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रघु की कहानी पंजाब के जालंधर शहर से शुरू होती है. वह डॉक्टरों और इंजिनियरों के परिवार से आते हैं. घर वालों की तरह उन्होंने भी इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग की पढ़ाई की. लेकिन साल 2011 में प्रोफेशनल क्रिकेट खेलने का मन बनाया. हालांकि तब तक काफी देर हो चुकी थी वह 18 साल के हो चुके थे.
18 साल की उम्र में क्रिकेट खेलने का फैसला

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लेकिन इसके बावजूद रघु ने क्रिकेट खेलने का फैसला किया. लेकिन तब वह काफी मोटे थे. उनका वजन करीब 102 किलो था. लेकिन रघु ने मैदान पर पसीना बहाया और 6 ही महीने में 30-35 किलो वजन कम कर लिया.
स्पिनर बनने का फैसला

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रघु ने क्रिकेट में अपनी शुरुआत तेज गेंदबाज के रूप में की थी, लेकिन हैमस्ट्रिंग की समस्या ने उन्हें लेग स्पिनर बना दिया. उन्होंने शेन वॉर्न की वीडियो देख स्पिन गेंदबाजी के गुर सिखे.
साल 2014 में आया परिवर्तन

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साल 2014 में वृंदावन की यात्रा के बाद उनके जिवन में परिवर्तन आया. उन्होंने वैष्णव परंपरा अपनाई और प्याज लहसुन खाना छोड़ दिया. टीम के साथ यात्रा करने पर वह अपना खाना खुद ही बनाते थे. रघु अपने सिद्धांतों पर अड़े रहे और इसे जारी भी रखा.
6 मैच में 46 विकेट

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क्रिकेट में उनका सफर काफी उतार चढ़ाव वाला रहा. उन्होंने पंजाब के लिए फर्स्ट क्लास मैच खेले. 1 मैच में उन्होंने 7 विकेट लिए. इसके बाद भी वह टीम से बाहर कर दिए गए. साल 2022 में श्रीलंका के गॉल क्रिकेट क्लब के लिए खेलते हुए उन्होंने धमाकेदार प्रदर्शन किया और 6 मैच में 46 विकेट चटकाए.
2026 में डेब्यू

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इसके बाद वह भारत लौटे और शेरे पंजाब क्रिकेट टूर्नामेंट में उनका चयन NOC की वजह से नहीं हुआ. इसके बाद रघु का सिलेक्शन पंजाब की रणजी ट्रॉफी टीम में नहीं हुआ. क्योंकि वह फिटनेस में फेल हो गए. इसके बाद रघु सब कुछ छोड़कर जगन्नाथ मंदिर चले गए. रघु का मन जब भी अशांत होता वह भगवान की शरण में चले जाते. इसके बाद रघु ने फिर से ट्रेनिंग शुरू की और आखिरकार उन्हें मेहनत का फल मिला और उन्होंने मुंबई के लिए आईपीएल 2026 में डेब्यू कर लिया.