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नासा का अंतरिक्ष यान वोयेजर-1 अब पृथ्वी से इतनी दूर पहुंच गया है कि उसकी सिग्नल आने-जाने में पूरा एक दिन लग जाता है. ये इतिहास की सबसे बड़ी अंतरिक्ष उपलब्धियों में से एक मानी जा रही है.
क्या है वोयेजर-1?

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Voyager 1 सबसे फेमस अंतरिक्ष यान है, जिसे 5 सितंबर 1977 को लॉन्च किया गया था. इसे शुरुआत में हमारे सोलर सिस्टम के बड़े ग्रहों Jupiter और Saturn की स्टडी करने के लिए भेजा गया था. इस मिशन ने उम्मीद से कहीं ज्यादा सफलता हासिल की और बाद में इसे सौरमंडल के बाहर यानी इंटरस्टेलर स्पेस की ओर बढ़ा दिया गया. आज ये यान पृथ्वी से सबसे ज्यादा दूर मौजूद मैन मेड चीज बन चुका है.
एक ‘लाइट-डे’ दूरी का मतलब क्या है?

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Light-day एक ऐसी दूरी है, जिसे प्रकाश 24 घंटे में तय करता है. लाइट की स्पीड लगभग 3 लाख किलोमीटर प्रति सेकंड होती है. इस हिसाब से एक लाइट-डे लगभग 26 अरब किलोमीटर के बराबर होता है. जब कोई चीज इतनी दूर पहुंच जाती है, तो वहां से भेजा गया सिग्नल पृथ्वी तक आने में पूरा एक दिन लेता है.
कब पहुंचेगा वोयेजर-1 इस दूरी पर?

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वैज्ञानिकों के मुताबिक, NASA का यह यान नवंबर 2026 तक एक लाइट-डे दूरी पार कर लेगा. यह इतिहास में पहली बार होगा जब कोई इंसानी तकनीक इतनी दूर तक पहुंचेगी. अब वैज्ञानिकों को यान से डेटा लेने में 24 घंटे का समय लगेगा और जवाब भेजने में भी उतना ही समय लगेगा. यानी एक साधारण कमांड के लिए पूरा दो दिन लग सकते हैं.
इंटरस्टेलर स्पेस में वोयेजर-1

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2012 में Voyager 1 ने सौरमंडल की सीमा पार कर ली थी और इंटरस्टेलर स्पेस में प्रवेश कर गया था. ये वो क्षेत्र है जहां सूरज का असर बहुत कम या लगभग खत्म हो जाता है. यहां से मिलने वाला डेटा वैज्ञानिकों को ब्रह्मांड की संरचना और रहस्यों को समझने में मदद करता है.
अभी कितनी दूर है यह यान?

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वर्तमान में वोयेजर-1 पृथ्वी से लगभग 25 से 26 अरब किलोमीटर दूर है. यह दूरी लगातार बढ़ती जा रही है क्योंकि यह यान अभी भी अंतरिक्ष में आगे बढ़ रहा है. NASA Deep Space Network के जरिए वैज्ञानिक वोयेजर-1 से संपर्क बनाए रखते हैं. यह नेटवर्क दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में लगे विशाल एंटेना का समूह है, जो बहुत कमजोर सिग्नल भी पकड़ सकता है. इतनी दूरी के कारण संदेश भेजने और रिसीव करने में काफी समय लगता है.
(All Photos Credit: Social Media)