
1 / 9
सर्दियां जाते ही उत्तराखंड में चार धाम यात्रा की शुरुआत के बाद लाखों की संख्या में श्रद्धालु चाहते हैं कि वो एक बार इन धार्मिक स्थलों कर लें. अगर आप भी चार धाम की यात्रा पर जाने का प्लान बना रहे हैं तो उससे पहले आपको उत्तराखंड के मौसम का हाल जान लेना चाहिए.
कैसा है उत्तराखंड के मौसम का हाल?

2 / 9
उत्तराखंड के पहाड़ी और ऊंचाई वाले इलाकों में बारिश, ओलावृष्टि और धुंध की संभावना को देखते हुए IMD ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है. इस दौरान यात्रियों को अपने रूट पर लगातार वेदर अपडेट चेक करना जरूरी है. खास तौर पर चार धाम की यात्रा में शाम से पहले ऊंचाई वाले घाटों तक पहुंचने की कोशिश करनी चाहिए.
यात्रियों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह

3 / 9
गढ़वाल मंडल के मंडलायुक्त ने 12 और 13 मई को मौसम की संवेदनशीलता के मद्देनजर यात्रियों से अतिरिक्त सावधानी बरतने का आह्वान किया है. श्रद्धालुओं से अपील की गई है कि वे अपनी यात्रा योजना में लचीलापन रखें और बारिश की स्थिति बनने पर रूट बदलने की तैयारी रखें. इस दौरान रात्रि में दुर्गम घाटों पर न रहने की सलाह भी दी गई है.
दिशा‑निर्देशों का सख्ती से पालन

4 / 9
यात्रियों से जिला प्रशासन और स्थानीय प्रशासन की जारी की गई दिशा‑निर्देशों का सख्ती से पालन करने को कहा गया है. अगर किसी खास रूट पर अस्थायी रूप से आवागमन पर रोक लगा दिया गया हो, तो उसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए. प्रशासन की ओर से जारी नोटिस और वॉट्सऐप/सोशल मीडिया अपडेट को ध्यान से देखना जरूरी है.
रात में ज्यादा सावधानी की सलाह

5 / 9
अधिकारियों ने यात्रियों को रात्रि में अत्यधिक ऊंचाई वाले घाटों पर न जाने की सलाह दी है. अंधेरे, भीगी सड़क और सीमित दृश्यता के मिलन से दुर्घटना की संभावना काफी बढ़ जाती है. इसलिए शाम के घंटों में निचले और अपेक्षाकृत सुरक्षित रास्तों पर ही रुकावट की योजना बनानी चाहिए.
विभागों को भी सख्त निर्देश

6 / 9
सभी संबंधित विभागों को यात्रियों के लिए आवश्यक तैयारियां करने के निर्देश दिए गए हैं. इसमें ट्रैफिक मैनेजमेंट, रास्ते की मरम्मत‑पैचिंग, लैंडस्लाइड‑प्रभावित घाटों पर वैकल्पिक मार्ग की पहचान और तुरंत निकासी व्यवस्था शामिल है. पुलिस, आपदा प्रबंधन और रोडवे विभाग को तत्पर रहने को कहा गया है.
सामान को लेकर भी सलाह

7 / 9
यात्रियों से अपील की गई है कि वे अपने साथ ज्यादा भारी या आवश्यकता से अधिक सामान न लाएं. अचानक बारिश या सड़क फिसलन होने पर भारी बोझ चलने या गाड़ी में नियंत्रण खोने की स्थिति को और गंभीर बना सकता है. बेसिक आवश्यकताएं ही लेकर यात्रा करने की सलाह दी जा रही है.
नेविगेशन ऐप इस्तेमाल करने की सलाह

8 / 9
प्रशासन ने यात्रियों को जीपीएस‑आधारित नेविगेशन ऐप के साथ‑साथ राज्य सरकार के आधिकारिक वेदर अपडेट ऐप या सोशल मीडिया पेजों का भी उपयोग करने की सलाह दी है. इससे रास्ते में लगने वाले दुर्गम घाट, लैंडस्लाइड या बाढ़ प्रभावित इलाकों की जानकारी पहले से मिल सकती है. इस जानकारी के आधार पर यात्रा की लंबाई और रफ्तार को घटा‑बढ़ाया जा सकता है.
मौसम को लेकर रहें अपडेट

9 / 9
श्रद्धालुओं से अपने मोबाइल नंबर, व्हाट्सऐप और ऑफिसियल नोडल अधिकारियों के माध्यम से निरंतर मौसम संबंधी अपडेट लेने की अपील की गई है. इस तरह वे समय रहते अपनी योजना बदल सकें या विश्राम के लिए उपयुक्त रूट चुन सकें. इस दृष्टि से यात्रा की शुरुआत से ही वेदर अलर्ट और राज्य सरकार की जारी गाइडलाइन पर ध्यान बनाए रखना अत्यंत जरूरी है.