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आज हम उन 5 इंटरनेशनल मुकाबलों की याद दिलाएंगे जिसमें पाकिस्तान क्रिकेट टीम के खिलाड़ी को बॉल टैंपरिंग का दोषी पाया गया था, जिसके वजह से उन्हें करोड़ों फैंस के सामने शर्मसार होना पड़ा था.
2000

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साल 2000 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ एक मैच में पाकिस्तान के तेज गेंदबाज वकार यूनिस ने अपनी उंगलियों से गेंद के साथ छेड़छाड़ की. दोषी पाए जाने के बाद, ये गेंदबाज बॉल टैम्परिंग के लिए सस्पेंड होने वाले पहले खिलाड़ी बने, और उस पर मैच फीस का 50 फीसदी जुर्माना भी लगाया गया.
2002

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हरारे में जिम्बाब्वे के खिलाफ पहले टेस्ट मैच के दौरान पाकिस्तानी तेज गेंदबाज शोएब अख्तर को गेंद से छेड़छाड़ का दोषी पाया गया. मैच रेफरी क्लाइव लॉयड ने ये आरोप लगाते हुए कहा कि अख्तर ने गैरकानूनी रूप से बॉल की कंडीशन में बदलाव किया था. इसके बाद अंपायर ने आरोपी पेसर को वॉर्निंग देकर छोड़ दिया.
2003

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6 महीने के भीतर दूसरी बार शोएब अख्तर को गेंद से छेड़छाड़ के आरोप में मैच रेफरी के सामने पेश होना पड़ा. उन्होंने खुद को बेगुनाह बताया, लेकिन मैच रेफरी ने उन्हें दोषी पाया; पाकिस्तान ने इस फैसले के खिलाफ कोई अपील नहीं की. इसको लेकर 2 वनडे मैचों का बैन, मैच फीस का 75% जुर्माना लगाया.
2006

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ओवल में खेले गए एक विवादित टेस्ट मैच के दौरान, अंपायर डैरेल हेयर और बिली डॉक्ट्रोव की तरफ पाकिस्तान पर गेंद से छेड़छाड़ का आरोप लगाए जाने के बाद, इंग्लैंड को 5 एक्सट्रा रन दिए गए. इस फैसले के विरोध में, चाय के ब्रेक के बाद पाकिस्तान ने मैदान पर उतरने से इनकार कर दिया, जिसके कारण उन्हें टेस्ट मैच गंवाना पड़ा. इस विवाद के कारण ईसीबी, पीसीबी, और मौजूदा और पूर्व खिलाड़ियों के बीच कई सालों तक टकराव की स्थिति बनी रही.
2010

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पर्थ में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेले गए एक वनडे इंटरनेशनल मैच के दौरान, पाकिस्तान के ऑलराउंडर शाहिद अफरीदी कैमरे में गेंद को दांतों से काटते हुए पकड़े गए. अफरीदी पर 2 टी-20 इंटरनेशनल मैचों का बैन लगाया गया.