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Harbhajan Singh
सचिन तेंदुलकर के जन्मदिन के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए हरभजन ने कहा कि टेस्ट क्रिकेट को ही सबसे ज्यादा प्रायोरिटी मिलनी चाहिए, क्योंकि इसी में सबसे ऊंचे दर्जे का मुकाबला देखने को मिलता है. उनके मुताबिक, 5 दिनों तक चलने वाले इस खेल में खिलाड़ियों की मानसिक और शारीरिक दोनों तरह से परीक्षा होती है, क्योंकि मैच के दौरान पिच के हालात लगातार बदलते रहते हैं.

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हरभजन ने समझाया कि पिच के बदलते मिजाज के हिसाब से खुद को ढालना ही टेस्ट क्रिकेट को खास बनाता है. उन्होंने आगे कहा कि टीमों और खिलाड़ियों को हर दिन अपनी रणनीति में बदलाव करना पड़ता है, जिससे उनके स्किल और धैर्य की असली परीक्षा होती है. उनकी नजर में, यही चुनौती इस सबसे लंबे फॉर्मेट को लिमिटेड-ओवर्स क्रिकेट से अलग बनाती है.

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पूर्व ऑफ-स्पिनर ने कहा कि अगर वो ICC या BCCI की किसी भी फैसला लेने वाली संस्था का हिस्सा होते, तो वो जोर देकर ये सिफारिश करते कि पिचें संतुलित बनाई जाएं. उनका मानना है कि बेहतर पिचें टेस्ट क्रिकेट को बचाने में मदद करेंगी, क्योंकि इनसे ये एनश्योर होगा कि मैच के आखिरी दिन तक बल्लेबाजों और गेंदबाजों, दोनों के लिए मुकाबला रोमांचक बना रहे.

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भारत के लिए 103 टेस्ट मैचों में 417 विकेट लेने वाले हरभजन ने यह भी बताया कि 'एशेज' जैसी बड़ी टेस्ट राइवलरीज आज भी बड़ी तादाद में दर्शकों को अपनी तरफ खींचती हैं. उनका मानना है कि अगर भारत में भी ऐसी पिचें तैयार की जाएं जो खेल के लिए सही हों- न कि ऐसी पिचें जो किसी एक पक्ष (बल्लेबाजों या गेंदबाजों) का ही ज्यादा साथ दें- तो यहाँ भी वैसा ही उत्साह पैदा किया जा सकता है.

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हरभजन ने भारत की हाल में हुए टेस्ट मैचों में मिली हार पर भी बात की, जिसमें न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मिली शिकस्त भी शामिल है. उन्होंने कहा कि इन हार के पीछे खिलाड़ियों की स्किल में कमी से ज्यादा, पिच के बेहद मुश्किल हालात जिम्मेदार थे.

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हरभजन के मुताबिक, वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप की दौड़ में जल्दी नतीजे पाने की होड़ ने ऐसी पिचें तैयार करने के चलन को बढ़ावा दिया है जो स्पिन गेंदबाजों के लिए ज्यादा मददगार होती हैं. उन्होंने आगे कहा कि अक्सर टीम मैनेजमेंट की मांग पर स्टेट क्रिकेट एसोसिएशन ऐसी पिचें तैयार कर देते हैं, लेकिन इस तरीके से खेल में खिलाड़ियों के असली स्किल की अहमियत कम हो जाता है.