भारत में कैसे पहुंची तंबाकू? कोलंबस की एक गलती और मुगलों का बैन; बेहद दिलचस्प है कहानी

आज के समय में पूरे देश में तंबाकू का इस्तेमाल कई अलग-अलग तरीकों से किया जाता है. बिड़ी, सिगरेटट से लेकर मिश्री और जर्दा तक में तंबाकू का इस्तेमाल होता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में आखिर तंबाकू कैसे पहुंचा? इसके पीछे की कहानी काफी दिलचस्प है और 15वीं शताब्दी में अमेरिका की खोज से जुड़ी हुई है. आइए जानें तंबाकू के भारत पहुंचने की क्या है पूरी कहानी.

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अमेरिका से शुरू हुआ तंबाकू का सफर

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तंबाकू के इतिहास को लेकर काउंट कॉर्टी, हरबर्ट जोसेफ स्पिंडन, जे.एच. मानस, क्रिक बैकहोम और अर्नेस्ट एल. विंडर जैसे विद्वानों का मानना है कि तंबाकू मूल रूप से अमेरिकी है. इस सफर की शुरुआत 3 अगस्त 1492 को हुई, जब क्रिस्टोफर कोलंबस अपने 120 साथियों के साथ दुनिया की खोज पर निकले. जब कोलंबस एक द्वीप पर पहुंचे, तो उन्होंने वहां देखा कि लोग हाथों में कुछ सूखी पत्तियां लिए हुए थे, जिन्हें वे जलते हुए कोयलों से सुलगाते थे और उससे खुद को सुगंधित करते थे.

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अमेरिका को भारत समझ बैठे थे कोलंबस

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इतना ही नहीं पत्तियों को जलाए रखने के लिए वे उन्हें बार-बार मुंह में रखते, फूंक मारते और धुआं अंदर खींचते थे. इसे देख कोलंबस अमेरिका को भारत समझने की भूल कर बैठे थे, क्योंकि भारत में गांजा और भांग का इस्तेमाल सदियों से हो रहा था, जिसका वर्णन धार्मिक ग्रंथों में भी मिलता है. हालांकि, वे भारत नहीं, अमेरिका पहुंचे थे. यह किस्सा इस बात का सबूत है कि तंबाकू मूल रूप से अमेरिका की ही देन है.

पुर्तगाली तंबाकू लाए भारत

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कोलंबस की इस खोज के बाद पुर्तगालियों ने तंबाकू और भारत दोनों को ढूंढ निकाला। 20 मई 1498 को जब वास्को डी गामा कोझिकोड पहुंचे, तो उन्होंने दूसरे पुर्तगालियों के लिए रास्ता खोल दिया. इसके बाद, दक्षिण अमेरिका की यात्रा करने वाली एक पुर्तगाली टीम ने साल 1508 में तंबाकू को भारत में पेश किया. उस समय तक भारत में गांजा और भांग जैसे कैनाबिस का इस्तेमाल धूम्रपान के लिए किया जाता था.

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भारत की जलवायु थी तंबाकू की खेती के लिए अनुकूल

भारत की जलवायु थी तंबाकू की खेती के लिए अनुकूल5 / 8

भारत की जलवायु तंबाकू की खेती के लिए बिल्कुल अनुकूल थी और यहां पहले से ही धूम्रपान की संस्कृति लोगों में प्रचलित थी, इसलिए भारत में इसे आसानी से अपना लिया गया. शुरुआत में यह केवल किसानों और निचले कुलीन वर्ग तक ही सीमित रहा, जबकि मुगल दरबार में तंबाकू की एंट्री अभी तक नहीं हुई थी.

जब मुगल दरबार में पहुंचा था पहला चिलम

जब मुगल दरबार में पहुंचा था पहला चिलम6 / 8

विद्वान इरफान हबीब के अनुसार, आइन-ए-अकबरी के लिखे जाने के एक दशक के अंदर, मक्का से लौटे तीर्थयात्रियों ने मुगल दरबार में वहां तंबाकू के चलन की जानकारी दी थी. इसके बाद, बीजापुर से लौटे एक शाही दूत असद बेग ने सम्राट अकबर को एक बेहद खूबसूरत और पूरी तरह से तैयार हुक्का भेंट किया. उन्होंने सम्राट को बताया कि ये नई पत्तियां तंबाकू हैं, जो मक्का और मदीना में बहुत मशहूर हैं. असद बेग ने कुछ तंबाकू दूसरे दरबारियों को भी भेजा.

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एक किस्सा जिसका आज भी होता है जिक्र

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एक किस्सा जिसका जिक्र आज भी होता है कि जब दरबारी मिर्जा अजीज कोका ने अकबर को सेहत की दवा के रूप में बीजापुर से लाया गया पहला चिलम पेश किया, तो अकबर ने इसके कुछ कश लिए. तभी शाही हकीम हकीम अब्दुल फतेह गिलानी ने बहस शुरू कर दी कि उनकी मंजूरी के बिना किसी नई चीज को दवा कैसे कहा जा सकता है. बहस को गर्म होता देख अकबर ने उसे वहीं छोड़ दिया. अकबर की इस थोड़ी सी बेरुखी ने कुछ सालों के लिए तंबाकू को शाही दरबार से दूर रखा, लेकिन इसे ज्यादा समय तक रोका नहीं जा सका..

जहांगीर ने लगा दिया था प्रतिबंध

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अकबर के बाद जब जहांगीर मुगल सम्राट बने, तो तंबाकू का चलन और इसकी लत बहुत तेजी से लोगों के बीच फैली. जहांगीरनामा से पता चलता है कि फारस के राजदूत खान-आलम और फारस के शासक के राजदूत यादगीर अली सुल्तान को तंबाकू की गंभीर लत थी. ब्रिटिश राजा जेम्स प्रथम के दूत के रूप में 1616 में अजमेर में जहांगीर के दरबार में आए सर थॉमस रो और उनके साथियों ने दर्ज किया कि यह आदत कितनी तेजी से फैल चुकी थी. इसी को देखते हुए, साल 1617 में सम्राट जहांगीर ने एक शाही फरमान जारी कर पूरे मुगल साम्राज्य में तंबाकू की खेती, बिक्री और इस्तेमाल को अपराध घोषित कर दिया.

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लेखक के बारे में

Versha Singh

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वर्षा स‍िंह News 24 ड‍िजिटल में बतौर सीन‍ियर सब एड‍िटर के पद पर कार्यरत हैं. वर्षा को ड‍िजिटल मीड‍िया में 6 साल से अधि‍क का अनुभव है. राष्‍ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और समसमाय‍िक व‍िषयों पर वर्षा की अच्‍छी पकड़ है. इसके अलावा राजनीत‍िक, क्राइम और ट्रेंडिंग खबरें भी ल‍िखती हैं. वर्षा ने मास्टर इन न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी की पढ़ाई माखन लाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल से की है और जर्नलिज्म एवं मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री लखनऊ विश्वविद्यालय से प्राप्त की है. वर्षा अपने करियर में Jagran New Media, Asia News International (ANI) और ETV Bharat जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं. उन्हें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लेखन और समसामयिक घटनाओं, राजनीति, हाइपरलोकल खबरों और मानवीय रुचि से जुड़ी कहानियों को डिजिटल दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का अनुभव है.
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