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इंसान जब सांस छोड़ता है तो शरीर से कार्बन डाई ऑक्साइड गैस निकलती है जो मच्छरों के लिए एक बड़े सिग्नल का काम करती है. मच्छर इस गैस के प्रति इतने संवेदनशील होते हैं कि वे इसे ट्रैक करते हुए अंधेरे में भी सीधे आपके पास पहुंच जाते हैं.
क्या है मच्छरों का जीपीएस?

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इंसान के शरीर से निकलने वाली खास तरह की गंध मच्छरों के लिए किसी जीपीएस सिस्टम की तरह काम करती है. हमारी स्किन से निकलने वाले लैक्टिक एसिड और अमोनिया जैसे केमिकल की महक मच्छरों को काटने के लिए मजबूर कर देती है.
गर्मी से कैसे पकड़ते हैं चोरी?

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मच्छरों के पास खास तरह के थर्मल सेंसर होते हैं जो इंसान के शरीर से निकलने वाली गर्मी को पहचान लेते हैं. अंधेरा होने पर भी ये सेंसर मच्छर को एक हीट मैप दिखाते हैं जिससे उसे पता चल जाता है कि शिकार कहां सोया है.
क्यों काटती है सिर्फ मादा?

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आपको जानकर हैरानी होगी कि केवल मादा मच्छर ही इंसान का खून पीती है क्योंकि उसे अंडे देने के लिए खास प्रोटीन की जरूरत होती है. नर मच्छर इंसान को नहीं काटते बल्कि वे अपना पेट भरने के लिए फूलों और पौधों के रस पर निर्भर रहते हैं.
रात में क्यों होते हैं एक्टिव?

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मच्छरों की अपनी एक बायोलॉजिकल क्लॉक होती है जो उन्हें रात के समय सबसे ज्यादा सक्रिय और हमलावर बनाती है. रात में जब इंसान आराम कर रहा होता है और उसका मूवमेंट कम होता है तब मच्छरों के लिए खून पीना ज्यादा आसान हो जाता है.
कुछ लोगों को ज्यादा प्यार क्यों?

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मच्छर हर किसी को एक बराबर नहीं काटते बल्कि वे उन लोगों की तरफ ज्यादा खिंचते हैं जिनके शरीर की गंध उन्हें पसंद आती है. पसीना और शरीर के खास बैक्टीरिया मिलकर ऐसी स्थिति पैदा करते हैं जिससे मच्छर कुछ लोगों को निशाना बनाना ज्यादा पसंद करते हैं.