आखिर क्यों इस मुगल बादशाह को दो बार दफनाया गया? आगरा से काबुल तक की दिलचस्प कहानी

मुगल साम्राज्य के संस्थापक बाबर को इतिहास में एक अनोखी वजह से याद किया जाता है. उन्हें मरने के बाद एक नहीं बल्कि दो बार दफनाया गया था. पहले आगरा में और करीब 14 साल बाद उनकी कब्र काबुल ले जाकर फिर से दफनाया गया. जानिए इसके पीछे की पूरी कहानी.

Mughal Emperor Babur Was Buried Twice
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Credit: Social Media

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कौन था बाबर, जिसने भारत में मुगल साम्राज्य की नींव रखी

कौन था बाबर, जिसने भारत में मुगल साम्राज्य की नींव रखी2 / 7

जहीरुद्दीन मोहम्मद बाबर भारत में मुगल साम्राज्य के संस्थापक थे. उन्होंने 1526 में पानीपत की पहली लड़ाई में इब्राहिम लोदी को हराकर दिल्ली की सत्ता हासिल की और भारत में मुगल शासन की शुरुआत की. बाबर तैमूर और चंगेज खान की वंश परंपरा से जुड़े थे और बहुत कम उम्र में ही सत्ता संभाल ली थी.

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बाबर की मौत कब और कहां हुई

बाबर की मौत कब और कहां हुई3 / 7

मुगल सम्राट बाबर की मृत्यु 26 दिसंबर 1530 को आगरा में हुई थी. उस समय वो सिर्फ 47 साल के थे. कहा जाता है कि उनके बेटे हुमायूं की गंभीर बीमारी के दौरान बाबर ने ईश्वर से प्रार्थना की थी कि बेटे की जान बच जाए और उसकी जगह उनकी जान ले ली जाए. कुछ समय बाद हुमायूं ठीक होने लगा और बाबर की तबीयत बिगड़ती चली गई.

आगरा के आराम बाग में बनाई गई थी पहली कब्र

आगरा के आराम बाग में बनाई गई थी पहली कब्र4 / 7

बाबर की मृत्यु के बाद उन्हें तुरंत आगरा में यमुना नदी के किनारे बने आराम बाग में दफनाया गया. ये बाग खुद बाबर ने 1528 में बनवाया था और इसे भारत का सबसे पुराना मुगल गार्डन माना जाता है. हालांकि ये बाबर की अंतिम इच्छा के मुताबिक चुनी गई जगह नहीं थी, बल्कि परिस्थितियों के कारण उसे वहीं दफनाया गया था.

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बाबर की अंतिम इच्छा क्या थी

बाबर की अंतिम इच्छा क्या थी 5 / 7

इतिहासकारों के मुताबिक, बाबर को काबुल की वादियों और वहां के पहाड़ों से बहुत लगाव था. उन्होंने अपनी आत्मकथा ‘बाबरनामा’ में लिखा था कि उनकी मृत्यु के बाद उसे काबुल में दफनाया जाए. बाबर काबुल को ही अपना असली घर समझते थे

14 साल बाद कब्र खोदकर काबुल ले जाया गया शव

14 साल बाद कब्र खोदकर काबुल ले जाया गया शव6 / 7

बाबर की अंतिम इच्छा तुरंत पूरी नहीं हो सकी. उनकी मृत्यु के करीब 14 साल बाद यानी लगभग 1544 में उनके पार्थिव अवशेषों को आगरा से निकालकर अफगानिस्तान के काबुल ले जाया गया. वहां पूरे सम्मान के साथ उन्हें फिर से दफनाया गया.

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काबुल के 'बाग-ए-बाबर' में है आखिरी कब्र

काबुल के 'बाग-ए-बाबर' में है आखिरी कब्र7 / 7

आज बाबर की असली कब्र अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में मौजूद ‘बाग-ए-बाबर’ में है. ये एक ऐतिहासिक उद्यान है जिसे बाबर ने अपने जीते जी बनवाया था. इसी जगह उन्हें अंतिम रूप से दफनाया गया और ये मुगल इतिहास का एक महत्वपूर्ण स्मारक बन गया.

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लेखक के बारे में

Varsha Sikri

Varsha Sikri

वर्षा सिकरी News24 हिंदी डिजिटल में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. जर्नलिज्म में 9 साल का अनुभव रखने वाली वर्षा सिकरी राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. वर्षा सिकरी ने सितंबर 2017 में इंडिया टीवी से अपने करियर की शुरुआत की थी, जिसके बाद से उन्होंने रिपब्लिक टीवी, जी न्यूज, आज तक जैसे चैनलों में काम किया. फिलहाल वो News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 9 साल के करियर में वर्षा सिकरी ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. वर्षा सिकरी का पत्रकारिता में अनुभव: 9 साल योग्यता: NRAI स्कूल ऑफ मास कम्यूनिकेशन से ग्रेजुएशन करने के बाद वर्षा सिकरी ने मीडिया में अपने करियर की शुरुआत की. उन्होंने बतौर एंकर और रिपोर्टर भी काम किया है.
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