सनातन धर्म के इतिहास में है ऐसे 8 श्रापों का जिक्र, आज भी कांप जाते हैं लोग

हिंदू पौराणिक ग्रंथों में अनेकों वरदान और श्रापों का वर्णन मिलता है. जहां तक श्राप का संबंध है, हर एक के पीछे का कारण और कहानी है. आज हम आपको बताएंगे ऐसे मुख्य श्रापों के बारे में जिनकी चर्चा खूब होती है और जिनके कारण इतिहास में घटनाक्रमों की एक श्रृंखला ही बन गई है.

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नारद का भगवान विष्णु को श्राप

नारद का भगवान विष्णु को श्राप2 / 9

शिव पुराण के अनुसार एक बार श्री लक्ष्मी के स्वयंवर में देव ऋषि नारद भी पहुंच गए क्योंकि वे श्री लक्ष्मी पर मोहित हो गए थे. उसी स्वयंवर में भगवान विष्णु भी पहुंचे, लेकिन उन्होंने देव ऋषि नारद का मुंह अपनी माया से वानर के समान कर दिया. नारद को छोड़कर श्री लक्ष्मी ने श्री विष्णु भगवान का वरण कर लिया. जब नारद मुनि को इस बात का पता चला तो वे भगवान विष्णु पर बहुत क्रोधित हुए और उन्होंने भगवान विष्णु को श्राप दिया कि जिस प्रकार तुमने मुझे स्त्री के लिए व्याकुल किया है, उसी प्रकार तुम भी स्त्री विरह का दुख भोगोगे. उनके श्राप के चलते ही भगवान विष्णु को राम अवतार लेना पड़ा और उन्होंने इस श्राप को पूरा किया. लेकिन राम अवतार में ‍भी उनको एक श्राप मिला.

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श्रीराम को भी मिला श्राप

श्रीराम को भी मिला श्राप3 / 9

श्रीराम जिन्हें भगवान विष्णु का सातवां अवतार माना जाता है उन्हें एक अप्सरा ने श्राप दिया था. वह अप्सरा वालि वानर की पत्नी थी. यह तब की बात है जब सुग्रीव वानर जोकि श्री राम के प्रिय मित्र थे, उन्होंने भगवान राम से मदद मांगी थी जिसके चलते सुग्रीव और वालि के बीच युद्ध हुआ जिसमें भगवान श्रीराम के बाण द्वारा वालि की मृत्यु हो गई थी. वालि को छल से मारा गया जानकर उनकी पत्नी तारा ने श्रीराम को कोसा और उन्हें एक श्राप दिया. श्राप के अनुसार भगवान राम अपनी पत्नी सीता को पाने के बाद जल्द ही खो देंगे. उसने यह भी कहा कि अगले जन्म में उनकी मृत्यु उसी के पति (वालि) द्वारा हो जाएगी. अगले जन्म में भगवान विष्णु ने श्रीकृष्ण के रूप में जन्म लिया था और उनके इस अवतार का अंत एक शिकारी (जो कि वालि का ही रूप था) द्वारा किया गया था.

गांधारी का श्रीकृष्ण को श्राप

गांधारी का श्रीकृष्ण को श्राप4 / 9

महाभारत के युद्ध के बाद जब भगवान श्रीकृष्ण गांधारी को सांत्वना देने पहुंचे तो अपने पुत्रों का विनाश देखकर गांधारी ने श्रीकृष्ण को श्राप दिया कि जिस प्रकार पांडव और कौरव आपसी फूट के कारण नष्ट हुए हैं, उसी प्रकार तुम्हारे बंधु-बांधव भी नष्ट हो जाएंगे. आज से छत्तीसवें वर्ष तुम अपने बंधु-बांधव व पुत्रों का नाश हो जाने पर एक साधारण कारण से अनाथ की तरह मारे जाओगे. इसी कथाक्रम में एक और श्राप ‍चर्चित है.

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शुक्राचार्य का राजा ययाति को श्राप

शुक्राचार्य का राजा ययाति को श्राप 5 / 9

महाभारत के एक प्रसंग के अनुसार राजा ययाति का विवाह शुक्राचार्य की पुत्री देवयानी के साथ हुआ था. देवयानी की शर्मिष्ठा नाम की एक दासी थी. एक बार जब ययाति और देवयानी बगीचे में घूम रहे थे, तब उसे पता चला कि शर्मिष्ठा के पुत्रों के पिता भी राजा ययाति ही हैं, तो वह क्रोधित होकर अपने पिता शुक्राचार्य के पास चली गई और उन्हें पूरी बात बता दी. तब दैत्य गुरु शुक्राचार्य ने ययाति को तत्काल ही बूढ़े होने का श्राप दे दिया था. बुढ़ापे में अब मृत्यु का डर सताने लगा तो उन्होंने अपने पुत्रों से उनकी उम्र मांगी. यदु को छोड़कर सभी ने अपनी अपनी कुछ उम्र पिता को दे दी. यदु के नहीं देने पर उन्हें श्राप मिला.

