1 / 6
garuda purana after death rituals
Garuda Purana Rules: अगर घर में किसी की मृत्यु हो जाती है, तो मृत्यु के बाद घर में चूल्हा नहीं जलाया जाता है. परिवार में किसी की मृत्यु के बाद खाना बनाना वर्जित होता है. इसके बारे में गरुड़ पुराण में बताया गया है.
मृत्यु के बाद के नियम

2 / 6
किसी की मृत्यु के बाद कई नियमों को मानना होता है. इन्हीं में से एक मृत्यु के बाद खाना न बनाना है. गरुड़ पुराण में मृत्यु के बाद चूल्हा जलाना वर्जित बताया गया है. इस नियम का संबंध आत्मा की शांति और मोक्ष से जुड़ा है.
क्यों नहीं जलता है चूल्हा?

3 / 6
परिवार में किसी की मृत्यु के बाद चूल्हा नहीं जलाना चाहिए. धार्मिक मान्यता के अनुसार, मृत्यु के बाद आत्मा परिवार के साथ रहती है. ऐसे में उसकी आत्मा की शांति के लिए घर में खाना बनाने से बचना चाहिए. मृत्यु के बाद तुरंत दैनिक क्रियाओं को करने से आत्मा की शांति में बाधा आती है.
सूतक काल के नियम

4 / 6
परिवार में किसी की मृत्यु के बाद सूतक काल लग जाता है. इसे मरण सूतक कहते हैं. इस दौरान कई नियमों जैसे, घर में उत्सव न मनाने, नए कपड़े न पहनने, खाना न बनाने आदि का पालन किया जाता है. खाना न बनाने के नियम को आमतौर पर 3 या 13 दिनों तक माना जाता है.
मृत्यु पर शोक

5 / 6
दुख की घड़ी में परिवार के लोग शोक मनाते हैं. इस कारण घर में खाना नहीं बनता है. दुख के समय में घर-परिवार के लोगों को भूख-प्यास का अहसास नहीं होता है. खाना न बनने के पीछे यह व्यवाहारिक कारण भी माना जाता है. दुख के समय में बाहर से लोग परिवार के लिए भोजन लेकर आते हैं.
कब जलता है चूल्हा?

6 / 6
सूतक काल समाप्त होने के बाद ब्रह्माणों को भोजन कराने और घर की शुद्धि के बाद चूल्हा जलाया जाता है. सूतक के बाद पहली बार सात्विक और सादा भोजन बनाया जाता है. कई परंपराओं के अनुसार, मृत्यु के तीसरे दिन के बाद घर मे चूल्हा जला सकते हैं. (All Photo Credit- Social Media) डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारी ज्योतिष शास्त्र पर आधारित है तथा केवल सूचना के लिए दी जा रही है. News24 इसकी पुष्टि नहीं करता है.