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पश्चिमी देशों ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की सुरक्षा के लिए प्लान-बी शुरू किया है। फ्रांस की अगुवाई में 15 देश इस डिफेंसिव मिशन में शामिल हैं, जिसका उद्देश्य व्यावसायिक जहाजों को एस्कॉर्ट देकर सुरक्षित करना है। यह मिशन ईरान के साथ मिलकर काम करेगा।
यातायात फिर से शुरू करने की तैयारी

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होर्मुज दुनिया का सबसे अहम समुद्री रास्ता है, जहां से कुल तेल व्यापार का लगभग 20% गुजरता है। अगर यह बंद या असुरक्षित हो जाए, तो तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं और हर देश की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा। अमेरिका-ईरान तनाव के दौरान कई जहाजों ने यहां से गुजरना बंद कर दिया था, लेकिन अब सीजफायर के बाद यातायात फिर से शुरू करने की तैयारी है।
फ्रांस ने प्लान-बी बनाया

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फ्रांस ने प्लान-बी बनाया क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की सुरक्षा खतरे में थी। फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने बताया कि 15 से ज्यादा देश फ्रांस की अगुवाई में इस डिफेंसिव मिशन में शामिल हैं। इसका उद्देश्य ईरान के साथ मिलकर काम करते हुए व्यावसायिक जहाजों को सुरक्षित एस्कॉर्ट देना है, ताकि यातायात फिर से शुरू हो सके।
प्लान-बी क्यों बनाया

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प्लान-बी इसलिए बनाया गया क्योंकि सीजफायर के बाद भी होर्मुज में सुरक्षा की चिंता बनी हुई है और जहाज मालिक डरे हुए हैं। अमेरिका की भागीदारी के बिना भी पश्चिमी देश मिलकर सुरक्षा सुनिश्चित करना चाहते हैं। यह मिशन पूरी तरह डिफेंसिव होगा, जिसमें कोई हमला या आक्रामक कार्रवाई नहीं होगी।
बहुराष्ट्रीय रक्षात्मक मिशन

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प्लान-बी सक्रिय हुआ क्योंकि सीजफायर के बावजूद होर्मुज में यातायात अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुआ है। जहाज मालिक सुरक्षा व्यवस्था और बीमा कवर की प्रतीक्षा कर रहे हैं। पश्चिमी देशों ने इसे ध्यान में रखते हुए प्लान-बी के रूप में बहुराष्ट्रीय रक्षात्मक मिशन तैयार किया है, जो अमेरिका की सीधी भूमिका के बिना भी क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।