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लक्जमबर्ग में टीचर्स को दुनिया में सबसे ज्यादा सैलरी दी जाती है जहां शुरुआती वेतन ही करीब 60 लाख रुपये सालाना से शुरू होता है. तजुर्बेकार शिक्षक यहां साल के 86 लाख से 1.24 करोड़ रुपये तक आसानी से कमा लेते हैं जो किसी भी अन्य देश के मुकाबले बहुत ज्यादा है.
जर्मनी का हाल?

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जर्मनी में शिक्षकों का वेतन उनके अनुभव के आधार पर तय किया जाता है और वहां मास्टर्स डिग्री वालों को खास तवज्जो मिलती है. 10 से 15 साल का अनुभव रखने वाले टीचर्स यहां सालाना 59 लाख से 72 लाख रुपये तक का शानदार पैकेज पाते हैं.
स्विट्जरलैंड की कमाई?

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स्विट्जरलैंड में भी टीचर्स की सैलरी काफी हाई होती है और वहां शुरुआती स्तर पर ही लगभग 65 लाख रुपये सालाना मिलते हैं. 20 साल से ज्यादा का अनुभव होने पर यह कमाई 85 लाख रुपये के पार पहुंच जाती है जो रहने के ऊंचे खर्च को कवर करती है.
डेनमार्क और नीदरलैंड?

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डेनमार्क में सेकेंडरी स्कूल के टीचर्स औसतन 55 लाख से 68 लाख रुपये सालाना कमाते हैं जो वहां की बेहतरीन जीवनशैली का हिस्सा है. नीदरलैंड्स में भी अनुभवी शिक्षकों को साल के 60 लाख से 80 लाख रुपये तक दिए जाते हैं जिससे यह एक आकर्षक विकल्प है.
अन्य अमीर देश?

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ऑस्ट्रेलिया में 10 साल के अनुभव वाले टीचर्स करीब 65 लाख रुपये कमाते हैं जबकि दक्षिण कोरिया में यह आंकड़ा 68 लाख रुपये तक जाता है. इन देशों में शिक्षा के स्तर को ऊंचा रखने के लिए सरकारें शिक्षकों के वेतन पर बहुत बड़ी रकम खर्च करती हैं.
भारत का नंबर?

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सैलरी के मामले में भारत दुनिया के टॉप हाई पेइंग देशों की लिस्ट में शामिल नहीं है और इसे मिड या लो कैटेगरी में रखा जाता है. यहां सरकारी शिक्षकों की सालाना कमाई 3 लाख से 10 लाख रुपये के बीच होती है जबकि प्राइवेट स्कूलों में यह और भी कम हो सकती है.