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ईरान का खार्ग आइलैंड दुनिया के सबसे अहम तेल केंद्रों में से एक है. इतिहास में ब्रिटेन समेत कई ताकतों ने इसे कब्जाने की कोशिश की, लेकिन कोई भी लंबे समय तक इसे अपने कंट्रोल में नहीं रख पाया. जानिए इसकी पूरी कहानी.
खार्ग आइलैंड कहां है और क्यों अहम है?

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खार्ग आइलैंड फारस की खाड़ी में ईरान के तट से लगभग 25 किमी दूर मौजूद एक छोटा सा द्वीप है. लेकिन इसका महत्व बेहद बड़ा है. ये द्वीप ईरान के लगभग 90% तेल निर्यात का मुख्य केंद्र है, जिससे ये पूरी दुनिया के लिए रणनीतिक रूप से बेहद अहम बन जाता है.
दुनिया की नजर में ‘फॉरबिडन आइलैंड’

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खार्ग आइलैंड को अक्सर 'फॉरबिडन आइलैंड' कहा जाता है क्योंकि यहां आम लोगों की पहुंच सीमित है. यहां भारी सैन्य सुरक्षा और तेल भंडारण सुविधाएं मौजूद हैं, जो इसे एक संवेदनशील क्षेत्र बनाती हैं.
यूरोपीय ताकतों की नजर क्यों पड़ी?

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16वीं से 18वीं सदी के बीच पुर्तगाल, डच और ब्रिटिश जैसी ताकतों ने इस द्वीप पर कंट्रोल पाने की कोशिश की. इसकी लोकेशन और समुद्री व्यापार के लिए महत्व ने इसे एक आकर्षक रणनीतिक ठिकाना बना दिया.
ब्रिटेन ने कब किया कब्जा?

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ब्रिटेन ने 19वीं सदी में पहली बार खार्ग आइलैंड पर कब्जा किया. उस समय द्वीप पर ज्यादा सुरक्षा नहीं थी, इसलिए ब्रिटिश सेना ने इसे आसानी से अपने नियंत्रण में ले लिया और 1842 तक यहां कब्जा बनाए रखा. 1854–56 के क्रीमियन युद्ध के दौरान ब्रिटेन ने दोबारा इस द्वीप पर कब्जा किया. लेकिन 1857 की संधि (ट्रीटी ऑफ पेरिस) के बाद ब्रिटेन को इसे छोड़ना पड़ा और ईरान को वापस सौंप दिया गया.
आखिर ब्रिटेन इसे क्यों नहीं रख पाया?

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ब्रिटेन के पास सैन्य ताकत होने के बावजूद वह लंबे समय तक खार्ग आइलैंड पर नियंत्रण नहीं रख सका. इसका कारण था स्थानीय विरोध, क्षेत्रीय राजनीति और उस समय द्वीप का सीमित आर्थिक महत्व (क्योंकि तेल उद्योग तब विकसित नहीं हुआ था).
तेल बनने के बाद बढ़ी अहमियत

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1960 के दशक में जब खार्ग आइलैंड को तेल टर्मिनल के रूप में विकसित किया गया, तब इसकी अहमियत कई गुना बढ़ गई. आज यह ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है. इजराइल-ईरान तनाव के बीच खार्ग आइलैंड एक बड़ा रणनीतिक टारगेट बन गया है. अगर इस द्वीप को नुकसान पहुंचता है, तो न केवल ईरान बल्कि पूरी दुनिया की तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है.
(All Photos Credit: Social Media)