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अंजीर (Fig) को लेकर एक दिलचस्प बहस चल रही है कि इसे ‘मांसाहारी फल’ क्यों कहा जाता है. इसके पीछे एक अनोखी नेचुरल प्रोसेस है, जिसमें एक कीट की भूमिका होती है. यही वजह है कि जैन धर्म के लोग इसे खाने से परहेज करते हैं.
अंजीर क्यों बना चर्चा का विषय?

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अंजीर (Fig) सदियों से एक बेहद पौष्टिक और लोकप्रिय फल माना जाता है. इसे ताजे और सूखे दोनों रूपों में खाया जाता है और यह फाइबर, आयरन, कैल्शियम और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है. लेकिन हाल ही में सोशल मीडिया और इंटरनेट पर यह चर्चा तेज हो गई है कि क्या अंजीर वास्तव में शाकाहारी है या नहीं. इस बहस की वजह इसकी अनोखी ऑर्गेनिक प्रोसेस है, जिसमें एक छोटे से कीट की अहम भूमिका होती है. इस जानकारी ने कई लोगों को हैरान कर दिया है, खासकर उन लोगों को जो सख्ती से शाकाहारी भोजन का पालन करते हैं.
‘मांसाहारी फल’ कहने की वजह क्या है?

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अंजीर को ‘मांसाहारी फल’ कहने के पीछे कोई सीधा मांसाहार नहीं, बल्कि एक नेचुरल प्रोसेस है. इस प्रक्रिया में एक खास तरह की ततैया (Fig Wasp) अंजीर के अंदर जाकर पोलिनेशन करती है. क्योंकि इस प्रक्रिया में एक जीवित कीट शामिल होता है और कई मामलों में उसकी मृत्यु भी हो जाती है, इसलिए कुछ लोग इसे मांसाहारी मान लेते हैं. हालांकि वैज्ञानिक दृष्टि से यह पूरी तरह प्राकृतिक और पौधों की प्रजनन प्रक्रिया का हिस्सा है.
अंजीर के अंदर क्या होता है?

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अंजीर बाकी फलों की तरह बाहर फूल बनाकर फल नहीं देता. बल्कि यह एक “इनवर्टेड फ्लावर” (उल्टा फूल) होता है, जिसे साइकोनियम (Syconium) कहा जाता है. इसका मतलब है कि इसके फूल बाहर नहीं बल्कि अंदर होते हैं. जब आप अंजीर को काटते हैं, तो उसके अंदर जो छोटे-छोटे दाने दिखाई देते हैं, वही असल में उसके फूल और बीज होते हैं. इन फूलों तक पराग पहुंचाने के लिए एक स्पेशल तरह के ततैया की जरूरत होती है, जो इस जटिल प्रक्रिया को पूरा करती है.
ततैया की भूमिका क्या होती है?

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मादा फिग वास्प (Fig Wasp) अंजीर के अंदर एक बहुत छोटे छेद (ओस्टिओल) से एंट्री करती है. यह छेद इतना छोटा होता है कि अंदर जाते समय ततैया के पंख और एंटीना तक टूट जाते हैं. अंदर जाकर वह अंजीर के फूलों में अपने अंडे देती है और साथ ही पोलिनेशन प्रोसेस को भी पूरा करती है. चूंकि वह वापस बाहर नहीं निकल पाती, इसलिए उसकी लाइफ वहीं खत्म हो जाती है. यही वजह है कि इस प्रक्रिया को लेकर लोगों में अलग-अलग धारणाएं बनती हैं.
क्या अंजीर में कीड़े रहते हैं?

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यह एक गलतफहमी है कि हर अंजीर के अंदर मृत कीट मौजूद होते हैं. हकीकत यह है कि अंजीर में एक स्पेशल एंजाइम (Ficin) पाया जाता है, जो ततैया के शरीर को पूरी तरह तोड़ देता है. इस प्रक्रिया के बाद उस कीट का कोई ठोस हिस्सा फल में नहीं बचता, बल्कि वो पूरी तरह प्राकृतिक रूप से फल का हिस्सा बन जाता है. इसलिए जब आप अंजीर खाते हैं, तो उसमें आपको कोई कीड़ा नजर नहीं आता.
जैन धर्म में क्यों नहीं खाया जाता अंजीर?

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जैन धर्म का मूल सिद्धांत अहिंसा (Non-violence) है, जिसमें छोटे से छोटे जीवों को भी नुकसान न पहुंचाने की बात कही गई है. चूंकि अंजीर की प्राकृतिक प्रक्रिया में एक जीव (ततैया) का जीवन खत्म हो जाता है और इसमें सूक्ष्म जीवों की संभावना भी रहती है, इसलिए जैन समुदाय के लोग इसे खाने से परहेज करते हैं.
क्या हर अंजीर ऐसा ही होता है?

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आज के समय में कृषि तकनीक काफी विकसित हो चुकी है. कई जगहों पर ऐसे अंजीर भी उगाए जाते हैं, जिनमें पोलिनेशन की प्रक्रिया बिना ततैया के ही पूरी कर ली जाती है. इन्हें “पार्थेनोकार्पिक” (Parthenocarpic) अंजीर कहा जाता है, जो बिना बीज के या बिना कीट की मदद के भी विकसित हो सकते हैं.
(All Photos Credit: Social Media)
इसलिए यह जरूरी नहीं है कि हर अंजीर में वही प्राकृतिक प्रक्रिया शामिल हो, जिसके कारण विवाद पैदा होता है.