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जयपुर की मान सागर झील के बीच स्थित जल महल किसी फिल्मी सेट या जादुई ख्वाब जैसा लगता है। इसकी इंजीनियरिंग और वास्तुकला आज भी दुनिया के बड़े-बड़े आर्किटेक्ट्स को हैरान कर देती है।
आंखों का धोखा! जो दिखता है, वो है नहीं...

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क्या आप जानते हैं कि बाहर से केवल 1 मंजिल दिखने वाला जयपुर का यह खूबसूरत महल असल में 5 मंजिला है? जी हाँ, जल महल राजपूती वास्तुकला का सबसे बड़ा और अनोखा अजूबा है, जो सदियों से अपनी परतों में राज छुपाए खड़ा है।
4 मंजिलें पानी के अंदर, फिर भी दीवारें फौलाद

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इस महल की सबसे बड़ी खूबी यह है कि जब मान सागर झील पूरी भरी होती है, तो इसकी 4 मंजिलें पानी के अंदर डूबी रहती हैं। हमें सिर्फ सबसे ऊपर की 5वीं मंजिल ही दिखाई देती है। हैरानी की बात यह है कि 250 सालों से पानी में रहने के बाद भी इसकी दीवारों से पानी अंदर नहीं रिसता!
महाराजा माधो सिंह का शिकार डेरा

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इसे साल 1750 के आसपास महाराजा माधो सिंह प्रथम ने बनवाया था। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह रहने के लिए नहीं बना था? इसका मुख्य उद्देश्य राजाओं के बतख शिकार के बाद आराम करना और शाही पार्टियों का आनंद लेना था।
वो खास चूना, जिसने पानी को भी हरा दिया!

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बिना आधुनिक तकनीक के यह महल पानी में कैसे टिका है? दरअसल, इसके पत्थरों को जोड़ने के लिए एक खास तरह के चूने और सुरखी (पकी हुई मिट्टी का पाउडर) का इस्तेमाल किया गया था। यह मसाला इतना मजबूत है कि सदियों बाद भी इसने पानी को महल के अंदर घुसने नहीं दिया।
अरावली की पहाड़ियों के बीच तैरता हुआ महल

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अरावली की नीली पहाड़ियों और झील के शांत पानी के बीच यह महल ऐसा लगता है जैसे पानी पर तैर रहा हो। यहां की नक्काशी और छतरियां राजपूती वैभव की कहानी बयां करती हैं। रात के समय जब इसकी रोशनी पानी में झलकती है, तो नजारा किसी परीकथा जैसा होता है।
जयपुर आएं तो यह जादुई नजारा देखना न भूलें

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जल महल के अंदर जाना फिलहाल पर्यटकों के लिए मना है, लेकिन झील के किनारे से इसका दीदार करना एक यादगार अनुभव है। अगली बार जब आप पिंक सिटी आएं, तो इस वॉटर पैलेस की सेल्फी लेना न भूलें।