एक अंडे की कीमत 6000 रुपये, सेब की 1 लाख ! लद्दाख में ईरान की मदद के लिए लगी ऐसी बोली कि दुनिया रह गई हैरान

इंसानियत की कोई सरहद नहीं होती। लद्दाख के कारगिल में एक अंडा 6000 और एक सेब 1 लाख रुपये में बिका। ये सिर्फ नीलामी नहीं, बल्कि मुश्किल वक्त में ईरान के लोगों के लिए भारत का प्यार और समर्थन है। क्यों ईरान ने खासतौर पर कश्मीर और लद्दाख का शुक्रिया अदा किया? पूरी कहानी यहां देखें।

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लद्दाख और कारगिल से इंसानियत और जज्बे की एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। ईरान-इजरायल युद्ध के बीच, वहां के लोगों की मदद के लिए कारगिल के निवासियों ने जो दान दिया, उसकी मिसाल मिलना मुश्किल है।

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6000 में अंडा और 1 लाख में बिका एक सेब

6000 में अंडा और 1 लाख में बिका एक सेब2 / 7

पश्चिम एशिया में जारी जंग के बीच इंसानियत की एक अनोखी तस्वीर लद्दाख से आई है। यहां ईरान की मदद के लिए लोगों ने अपनी सबसे कीमती चीजें दान कर दीं। इस जज्बे का आलम यह था कि नीलामी में एक अंडा हजारों में और एक सेब लाखों में बिका।

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मुर्गी के अंडे ने रचा इतिहास

मुर्गी के अंडे ने रचा इतिहास3 / 7

कारगिल के काकसर गांव में एक महिला ने मस्जिद के बाहर अपनी 3 मुर्गियां दान की थीं। उनमें से एक मुर्गी ने जो अंडा दिया, उसकी बोली ₹100 से शुरू हुई। लोगों में दान का ऐसा उत्साह था कि वह साधारण सा अंडा ₹6,000 में नीलाम हुआ।

₹1.05 लाख में बिका एक सेब, जानकर रह जाएंगे दंग

₹1.05 लाख में बिका एक सेब, जानकर रह जाएंगे दंग4 / 7

कारकिछू गांव के सेब अपनी लंबी उम्र (Self-life) के लिए मशहूर हैं। नवंबर 2025 के बचे हुए एक सेब की नीलामी ₹200 से शुरू होकर ₹1.05 लाख तक पहुंच गई। इसे स्थानीय कारोबारी इलियास ने ईरान की मदद के लिए इतनी बड़ी कीमत चुकाकर खरीदा।

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गुल्लक से लेकर गहनों तक... बच्चों ने भी बढ़ाया हाथ

गुल्लक से लेकर गहनों तक... बच्चों ने भी बढ़ाया हाथ5 / 7

मार्च 2026 में ईरानी सुप्रीम लीडर की मौत के बाद घाटी में शोक और समर्थन की लहर दौड़ गई। लोगों ने सिर्फ पैसा ही नहीं, बल्कि घरों के बर्तन, सोने-चांदी के गहने और छोटे बच्चों ने अपने बरसों से जमा किए हुए गुल्लक तक ईरान के रिलीफ फंड के लिए दान कर दिए।

ईरान ने कहा- थैंक्यू इंडिया, सोशल मीडिया पर जताया आभार

ईरान ने कहा- थैंक्यू इंडिया, सोशल मीडिया पर जताया आभार6 / 7

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख से मिले इस निस्वार्थ समर्थन को देखकर ईरान भी गदगद है। भारत में मौजूद ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर खासतौर पर लद्दाख और कश्मीर के लोगों का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद कहा है।

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आखिर कहां जाता है यह चंदा? जानें पूरी प्रक्रिया

आखिर कहां जाता है यह चंदा? जानें पूरी प्रक्रिया7 / 7

नीलामी और दान से इकट्ठा किया गया सारा पैसा नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास को भेजा जाता है। वहां से इस राशि को युद्ध प्रभावित लोगों की मदद और पुनर्निर्माण के कार्यों के लिए ईरान भेजा जा रहा है। लद्दाख के इस छोटे से योगदान ने वैश्विक स्तर पर बड़े संदेश दिए हैं।

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लेखक के बारे में

Vandana Bharti

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती News 24 में बतौर ड‍िप्‍टी न्‍यूज एडिटर कार्यरत हैं और मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं. वन्दना News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबरें लिखती हैं. वन्‍दना ने अपने करियर की शुरुआत दैन‍िक जागरण अखबार से की. इसके बाद देशबंधु अखबार में उन्होंने ब‍िजनेस रिपोर्टिंग में अपनी विशेषज्ञता विकसित की. साल 2010 में उन्होंने ह‍िन्‍दुस्‍तान अखबार में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने ब‍िजनेस पेज के लिए 6 साल तक काम किया. वन्‍दना, आजतक डिजिटल, India.com और News18.com जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स में बिजनेस डेस्क से जुड़ी रही हैं. वन्दना ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है. कॉमर्स बैकग्राउंड होने के कारण उनकी बिजनेस की खबरों में अच्छी पकड़ है और इन खबरों को वह आसान भाषा में यूजर्स तक पहुंचाती हैं. कितने साल का अनुभव: 18 साल योग्यता: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम और नई द‍िल्‍ली के YMCA संस्‍थान से पत्रकार‍िता में पीजीडीएमए की डिग्री प्राप्त की है.
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