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देहरादून के वैज्ञानिकों ने भारत के उत्तर-पूर्व राज्यों में सांपों की दो ऐसी दुर्लभ प्रजातियां खोजी हैं जो पहले कभी यहां नहीं देखी गई थीं. राखिन कीलबैक और कचिन हिल्स कीलबैक नाम के ये सांप अब तक केवल म्यांमार के जंगलों में ही पाए जाते थे.
कहां मिले ये सांप?

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ये अनोखे सांप मिजोरम के नेंगपुई अभयारण्य और अरुणाचल प्रदेश के नामदफा नेशनल पार्क के घने जंगलों में छिपे हुए मिले हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि इन इलाकों की दुर्गम बनावट की वजह से ये जीव अब तक इंसानों की नजरों से बचे हुए थे.
क्या है कीलबैक की खूबी?

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कीलबैक सांपों की सबसे बड़ी पहचान उनकी खुरदरी और उभरी हुई खाल होती है जिसके बीच में एक लंबी लकीर जैसी धारी बनी होती है. इनकी त्वचा की यह बनावट इन्हें पानी के पास कीचड़ और सूखी पत्तियों में बड़ी आसानी से गायब होने में मदद करती है.
कितने खतरनाक हैं ये?

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आमतौर पर कीलबैक प्रजाति के सांप जहरीले नहीं होते और ये अधिकतर नदियों या झीलों के पास वाले नमी वाले इलाकों में रहना पसंद करते हैं. इनकी मौजूदगी इस बात का सबूत मानी जाती है कि वहां का प्राकृतिक माहौल और इकोसिस्टम पूरी तरह स्वस्थ और सुरक्षित है.
क्यों अहम है यह खोज?

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इस खोज से साबित होता है कि भारत के पूर्वोत्तर राज्यों और दक्षिण-पूर्व एशिया के जंगलों के बीच एक गहरा प्राकृतिक संबंध आज भी बना हुआ है. नई प्रजातियों की पहचान होने से अब इन इलाकों के संरक्षण और वन्यजीवों को बचाने के लिए बेहतर योजनाएं बनाई जा सकेंगी.
क्या छिपा है और राज?

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वैज्ञानिकों का कहना है कि पूर्वोत्तर भारत जैव विविधता का खजाना है जहां अभी भी कई ऐसे जीव मौजूद हो सकते हैं जिनके बारे में दुनिया को पता नहीं है. लगातार हो रही रिसर्च और सर्वे के जरिए आने वाले समय में कई और चौंकाने वाले खुलासे होने की पूरी उम्मीद है.