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दक्षिण अफ्रीका दुनिया का वह इकलौता देश है जिसने अपने परमाणु बम खुद ही बनाकर नष्ट कर दिए थे. राष्ट्रपति डी क्लार्क ने संसद में एलान किया था कि उनके पास छह एटमी बम थे जिन्हें अब पूरी तरह खत्म किया जा चुका है.
क्यों किया ऐसा फैसला?

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दक्षिण अफ्रीका अंतरराष्ट्रीय अलगाव को खत्म करना चाहता था और दुनिया के साथ अपने संबंध सुधारने की कोशिश में था. शीत युद्ध के खात्मे के साथ ही वहां क्षेत्रीय खतरे कम हो गए थे जिससे परमाणु हथियारों की जरूरत महसूस नहीं हुई.
कैसे हुई थी शुरुआत?

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साल 1948 में एटॉमिक एनर्जी बोर्ड बनाकर परमाणु ऊर्जा की खोज शुरू हुई और प्रिटोरिया के पास पेलिंडाबा प्लांट लगाया गया. यूरेनियम का बड़ा भंडार होने के कारण इस देश ने बहुत कम समय में खतरनाक तकनीक हासिल कर ली थी.
क्या थी असली वजह?

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रंगभेद की नीति का अंत होने वाला था और तत्कालीन सरकार नहीं चाहती थी कि नई लोकतांत्रिक सरकार को विरासत में परमाणु हथियार मिलें. शांति और लोकतंत्र की नई राह चुनने के लिए दक्षिण अफ्रीका ने हथियारों के जखीरे को जड़ से मिटा दिया.
क्या बदला माहौल?

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बर्लिन की दीवार गिरने और सोवियत संघ के बिखरने के बाद दुनिया के राजनीतिक हालात पूरी तरह बदल गए थे. अंगोला से सेनाओं की वापसी और नामीबिया की आजादी जैसे फैसलों ने दक्षिण अफ्रीका के लिए परमाणु निरोध को गैर-जरूरी बना दिया.
क्या बना रिकॉर्ड?

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दक्षिण अफ्रीका साल 1991 में परमाणु अप्रसार संधि यानी एनटीपी का हिस्सा बना और अपनी सभी साइट्स को जांच के लिए खोल दिया. आज यह दुनिया का अकेला उदाहरण है जिसने परमाणु क्लब का हिस्सा बनने के बाद स्वेच्छा से उसे छोड़ दिया.