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हिंदू धर्म में दान करने का महत्व होता है और इस्लाम में ज़कात को जरूरी माना जाता है. हिंदू दान और मुस्लिम ज़कात के जरिए लोगों की मदद करते हैं. सिख और ईसाई धर्म में दान को लेकर क्या परंपरा है चलिए जानते हैं.
हिंदू धर्म में दान का महत्व

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दान करना हिंदू धर्म में परम कर्तव्य और सबसे पवित्र पुण्य-कर्म माना गया है. हिंदू धर्म में जरूरतमंदों की सहायता, अन्न दान और धन दान का खास महत्व है. दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है.
इस्लाम धर्म में ज़कात

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ज़कात इस्लाम धर्म में सेवा के लिए अनिवार्य माना गया है. इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक ज़कात अनिवार्य है. परंपराओं के अनुसार, हर मुस्लिम को वार्षिक बचत का 2.5% हिस्सा गरीब-जरूरतमंदों को दान करना चाहिए. ज़कात से बरकत आती है.
सिख और ईसाई में दान

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हिंदू धर्म में दान और इस्लाम में ज़कात अदा किया जाता है. ऐसे ही ईसाई धर्म में दशांश और सिख धर्म में दसवंध का महत्व है. सिख और ईसाई धर्म में दान करने का खास तरीका है.
ईसाई धर्म में दशांश

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सभी धर्मों की तरह ही क्रिश्चियन धर्म में दान करने का अपना अलग तरीका है. ईसाई धर्म में दान को दशांश 'Tithe' कहा जाता है. इसके अनुसार, सभी ईसाई अपनी आय का 10वां हिस्सा जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए दान करते हैं.
सिख धर्म में दसवंध

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सिख समुदाय के लोग अपनी कमाई का कम से कम 10 प्रतिशत हिस्सा दान करते हैं. सिख धर्म में सिखाया जाता है कि, उनके पास जो भी है सब भगवान की देन है. इसका एक हिस्सा जरूरतमंद लोगों को दान करना चाहिए. सिख धर्म में दान को दसवंध कहा जाता है. (All Photo Credit- AI) डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी सामान्य जानकारी और मान्यताओं पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.