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लद्दाख और कारगिल से इंसानियत और जज्बे की एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। ईरान-इजरायल युद्ध के बीच, वहां के लोगों की मदद के लिए कारगिल के निवासियों ने जो दान दिया, उसकी मिसाल मिलना मुश्किल है।
6000 में अंडा और 1 लाख में बिका एक सेब

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पश्चिम एशिया में जारी जंग के बीच इंसानियत की एक अनोखी तस्वीर लद्दाख से आई है। यहां ईरान की मदद के लिए लोगों ने अपनी सबसे कीमती चीजें दान कर दीं। इस जज्बे का आलम यह था कि नीलामी में एक अंडा हजारों में और एक सेब लाखों में बिका।
मुर्गी के अंडे ने रचा इतिहास

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कारगिल के काकसर गांव में एक महिला ने मस्जिद के बाहर अपनी 3 मुर्गियां दान की थीं। उनमें से एक मुर्गी ने जो अंडा दिया, उसकी बोली ₹100 से शुरू हुई। लोगों में दान का ऐसा उत्साह था कि वह साधारण सा अंडा ₹6,000 में नीलाम हुआ।
₹1.05 लाख में बिका एक सेब, जानकर रह जाएंगे दंग

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कारकिछू गांव के सेब अपनी लंबी उम्र (Self-life) के लिए मशहूर हैं। नवंबर 2025 के बचे हुए एक सेब की नीलामी ₹200 से शुरू होकर ₹1.05 लाख तक पहुंच गई। इसे स्थानीय कारोबारी इलियास ने ईरान की मदद के लिए इतनी बड़ी कीमत चुकाकर खरीदा।
गुल्लक से लेकर गहनों तक... बच्चों ने भी बढ़ाया हाथ

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मार्च 2026 में ईरानी सुप्रीम लीडर की मौत के बाद घाटी में शोक और समर्थन की लहर दौड़ गई। लोगों ने सिर्फ पैसा ही नहीं, बल्कि घरों के बर्तन, सोने-चांदी के गहने और छोटे बच्चों ने अपने बरसों से जमा किए हुए गुल्लक तक ईरान के रिलीफ फंड के लिए दान कर दिए।
ईरान ने कहा- थैंक्यू इंडिया, सोशल मीडिया पर जताया आभार

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जम्मू-कश्मीर और लद्दाख से मिले इस निस्वार्थ समर्थन को देखकर ईरान भी गदगद है। भारत में मौजूद ईरानी दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर खासतौर पर लद्दाख और कश्मीर के लोगों का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद कहा है।
आखिर कहां जाता है यह चंदा? जानें पूरी प्रक्रिया

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नीलामी और दान से इकट्ठा किया गया सारा पैसा नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास को भेजा जाता है। वहां से इस राशि को युद्ध प्रभावित लोगों की मदद और पुनर्निर्माण के कार्यों के लिए ईरान भेजा जा रहा है। लद्दाख के इस छोटे से योगदान ने वैश्विक स्तर पर बड़े संदेश दिए हैं।