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चीन की कंपनियों में कर्मचारियों की निगरानी अब हाई-टेक हो गई है. स्मार्ट सीट, कैमरे और वाई-फाई ट्रैकिंग जैसी तकनीकों से कर्मचारियों की हर एक्टिविटी रिकॉर्ड की जा रही है. इससे प्राइवेसी को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं.
ऑफिस में निगरानी का नया कल्चर

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चीन की कई बड़ी कंपनियों में अब कर्मचारियों की निगरानी का तरीका पूरी तरह बदल चुका है. पहले जहां सिर्फ CCTV कैमरे होते थे, अब उनकी जगह हाई-टेक सिस्टम ने ले ली है. ये सिस्टम कर्मचारियों की हर छोटी-बड़ी एक्टिविटी को रिकॉर्ड करता है.इस बदलाव को कंपनियां “स्मार्ट मैनेजमेंट” का हिस्सा बता रही हैं, लेकिन कर्मचारियों के लिए ये लगातार निगरानी का माहौल बनाता जा रहा है.
स्मार्ट सीट- कुर्सी भी करेगी निगरानी

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अब चीन में ऑफिस की कुर्सियां भी “स्मार्ट” हो चुकी हैं. इन सीट्स में लगे सेंसर कर्मचारियों की हार्ट रेट, बॉडी मूवमेंट और बैठने के तरीके को रिकॉर्ड करते हैं. कंपनियां इन डाटा का इस्तेमाल ये समझने के लिए करती हैं कि कर्मचारी कितनी देर काम कर रहा है, कब उठ रहा है और कितना एक्टिव है. ये तकनीक हेल्थ मॉनिटरिंग के नाम पर लाई गई है, लेकिन इसका इस्तेमाल परफॉर्मेंस ट्रैकिंग में भी हो रहा है.
कैमरों की नजर से बचना मुश्किल

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ऑफिस में लगे कैमरे अब सिर्फ सिक्योरिटी के लिए नहीं हैं. ये कैमरे कर्मचारियों के कंप्यूटर स्क्रीन, मोबाइल यूज और यहां तक कि उनकी बॉडी लैंग्वेज तक पर नजर रखते हैं. कुछ जगहों पर AI बेस्ड कैमरे ये भी पहचान लेते हैं कि कर्मचारी काम कर रहा है या नहीं
WiFi ट्रैकिंग से डिजिटल एक्टिविटी पर नजर

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कंपनियां ऑफिस के WiFi नेटवर्क का इस्तेमाल करके कर्मचारियों की ऑनलाइन गतिविधियों को ट्रैक कर रही हैं.
कौन-सी वेबसाइट देखी जा रही है, कितना समय सोशल मीडिया पर बिताया जा रहा है, इन सभी चीजों का रिकॉर्ड रखा जाता है. इससे कर्मचारियों की डिजिटल प्राइवेसी लगभग खत्म हो जाती है.
टॉयलेट ब्रेक भी अब कंट्रोल में

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कुछ कंपनियों ने कर्मचारियों के टॉयलेट ब्रेक तक को सीमित कर दिया है. बायोमेट्रिक सिस्टम के जरिए यह रिकॉर्ड किया जाता है कि कोई कर्मचारी कितनी बार और कितनी देर के लिए गया. अगर कोई तय समय से ज्यादा देर तक रहता है, तो उसे चेतावनी या जुर्माना भी झेलना पड़ सकता है. तकनीकों की मदद से कंपनियां कर्मचारियों का पूरा दिन रिकॉर्ड करती हैं. कब कर्मचारी बैठा, कब उठा, कितना समय काम किया, कितनी देर ब्रेक लिया—हर चीज का डेटा इकट्ठा होता है. इससे कर्मचारियों पर लगातार अच्छा प्रदर्शन करने का दबाव बना रहता है.
कर्मचारियों में बढ़ता तनाव और डर

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लगातार निगरानी के कारण कई कर्मचारी मानसिक दबाव और असहजता महसूस कर रहे हैं. कुछ कर्मचारियों ने इसे “जेल जैसा माहौल” बताया है, जहां हर हरकत पर नजर रखी जाती है. इससे काम का माहौल तनावपूर्ण हो सकता है और कर्मचारियों की क्रिएटिविटी भी प्रभावित होती है.
कंपनियों का पक्ष

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कंपनियों का कहना है कि ये तकनीक काम की प्रोडक्टिविटी बढ़ाने और डेटा सुरक्षा के लिए जरूरी है. उनके मुताबिक, इससे यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि कर्मचारी समय का सही उपयोग कर रहे हैं और कंपनी के संसाधनों का दुरुपयोग नहीं हो रहा.
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