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फ्रेंच एस्ट्रोलॉजर नास्त्रेदमस की 2026 में भविष्यवाणियां इसलिए भी वायरल हो रही हैं, क्योंकि उनमें पहले ही आशंका जताई गई थी कि अमेरिका और इजराइल दोनों ईरान के खिलाफ संघर्ष तेज करेंगे, जिसका ग्लोबल मार्केट में काफी असर देखने को मिलेगा. लोग मानते हैं कि ऐसे अंतरराष्ट्रीय विवादों के कारण बाजार में उतार-चढ़ाव आते हैं, जिनका विशेष रूप से सोने और चांदी जैसी कीमती धातुओं के बाजारों पर प्रभाव पड़ता है. जानें, नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियां क्यों हो रहीं वायरल?
2026 के लिए नास्त्रेदमस ने क्या भविष्यवाणी की थी?

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नास्त्रेदमस की भविष्यवाणियां अक्सर रहस्यमयी तरीके से लिखी जाती हैं. उनके छंदों में प्रतीकात्मक भाषा का प्रयोग होने के कारण उनकी अनेक व्याख्याएं की जा सकती हैं. लेखकों ने अपने लेखन में किसी विशिष्ट समकालीन राष्ट्र का उल्लेख नहीं किया है. लोग अक्सर उनकी भविष्यवाणियों को वर्तमान अंतरराष्ट्रीय संबंधों से जोड़ते हैं. अंतरराष्ट्रीय संबंध ऐसे प्रभाव पैदा करते हैं जो कीमती धातुओं के बाजारों को प्रभावित करते हैं.
जंग के बीच सोने और चांदी की कीमत क्यों बढ़ती है?

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संघर्ष के समय निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की तलाश करते हैं. सोने और चांदी को निवेशक सुरक्षित निवेश मानते हैं. शेयर बाजार में अस्थिरता के संकेत दिखने पर निवेशक आमतौर पर अपना पैसा इन धातुओं में निवेश करते हैं. इन धातुओं की बढ़ती मांग से इनकी कीमतों पर दबाव बढ़ता है और इनकी बिक्री प्रभावित होती है. अमेरिका-इजराइल-ईरान के बीच चल रहे संघर्ष से सोने और चांदी की मांग में और वृद्धि होगी.
तेल की कीमतों में उछाल

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मिडिल ईस्ट में में राजनीतिक तनाव बढ़ने पर तेल की कीमतों में उछाल आता है. तेल की बढ़ती कीमतों के कारण निवेशकों में बाजार को लेकर अनिश्चितता देखी जाती है. ऐसे समय में निवेशक अपनी वित्तीय संपत्तियों की सुरक्षा के लिए सोने और चांदी को सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में चुनते हैं.
नास्त्रेदमस की कोई प्रीडिक्शन वेरिफाई नहीं

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मशहूर होने के बावजूद नास्त्रेदमस की किसी प्रेडिक्शन को वेरिफाई नहीं किया गया है. यदि तनाव बढ़ता है, तो सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है क्योंकि निवेशक सुरक्षित निवेश विकल्पों की तलाश करेंगे. बाजार की गतिविधियां वास्तविक आर्थिक कारकों और भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर निर्भर करती हैं.