32 साल की उम्र में बदल दी थी धर्म की दिशा! जानिए आदि शंकराचार्य की पूरी कहानी
आदि शंकराचार्य जयंती 2026, 21 अप्रैल को मनाई जाएगी. इस दिन महान दार्शनिक और सनातन धर्म के पुनरुद्धारक आदि शंकराचार्य के जीवन, शिक्षाओं और योगदान को याद किया जाता है. आइए जानते हैं उनके जीवन से जुड़े खास पहलू और महत्व.

आदि शंकराचार्य जयंती कब है?
2 / 8आदि शंकराचार्य जयंती वर्ष 2026 में 21 अप्रैल को मनाई जाएगी. यह पर्व हर साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को आता है, जिसे हिंदू धर्म में बेहद पवित्र माना जाता है. इस दिन देशभर में मंदिरों और आश्रमों में विशेष पूजा, हवन और सत्संग आयोजित किए जाते हैं. श्रद्धालु इस दिन उपवास रखते हैं और भगवान शिव, गुरु परंपरा की आराधना करते हैं. यह दिन ज्ञान, साधना और आत्मचिंतन के लिए बेहद शुभ माना जाता है.
कौन थे आदि शंकराचार्य?
3 / 8आदि शंकराचार्य भारत के महान संत, दार्शनिक और आध्यात्मिक गुरु थे, जिनका जन्म केरल के कालड़ी गांव में हुआ था. बचपन से ही उनमें असाधारण बुद्धि और आध्यात्मिक झुकाव दिखाई देता था. उन्होंने बहुत कम उम्र में ही संन्यास ले लिया और गुरु गोविंद भगवत्पाद से शिक्षा प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने पूरे भारत का भ्रमण किया और लोगों को वेदों और उपनिषदों का सही अर्थ समझाया. वे भारतीय संस्कृति और धर्म के सबसे प्रभावशाली व्यक्तित्वों में गिने जाते हैं.
अद्वैत वेदांत के संस्थापक
4 / 8आदि शंकराचार्य ने अद्वैत वेदांत दर्शन को फिर से खड़ा किया और इसे आसान भाषा में लोगों तक पहुंचाया. इस दर्शन के मुताबिक, आत्मा (जीव) और परमात्मा (ब्रह्म) एक ही हैं, उनके बीच कोई वास्तविक भेद नहीं है. जो भिन्नता हमें दिखाई देती है, वो सिर्फ माया (भ्रम) है. उन्होंने तर्क और शास्त्रों के जरिए इस सिद्धांत को सिद्ध किया और कई विद्वानों के साथ शास्त्रार्थ करके इसे स्थापित किया.
सनातन धर्म के पुनरुद्धारक
5 / 8आदि शंकराचार्य के समय में हिंदू धर्म में कई तरह की जटिलताएं और कुरीतियां फैल चुकी थीं. उन्होंने वेदों और उपनिषदों के मूल संदेश को फिर से स्थापित किया और धर्म को एक सरल, स्पष्ट और तार्किक रूप दिया. उन्होंने लोगों को कर्मकांड से ऊपर उठकर ज्ञान और भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी.
चार धाम और मठों की स्थापना
6 / 8प्रमुख ग्रंथ और रचनाएं
7 / 8आदि शंकराचार्य ने कई महत्वपूर्ण धार्मिक ग्रंथों की रचना की. उन्होंने भगवद गीता, उपनिषद और ब्रह्मसूत्र पर विस्तृत भाष्य लिखे, जो आज भी हिंदू दर्शन की नींव माने जाते हैं. इसके अलावा उन्होंने भज गोविंदम, विवेकचूडामणि, सौन्दर्य लहरी जैसे प्रसिद्ध ग्रंथ लिखे, जो आध्यात्मिक मार्गदर्शन देते हैं. उनकी रचनाएं सरल और गहन दोनों हैं, जो हर वर्ग के लोगों के लिए उपयोगी हैं.
कम उम्र में महान उपलब्धियां
8 / 8आदि शंकराचार्य ने केवल 32 वर्ष की आयु में ही अपने जीवन के सभी महान कार्य पूरे कर लिए. इतनी कम उम्र में उन्होंने पूरे भारत का भ्रमण किया, अनेक मठों की स्थापना की, शास्त्रार्थ किए और अनगिनत ग्रंथों की रचना की. (All Photos Credit: AI)