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आज मोबाइल फोन हर किसी की जेब में है, लेकिन एक समय ऐसा भी था जब टेलीफोन सिर्फ अमीर लोगों और बड़े व्यापारियों के पास होता था. भारत में टेलीफोन सेवा की शुरुआत ब्रिटिश शासन के दौरान हुई थी और शुरुआती दौर में इसके यूजर्स बहुत कम थे. उस समय फोन नंबर भी आज की तरह लंबे नहीं होते थे. आइए जानते हैं कि भारत में पहला टेलीफोन कनेक्शन किसे मिला और उस समय फोन नंबर कैसे होते थे.
भारत में टेलीफोन सेवा की शुरुआत कैसे हुई?

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भारत में टेलीफोन सेवा की शुरुआत ब्रिटिश शासन के दौरान हुई थी. 19वीं सदी के आखिर में जब दुनिया के कई देशों में टेलीफोन तकनीक पहुंच रही थी, तब भारत में भी इसे शुरू करने की योजना बनाई गई. 1881 में ब्रिटिश सरकार ने भारत में टेलीफोन सेवा शुरू करने की इजाजत दी. इसके बाद देश के बड़े शहरों में टेलीफोन एक्सचेंज स्थापित किए जाने लगे. ये उस समय एक नई और आधुनिक तकनीक मानी जाती थी.
भारत का पहला टेलीफोन एक्सचेंज

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भारत का पहला टेलीफोन एक्सचेंज 28 जनवरी 1882 को कोलकाता में शुरू किया गया था. उस समय कोलकाता ब्रिटिश भारत की राजधानी था और व्यापार तथा प्रशासन का बड़ा केंद्र भी था. शुरुआत में इस एक्सचेंज से बहुत कम लोग जुड़े थे, लेकिन धीरे-धीरे इसका इस्तेमाल बढ़ने लगा और बाकी शहरों में भी टेलीफोन सेवा शुरू की गई.
पहला भारतीय जिसे मिला टेलीफोन कनेक्शन

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शुरुआती दौर में टेलीफोन कनेक्शन ज्यादातर ब्रिटिश अधिकारियों और बड़ी कंपनियों को दिए गए थे. हालांकि माना जाता है कि कोलकाता के मशहूर व्यापारी बाबू सागोर दत्ता उन पहले भारतीयों में शामिल थे जिन्हें टेलीफोन कनेक्शन मिला था. उस समय ये एक बड़ी बात मानी जाती थी क्योंकि टेलीफोन तकनीक बहुत सीमित लोगों तक ही पहुंची थी.
बहुत महंगा होता था टेलीफोन लगवाना

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उस समय टेलीफोन लगवाना आसान नहीं था. इसकी कीमत बहुत ज्यादा होती थी और इसके लिए अलग से उपकरण भी लगवाने पड़ते थे. इसलिए केवल अमीर व्यापारी, बड़े उद्योगपति और सरकारी अधिकारी ही इसका इस्तेमाल कर पाते थे. आम लोगों के लिए टेलीफोन एक लग्जरी चीज माना जाता था.
उस समय ऐसे होते थे फोन नंबर

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आज भारत में मोबाइल नंबर 10 अंकों के होते हैं, लेकिन शुरुआती समय में फोन नंबर बहुत छोटे होते थे. कई शहरों में सिर्फ दो या तीन अंकों के नंबर ही दिए जाते थे क्योंकि टेलीफोन उपयोग करने वाले लोगों की संख्या बहुत कम थी. उस समय कॉल करने के लिए ऑपरेटर की मदद भी लेनी पड़ती थी. जैसे-जैसे टेलीफोन सेवा का विस्तार होने लगा, वैसे-वैसे फोन नंबरों की संख्या भी बढ़ने लगी. पहले जहां दो या तीन अंकों के नंबर होते थे, वहीं बाद में 5 अंकों और फिर 7 अंकों के नंबर शुरू किए गए. समय के साथ-साथ देश की आबादी और मोबाइल कनेक्शन बढ़ने के कारण अब 10 अंकों का नंबर सिस्टम लागू है.
भारत में तेजी से बढ़ी टेलीफोन सेवा

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20वीं सदी में टेलीफोन सेवा का तेजी से विस्तार हुआ. बड़े शहरों के अलावा छोटे शहरों में भी टेलीफोन एक्सचेंज खोले जाने लगे. आजादी के बाद भारत सरकार ने दूरसंचार क्षेत्र के विकास पर खास ध्यान दिया और धीरे-धीरे टेलीफोन आम लोगों तक पहुंचने लगा.
आज पूरी तरह बदल गई संचार की दुनिया

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आज भारत दुनिया के सबसे बड़े टेलीकॉम बाजारों में से एक है. मोबाइल फोन, इंटरनेट कॉलिंग और वीडियो कॉलिंग जैसी सुविधाओं ने संचार की दुनिया को पूरी तरह बदल दिया है. जो तकनीक कभी सिर्फ अमीर लोगों तक सीमित थी, वो आज लगभग हर व्यक्ति की पहुंच में है.
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