हिंदी डिजिटल में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. जर्नलिज्म में 9 साल का अनुभव रखने वाली वर्षा सिकरी राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. वर्षा सिकरी ने सितंबर 2017 में इंडिया टीवी से अपने करियर की शुरुआत की थी, जिसके बाद से उन्होंने रिपब्लिक टीवी, जी न्यूज, आज तक जैसे चैनलों में काम किया. फिलहाल वो News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 9 साल के करियर में वर्षा सिकरी ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. वर्षा सिकरी का पत्रकारिता में अनुभव: 9 साल योग्यता: NRAI स्कूल ऑफ मास कम्यूनिकेशन से ग्रेजुएशन करने के बाद वर्षा सिकरी ने मीडिया में अपने करियर की शुरुआत की. उन्होंने बतौर एंकर और रिपोर्टर भी काम किया है.
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