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खाड़ी के मुस्लिम देशों में सबसे पहले साल 1908 में ईरान के मस्जिद-ए-सुलेमान इलाके में तेल की खोज हुई थी. इस बड़ी सफलता के बाद पूरे क्षेत्र में तेल खोजने का सिलसिला शुरू हुआ जिसने इस इलाके की तकदीर हमेशा के लिए बदल दी.
क्या है दुनिया का हाल?

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ईरान पर अमेरिका और इजरायली हमलों के बाद पूरी दुनिया में तेल की भारी कमी हो गई है और ऊर्जा सुरक्षा का संकट गहरा गया है. भारत जहां रूस से तेल ले रहा है वहीं पड़ोसी देश पाकिस्तान और बांग्लादेश में पेट्रोल पंपों पर लंबी लाइनें लगी हैं.
कब कहां हुई खोज?

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ईरान के बाद साल 1927 में इराक और 1932 में बहरीन के जेबेल दुखान इलाके में बड़े पैमाने पर कच्चा तेल पाया गया था. इसके बाद 1938 में सऊदी अरब और कुवैत जबकि 1958 में यूएई के मुरबान बाब में तेल मिलने से इन देशों की किस्मत चमक गई.
कैसे बदली रेगिस्तान की सूरत?

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तेल से होने वाली अंधाधुंध कमाई ने तपते रेगिस्तानों को दुनिया के सबसे आधुनिक और आलीशान शहरों में बदल दिया है. आज दुबई अमीरों के लिए स्वर्ग बन चुका है और सऊदी अरब नियोम जैसे भविष्य के शहर बसाकर पूरी दुनिया को चौंका रहा है.
ब्रिटेन का क्या था रोल?

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ब्रिटिश नेवी कोयले को छोड़कर तेल का इस्तेमाल करना चाहती थी इसलिए उन्होंने ईरानी तेल कंपनी में बड़ा निवेश किया था. उस समय भारत पर ब्रिटेन का राज था और उनकी शाही नौसेना ईरानी तेल की सबसे बड़ी ग्राहक बनकर उभरी थी.
अब कौन हैं नए खिलाड़ी?

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मौजूदा तेल संकट के बीच अब अमेरिका और रूस के साथ वेनेजुएला जैसे देश तेल बाजार के नए और मजबूत खिलाड़ी बन गए हैं. गुयाना जैसे छोटे देशों में भी तेल के बड़े भंडार मिले हैं जो आने वाले वक्त में दुनिया की तेल राजनीति को नया मोड़ दे सकते हैं.