ईरान वॉर से 'अकाल' जैसी स्थिति का खतरा! भुखमरी की कगार पर 4.5 करोड़ लोग, वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट कर देगी हैरान

ईरान अमेरिका और इजरायल के बीच जारी युद्ध का असर पूरी दुनिया पर दिखाई दे रहा है. इस तनाव के कारण अब पूरी दुनिया की थाली पर भी संकट खड़ा हो गया है. वर्ल्ड बैंक ने बेहद डरावनी चेतावनी जारी की है, जिसके मुताबिक इस तनाव के कारण दुनिया भर में करीब साढ़े चार करोड़ यानी कि 45 मिलियन लोग भुखमरी की कगार पर पहुंच सकते हैं.

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वर्ल्ड बैंक की फूड क्राइसिस अलर्ट रिपोर्ट

वर्ल्ड बैंक की फूड क्राइसिस अलर्ट रिपोर्ट2 / 6

वर्ल्ड बैंक की फूड क्राइसिस अलर्ट की रिपोर्ट के अनुसार, अगर ईरान और उसके आस-पास युद्ध की स्थिति और बिगड़ती है तो ग्लोबल सप्लाई चेन पूरी तरह चरमरा जाएगी. ईरान के पास स्थित स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री रास्तों में से एक है. यहां से न सिर्फ तेल, बल्कि अनाज और फर्टिलाइजर का भी बड़ा हिस्सा गुजरता है. अगर यह रास्ता प्रभावित होता है तो खाने-पीने की चीजों की कीमतें आसमान छूने लगेंगी.

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किन देशों पर पड़ेगा सबसे बुरा असर?

किन देशों पर पड़ेगा सबसे बुरा असर?3 / 6

रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने बताया कि इसका सबसे बुरा असर उन गरीब और विकासशील देशों पर पड़ेगा जो पहले से ही मंहगाई और जलवायु परिवर्तन की मार झेल रहे हैं. ऐसे देशों में पहले से ही खाने के सामान की कमी है और अब उनकी बढ़ती कीमतों के कारण वहां कुपोषण और सामाजिक अस्थिरता बढ़ने का खतरा है. वर्ल्ड बैंक ने साफ किया है कि अगल युद्ध और ज्यादा लंबा खिंचता है तो वैश्विक खाद्य सुरक्षा दशकों पीछे चली जाएगी.

वर्ल्ड बैंक ने 'एनर्जी फूड लिंक' को लेकर किया आगाह

वर्ल्ड बैंक ने 'एनर्जी फूड लिंक' को लेकर किया आगाह4 / 6

इसके अलावा विश्व बैंक ने विशेष रूप से 'एनर्जी फूड लिंक' को लेकर आगाह किया है. रिपोर्ट में बताया गया है कि अगर ईरान वॉर के कारण कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं तो इसका सीधा असर खेती की लागत पर पड़ेगा. खाद बनाने के लिए प्राकृतिक गैस की जरूरत होती है और फसल की कटाई व ढुलाई के लिए डीजल की. जब ऊर्जा महंगी होती है तो किसानों के लिए खेती करना मुश्किल हो जाता है, जिससे वैश्विक स्तर पर अनाज का उत्पादन भी कम हो सकता है.

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विकसित और विकासशील दोनों देशों पर पड़ेगा असर

विकसित और विकासशील दोनों देशों पर पड़ेगा असर5 / 6

वर्ल्ड बैंक ने इसे केवल एक क्षेत्रीय तनाव नहीं, बल्कि एक ग्लोबल कमोडिटी शॉक के रूप में देखा है, इसका असर विकसित और विकासशील दोनों तरह की अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ सकता है.

क्यों महंगी हो जाती है चीजें?

क्यों महंगी हो जाती है चीजें?6 / 6

युद्ध सिर्फ सीमाओं पर नहीं लड़ा जाता है बल्कि इसकी गूंज आम आदमी की रसोई को भी प्रभावित करती है. तेल की कीमतों में बढ़ोतरी होने से खेती की लागत और ट्रांसपोर्टेशन का खर्च भी बढ़ जाता है, जिससे हर चीज महंगी हो जाती है. अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस समय भारी दबाव में है ताकि इस संभावित मानवीय आपदा को रोका जा सके.

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लेखक के बारे में

Versha Singh

Versha Singh

वर्षा स‍िंह News 24 ड‍िजिटल में बतौर सीन‍ियर सब एड‍िटर के पद पर कार्यरत हैं. वर्षा को ड‍िजिटल मीड‍िया में 6 साल से अधि‍क का अनुभव है. राष्‍ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और समसमाय‍िक व‍िषयों पर वर्षा की अच्‍छी पकड़ है. इसके अलावा राजनीत‍िक, क्राइम और ट्रेंडिंग खबरें भी ल‍िखती हैं. वर्षा ने मास्टर इन न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी की पढ़ाई माखन लाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल से की है और जर्नलिज्म एवं मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री लखनऊ विश्वविद्यालय से प्राप्त की है. वर्षा अपने करियर में Jagran New Media, Asia News International (ANI) और ETV Bharat जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं. उन्हें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लेखन और समसामयिक घटनाओं, राजनीति, हाइपरलोकल खबरों और मानवीय रुचि से जुड़ी कहानियों को डिजिटल दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का अनुभव है.
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