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आदि शंकराचार्य जयंती 2026, 21 अप्रैल को मनाई जाएगी. इस दिन महान दार्शनिक और सनातन धर्म के पुनरुद्धारक आदि शंकराचार्य के जीवन, शिक्षाओं और योगदान को याद किया जाता है. आइए जानते हैं उनके जीवन से जुड़े खास पहलू और महत्व.
आदि शंकराचार्य जयंती कब है?

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आदि शंकराचार्य जयंती वर्ष 2026 में 21 अप्रैल को मनाई जाएगी. यह पर्व हर साल वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को आता है, जिसे हिंदू धर्म में बेहद पवित्र माना जाता है. इस दिन देशभर में मंदिरों और आश्रमों में विशेष पूजा, हवन और सत्संग आयोजित किए जाते हैं. श्रद्धालु इस दिन उपवास रखते हैं और भगवान शिव, गुरु परंपरा की आराधना करते हैं. यह दिन ज्ञान, साधना और आत्मचिंतन के लिए बेहद शुभ माना जाता है.
कौन थे आदि शंकराचार्य?

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आदि शंकराचार्य भारत के महान संत, दार्शनिक और आध्यात्मिक गुरु थे, जिनका जन्म केरल के कालड़ी गांव में हुआ था. बचपन से ही उनमें असाधारण बुद्धि और आध्यात्मिक झुकाव दिखाई देता था. उन्होंने बहुत कम उम्र में ही संन्यास ले लिया और गुरु गोविंद भगवत्पाद से शिक्षा प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने पूरे भारत का भ्रमण किया और लोगों को वेदों और उपनिषदों का सही अर्थ समझाया. वे भारतीय संस्कृति और धर्म के सबसे प्रभावशाली व्यक्तित्वों में गिने जाते हैं.
अद्वैत वेदांत के संस्थापक

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आदि शंकराचार्य ने अद्वैत वेदांत दर्शन को फिर से खड़ा किया और इसे आसान भाषा में लोगों तक पहुंचाया. इस दर्शन के मुताबिक, आत्मा (जीव) और परमात्मा (ब्रह्म) एक ही हैं, उनके बीच कोई वास्तविक भेद नहीं है. जो भिन्नता हमें दिखाई देती है, वो सिर्फ माया (भ्रम) है. उन्होंने तर्क और शास्त्रों के जरिए इस सिद्धांत को सिद्ध किया और कई विद्वानों के साथ शास्त्रार्थ करके इसे स्थापित किया.
सनातन धर्म के पुनरुद्धारक

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आदि शंकराचार्य के समय में हिंदू धर्म में कई तरह की जटिलताएं और कुरीतियां फैल चुकी थीं. उन्होंने वेदों और उपनिषदों के मूल संदेश को फिर से स्थापित किया और धर्म को एक सरल, स्पष्ट और तार्किक रूप दिया. उन्होंने लोगों को कर्मकांड से ऊपर उठकर ज्ञान और भक्ति के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी.
चार धाम और मठों की स्थापना

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आदि शंकराचार्य ने भारत के चारों कोनों में चार प्रमुख मठ स्थापित किए- उत्तर में ज्योतिर्मठ (बद्रीनाथ), दक्षिण में श्रृंगेरी मठ, पूर्व में गोवर्धन मठ (पुरी) और पश्चिम में शारदा मठ (द्वारका). इन मठों का उद्देश्य धर्म और ज्ञान का प्रचार करना था. यही परंपरा आगे चलकर चार धाम यात्रा के रूप में प्रसिद्ध हुई, जो आज भी करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है.
प्रमुख ग्रंथ और रचनाएं

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आदि शंकराचार्य ने कई महत्वपूर्ण धार्मिक ग्रंथों की रचना की. उन्होंने भगवद गीता, उपनिषद और ब्रह्मसूत्र पर विस्तृत भाष्य लिखे, जो आज भी हिंदू दर्शन की नींव माने जाते हैं. इसके अलावा उन्होंने भज गोविंदम, विवेकचूडामणि, सौन्दर्य लहरी जैसे प्रसिद्ध ग्रंथ लिखे, जो आध्यात्मिक मार्गदर्शन देते हैं. उनकी रचनाएं सरल और गहन दोनों हैं, जो हर वर्ग के लोगों के लिए उपयोगी हैं.
कम उम्र में महान उपलब्धियां

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आदि शंकराचार्य ने केवल 32 वर्ष की आयु में ही अपने जीवन के सभी महान कार्य पूरे कर लिए. इतनी कम उम्र में उन्होंने पूरे भारत का भ्रमण किया, अनेक मठों की स्थापना की, शास्त्रार्थ किए और अनगिनत ग्रंथों की रचना की.
(All Photos Credit: AI)