कद्रू का अपने पुत्रों को श्राप

कद्रू का अपने पुत्रों को श्राप 6 / 9

महाभारत के अनुसार ऋषि कश्यप की कद्रू व विनता नाम की दो पत्नियां थीं. कद्रू सर्पों की माता थी व विनता गरुड़ की. एक बार कद्रू व विनता ने एक सफेद रंग का घोड़ा देखा और शर्त लगाई. विनता ने कहा कि ये घोड़ा पूरी तरह सफेद है और कद्रू ने कहा कि घोड़ा तो सफेद हैं, लेकिन इसकी पूंछ काली है. कद्रू ने अपनी बात को सही साबित करने के लिए अपने सर्प पुत्रों से कहा कि तुम सभी सूक्ष्म रूप में जाकर घोड़े की पूंछ से चिपक जाओ, जिससे उसकी पूंछ काली दिखाई दे और मैं शर्त जीत जाऊं. कुछ सर्पों ने कद्रू की बात नहीं मानी. तब कद्रू ने अपने उन पुत्रों को श्राप दिया कि तुम सभी जनमजेय के सर्प यज्ञ में भस्म हो जाओगे.

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नंदी का रावण को श्राप

नंदी का रावण को श्राप 7 / 9

वाल्मीकि रामायण के अनुसार एक बार रावण भगवान शंकर से मिलने कैलाश गया. वहां उसने नंदी जी को देखकर उनके स्वरूप की हंसी उड़ाई और उन्हें वानर के समान मुख वाला कहा. तब नंदीजी ने रावण को श्राप दिया कि वानरों के कारण ही तेरा सर्वनाश होगा.

तुलसी का भगवान विष्णु को श्राप

तुलसी का भगवान विष्णु को श्राप8 / 9

शिवपुराण के अनुसार शंखचूड़ नाम का एक राक्षस था. उसकी पत्नी का नाम तुलसी था. तुलसी पतिव्रता थी, जिसके कारण देवता भी शंखचूड़ का वध करने में असमर्थ थे. देवताओं के उद्धार के लिए भगवान विष्णु ने शंखचूड़ का रूप लेकर तुलसी का शील भंग कर दिया. तब भगवान शंकर ने शंखचूड़ का वध कर दिया. यह बात जब तुलसी को पता चली तो उसने भगवान विष्णु को पत्थर हो जाने का श्राप दिया. इसी श्राप के कारण भगवान विष्णु की पूजा शालीग्राम शिला के रूप में की जाती है.

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श्रृंगी ऋषि का परीक्षित को श्राप

श्रृंगी ऋषि का परीक्षित को श्राप 9 / 9

पांडवों के स्वर्गारोहण के बाद अभिमन्यु के पुत्र परीक्षित ने शासन किया. उसके राज्य में सभी सुखी और संपन्न थे. एक बार राजा परीक्षित शिकार खेलते-खेलते बहुत दूर निकल गए. तब उन्हें वहां मौन अवस्था में शमीक नाम के ऋषि दिखाई दिए. राजा परीक्षित ने सोचा उनसे बात करनी चाहिए, लेकिन मौन और ध्यान में होने के कारण ऋषि ने कोई जबाव नहीं दिया. ये देखकर परीक्षित बहुत क्रोधित हुए और उन्होंने एक मरा हुआ सांप उठाकर ऋषि के गले में डाल दिया. यह बात जब शमीक ऋषि के पुत्र श्रृंगी को पता चली तो उन्होंने श्राप दिया कि आज से सात दिन बाद तक्षक नाग राजा परीक्षित को डंस लेगा, जिससे उनकी मृत्यु हो जाएगी.

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लेखक के बारे में

Versha Singh

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वर्षा स‍िंह News 24 ड‍िजिटल में बतौर सीन‍ियर सब एड‍िटर के पद पर कार्यरत हैं. वर्षा को ड‍िजिटल मीड‍िया में 6 साल से अधि‍क का अनुभव है. राष्‍ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और समसमाय‍िक व‍िषयों पर वर्षा की अच्‍छी पकड़ है. इसके अलावा राजनीत‍िक, क्राइम और ट्रेंडिंग खबरें भी ल‍िखती हैं. वर्षा ने मास्टर इन न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी की पढ़ाई माखन लाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल से की है और जर्नलिज्म एवं मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री लखनऊ विश्वविद्यालय से प्राप्त की है. वर्षा अपने करियर में Jagran New Media, Asia News International (ANI) और ETV Bharat जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं. उन्हें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लेखन और समसामयिक घटनाओं, राजनीति, हाइपरलोकल खबरों और मानवीय रुचि से जुड़ी कहानियों को डिजिटल दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का अनुभव है.
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