
1 / 6
इंटरनेशनल पॉलिटिक्स में बफर स्टेट उन छोटे देशों को कहा जाता है जो दो बड़े और बेहद शक्तिशाली देशों के बीच स्थित होते हैं. आसान भाषा में समझें तो यह एक ऐसा देश है जो दो ताकतवर मुल्कों की सेनाओं को सीधे टकराने से रोकने के लिए एक सुरक्षित ढाल का काम करता है.
क्या है काम?

2 / 6
बफर स्टेट का मुख्य काम पड़ोसी महाशक्तियों के बीच शांति बनाए रखना और उनके सीधे सैन्य टकराव के खतरे को कम करना होता है. इसकी मौजूदगी की वजह से बड़े देशों की सीमाएं एक-दूसरे के आमने-सामने नहीं आतीं जिससे अचानक युद्ध छिड़ने की संभावना काफी हद तक टल जाती है.
क्यों है जरूरी?

3 / 6
धरती के ये छोटे हिस्से दुनिया की राजनीति में बहुत बड़ा रोल प्ले करते हैं क्योंकि ये हमेशा दोनों शक्तियों के बीच संतुलन बनाए रखते हैं. बफर स्टेट दोनों तरफ के देशों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने की कोशिश करता है ताकि क्षेत्र में स्थिरता और शांति बनी रहे.
कौन से उदाहरण?

4 / 6
भारत और चीन जैसी दो बड़ी शक्तियों के बीच नेपाल और भूटान को बफर स्टेट के तौर पर देखा जाता है जो एक रक्षा कवच की तरह हैं. इसी तरह मंगोलिया भी रूस और चीन के बीच स्थित है और पुराने समय में अफगानिस्तान को ब्रिटिश और रूसी साम्राज्यों के बीच बफर माना जाता था.
कैसे आया विचार?

5 / 6
बफर स्टेट का विचार मुख्य रूप से 19वीं और 20वीं सदी के दौरान तब आया जब महाशक्तियां अपना क्षेत्रीय विस्तार करने की होड़ में लगी हुई थीं. उस दौर में छोटे देशों को इस तरह रखा गया कि वे दो बड़े प्रतिद्वंद्वियों के बीच एक मजबूत ढाल बनकर खड़े हो सकें और युद्ध रोक सकें.
क्या है चुनौती?

6 / 6
बफर स्टेट होने का मतलब हमेशा सुरक्षा की गारंटी नहीं होता क्योंकि इन देशों को अंदरूनी और बाहरी दबावों के बीच लगातार तालमेल बिठाना पड़ता है. ग्लोबल पॉलिटिक्स में इनकी भूमिका जितनी बड़ी है उतनी ही चुनौतीपूर्ण भी है क्योंकि इन्हें अपनी आजादी बचाने के लिए बहुत समझदारी दिखानी पड़ती है.