New Rent Rules 2026: हर किरायेदार के लिए असली सच जानना जरूरी

नए किराया नियम 2026 जब से ऑनलाइन वायरल हुए हैं, तबसे किरायेदारों और मकान मालिकों के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है. हालांकि ऑनलाइन साझा किए जा रहे कई बिंदु तकनीकी रूप से सही हैं, लेकिन वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है. ज्यादातर दावे भ्रामक हैं, कोई नया 2026 कानून नहीं आया है.

New Rent Rules 2026 truth or fake
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सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे पोस्ट्स में दावा किया जा रहा है कि 2026 से भारत में नए रेंट नियम लागू हो गए हैं, जिनके तहत मकान मालिक किराएदार को बिना कानूनी प्रक्रिया के बेदखल नहीं कर सकते. कई पोस्ट्स में लोग दावा कर रहे हैं कि भारत ने किरायेदारी कानूनों में बड़े बदलाव किए हैं. इन पोस्टों में दावा किया गया है कि सरकार ने किराया, जमा राशि और बेदखली प्रक्रियाओं से संबंधित नए नियम लागू किए हैं, जबकि कोई नया 2026 कानून नहीं आया है.

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'नए रेंट नियम 2026' बारे में दावे

'नए रेंट नियम 2026' बारे में दावे2 / 6

ऑनलाइन प्रसारित हो रही इन पोस्टों में दावा किया गया है कि मकान मालिक आवासीय संपत्तियों के लिए सुरक्षा जमा के रूप में दो महीने के किराए से अधिक राशि नहीं ले सकते हैं. यह भी कहा जा रहा है कि मकान मालिक 12 महीने बाद ही किराए में संशोधन कर सकते हैं और किराया बढ़ाने से पहले किरायेदारों को कम से कम 90 दिन का लिखित नोटिस देना होगा.

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24 घंटे का लिखित नोटिस देना होगा

24 घंटे का लिखित नोटिस देना होगा3 / 6

कई पोस्ट में यह भी कहा गया है कि मकान मालिकों को निरीक्षण या मरम्मत के लिए संपत्ति में प्रवेश करने से पहले किरायेदारों को कम से कम 24 घंटे का लिखित नोटिस देना होगा. अन्य दावे के अनुसार, यदि बड़ी मरम्मत की आवश्यकता हो, तो किरायेदार को सूचित करना होगा. यदि मकान मालिक 30 दिनों के भीतर समाधान नहीं करता है, तो किरायेदार स्वयं मरम्मत करवा सकता है और उसका खर्च किराए में से काट सकता है.

अब दंडनीय होंगे धमकाने जैसे कृत्य

अब दंडनीय होंगे धमकाने जैसे कृत्य 4 / 6

इन पोस्टों में आगे दावा किया गया कि ताले बदलना, बिजली या पानी काट देना या किरायेदारों को धमकाना जैसे कृत्य अब दंडनीय होंगे. कुछ रिपोर्टों में यह भी उल्लेख किया गया है कि किराए का भुगतान न करने, संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या समझौते के उल्लंघन से संबंधित किराये के विवादों को त्वरित रूप से निपटाया जाएगा और किराया अदालतों या न्यायाधिकरणों द्वारा 60 दिनों के भीतर उनका निपटारा किया जाएगा.

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आवास और किरायेदारी संबंधी कानून

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भारत में आवास और किरायेदारी संबंधी कानून राज्य सरकारों द्वारा शासित होते हैं. प्रत्येक राज्य को अपने स्वयं के किराये संबंधी नियम बनाने या उनमें संशोधन करने का अधिकार है. दिसंबर 2021 में लोकसभा में जवाब में, राज्य मंत्री कौशल किशोर ने स्पष्ट किया कि भूमि और उपनिवेशीकरण राज्यों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं. राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को आदर्श किरायेदारी अधिनियम को अपनाने की सलाह दी गई है.

किन राज्यों ने अधिनियम को अपनाया?

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पिछले साल अगस्त में राज्यसभा में दिए जवाब के अनुसार, अब तक केवल कुछ ही क्षेत्रों ने आदर्श किरायेदारी अधिनियम पर आधारित किरायेदारी कानूनों को अपनाया है. इनमें असम, अरुणाचल प्रदेश, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, दादरा और नगर हवेली, दमन और दीव और लक्षद्वीप शामिल हैं. आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों ने पुराने मसौदे पर किरायेदारी कानूनों को पहले अधिसूचित कर दिया था.

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लेखक के बारे में

Vijay Jain

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
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