
1 / 6
मशहूर लेखक ऑर्थर सी क्लार्क को श्रीलंका के समुद्री तट के पास गोताखोरी करते समय एक प्राचीन जहाज का मलबा मिला था. इस मलबे के भीतर मुगल काल के चांदी के सिक्कों का एक बहुत बड़ा और दुर्लभ खजाना छिपा हुआ था.
क्या है औरंगजेब का कनेक्शन?

2 / 6
ये सभी चांदी के सिक्के मुगल बादशाह औरंगजेब के शासनकाल के दौरान साल 1701 और 1702 में विशेष तौर पर ढलवाए गए थे. इन्हें ताजमहल के खजाने का हिस्सा माना जाता है जो करीब 300 साल पहले समंदर की लहरों में कहीं खो गया था.
कितनी है इसकी असली कीमत?

3 / 6
समुद्र के नीचे से मिले इन हजारों चांदी के सिक्कों की कीमत आज के समय में करीब साढ़े छह करोड़ रुपये से भी ज्यादा आंकी गई है. एक डॉक्यूमेंट्री में खुलासा हुआ है कि ये सिक्के बैग्स में भरकर सूरत से पूर्व की ओर ले जाए जा रहे थे.
क्यों डूब गया था यह जहाज?

4 / 6
इतिहास के जानकारों के अनुसार यह जहाज सूरत के एक व्यापारी का था जो मसालों के रास्ते से गुजरते समय प्राकृतिक आपदा का शिकार हो गया था. जहाज डूबने की वजह से औरंगजेब का यह कीमती पैसा कभी वापस भारत नहीं लौट सका.
क्या था चांदी के रुपये का इतिहास?

5 / 6
भारत में चांदी के रुपये की शुरुआत सबसे पहले शेरशाह सूरी ने की थी जिसे बाद में मुगल शासकों और अंग्रेजों ने भी अपनाया था. औरंगजेब ने अपने पिता शाहजहां को कैद करने के बाद सत्ता संभाली थी और इसी दौरान ये सिक्के बनवाए गए थे.
क्यों कहा गया ताजमहल का खजाना?

6 / 6
ताजमहल को शाहजहां ने अपनी बेगम मुमताज की याद में बनवाया था लेकिन बाद में इसके रखरखाव और मुगल साम्राज्य की दौलत इन्हीं सिक्कों में सिमटी थी. ऑर्थर सी क्लार्क की इस खोज ने मुगल काल के व्यापार और वैभव के कई बड़े राज खोल दिए हैं.