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अंटार्कटिका की सफेद चादर के नीचे एक विशाल भौगोलिक दुनिया दफन है जिसमें ऊंचे पहाड़ और गहरी घाटियां मौजूद हैं. वैज्ञानिकों का अनुमान है कि ग्लोबल वार्मिंग के कारण साल 2300 तक बर्फ पिघलने से पेंसिल्वेनिया जितनी बड़ी जमीन बाहर आ सकती है. (प्रतीकात्मक फोटो)
खनिजों की खान

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रिसर्च के मुताबिक बर्फ हटने पर जो जमीन सामने आएगी वहां तांबा, सोना, चांदी और प्लैटिनम जैसी कीमती धातुओं का विशाल भंडार मिल सकता है. वैज्ञानिक एरिका लुकास का मानना है कि इन खनिजों की खोज भविष्य में दुनिया के तमाम देशों की दिलचस्पी इस महाद्वीप में बढ़ा देगी.
कितनी जमीन आएगी बाहर?

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स्टडी में यह दावा किया गया है कि बर्फ पिघलने की रफ्तार बढ़ने पर करीब 1 लाख वर्ग किलोमीटर से ज्यादा का भूभाग उभर सकता है. यह उभरती हुई जमीन उन इलाकों में ज्यादा होने की उम्मीद है जिन पर अर्जेंटीना, चिली और ब्रिटेन जैसे देश पहले से अपना हक जताते रहे हैं.
क्या है अंटार्कटिका संधि?

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फिलहाल एक अंतरराष्ट्रीय संधि के तहत अंटार्कटिका में किसी भी तरह की कमर्शियल माइनिंग या खुदाई पर पूरी तरह से पाबंदी लगी हुई है. यहां अभी केवल वैज्ञानिक रिसर्च की ही इजाजत है ताकि इस बर्फीले महाद्वीप के पर्यावरण को किसी भी तरह के नुकसान से बचाया जा सके.
कब बदलेंगे माइनिंग के नियम?

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पर्यावरण से जुड़ी इस संधि की समीक्षा साल 2048 में होनी है जिसमें संसाधनों की बढ़ती मांग को देखते हुए बदलाव की संभावना जताई जा रही है. अगर खनिजों के लिए देशों का दबाव बढ़ा तो भविष्य में इस शांत महाद्वीप पर संसाधनों को लेकर बड़ी जंग छिड़ सकती है.
क्या होगा प्रकृति पर असर?

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बर्फ पिघलने के बाद जमीन का ऊपर उठना और समुद्र के जलस्तर में बदलाव आना पूरी दुनिया के भूगोल को बदल कर रख देगा. वैज्ञानिकों का कहना है कि यह केवल संसाधनों की खोज नहीं है बल्कि धरती के अस्तित्व और जलवायु संतुलन से जुड़ा एक गंभीर मामला है.