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बिहार के स्कूलों में अब नया सवेरा होने वाला है. राज्य सरकार ने शिक्षा के स्तर को सुधारने के लिए एक ऐसा सिस्टम लागू किया है, जो बच्चों के भविष्य की तस्वीर बदल सकता है. अब वार्षिक परीक्षाओं के नंबर सिर्फ रिपोर्ट कार्ड पर ही नहीं दिखेंगे, बल्कि वे बच्चों को 5 अलग-अलग कैटेगरी (A से E ग्रेड) में बांटेंगे.
71,297 स्कूलों में नई शुरुआत

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बिहार सरकार ने राज्य के 71,297 प्राथमिक स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है. अब 1.33 करोड़ से अधिक बच्चों की पढ़ाई का मूल्यांकन एक नए तरीके से होगा.
A से E तक की जर्नी

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अब बच्चों को उनकी वार्षिक परीक्षा के अंकों के आधार पर A से E तक के ग्रेड दिए जाएंगे. यह सिस्टम CBSE स्कूलों में पहले से ही लागू है और अब बिहार के प्राथमिक स्कूलों में भी यह बदलाव देखने को मिलेगा.
C, D, E ग्रेड वालों को स्पेशल अटेंशन

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इस नए सिस्टम की सबसे अच्छी बात यह है कि जिन बच्चों को C, D, या E ग्रेड मिलेगा, उनकी पढ़ाई पर खास ध्यान दिया जाएगा. लक्ष्य है कि सभी बच्चे बेहतर प्रदर्शन करें और A और B ग्रेड तक पहुंचें.
सख्ती से लागू करने के निर्देश

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नई नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2020 के लागू होने के बाद से, बिहार में स्कूली शिक्षा में बड़े बदलाव और सुधार हुए हैं. क्लासरूम में पढ़ाई और असेसमेंट में स्टूडेंट्स के बीच बढ़ते अंतर को देखते हुए, एजुकेशन डिपार्टमेंट ने एलिमेंट्री स्कूल के स्टूडेंट्स को ग्रेड देने का जरूरी फैसला लिया है. इस सिस्टम को सख्ती से लागू करने के लिए, एजुकेशन डिपार्टमेंट ने स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (SCERT) को एक एक्शन प्लान बनाने और इसे इसी नए सेशन से लागू करने का निर्देश दिया है.
अप्रैल में हर स्कूल को मिलेगा एक्शन प्लान

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ग्रेडिंग के लिए एक डिटेल्ड एक्शन प्लान अप्रैल में हर स्कूल को दिया जाएगा. भविष्य में इस सिस्टम को सेकेंडरी और हायर सेकेंडरी स्कूलों में लागू करने का प्रस्ताव है.