LPG सिलेंडर में क्यों होती है सिर्फ 14.2 किलो गैस? पूरी 14 या 15 किलो क्यों नही, जानिए क्या है इसके पीछे की वजह

आपने अक्सर देखा होगा कि जब आप LPG सिलेंडर खरीदने जाते हैं या फिर उसकी बुकिंग करते हैं तो रसोई गैस सिलेंडर में हमेशा 14.2 किलो गैस ही भरी होती है. लेकिन क्या आपने कभी ये सोचा है कि इस सिलेंडर में सिर्फ 14.2 किलो गैस ही क्यों होती है? यह 14 किलो या फिर 15 किलो का गैस सिलेंडर भी तो हो सकता है? 14.2 किलो का गैस सिलेंडर, यह संख्या सुनने में थोड़ी अजीब और सवाल पैदा करने वाली है. लेकिन इसके पीछे दशकों पुरानी एक बहुत ही सूझबूझ भरी प्लानिंग काम करती है.

lpg shortage in india
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Prayagraj, Mar 20 (ANI): A worker pulls an LPG cylinder amid reports of a nationwide shortage of LPG gas cylinders, in Prayagraj on Friday. (ANI Photo) National::Nitin Sharma

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क्यों होती है सिलेंडर में 14.2 किलो गैस?

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असल में यह कोई मजबूरी नहीं थी कि सिलेंडर में सिर्फ 14.2 किलो ही गैस भरनी है और या फिर इस संख्या को बदला ना जा सके. यह फैसला लोगों के हित में ही लिया गया था. जिससे कि आम आदमी की जेब पर इसका अतिरिक्त भार ना पड़े और उनकी सुरक्षा का भी पूरा ध्यान रखा गया था. समय के साथ यह मात्रा इतनी सटीक बैठी कि इसे ही पक्का स्टैंडर्ड मान लिया गया और आज भी हम इसी नियम का पालन कर रहे हैं.

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भारत में घरेलू LPG का चलन 1950 के दशक में हुआ था शुरू

भारत में घरेलू LPG का चलन 1950 के दशक में हुआ था शुरू3 / 8

वहीं, भारत में घरेलू LPG का चलन 1950 के दशक के आखिरी सालों में शुरू हुआ था. उस दौर में बर्मा शेल (Burmah shell) नाम की एक विदेशी कंपनी गैस सप्लाई करती थी. इसी कंपनी ने सबसे पहले सिलेंडर का यह खास आकार और वजन तय किया गया था. बाद में कंपनी बदलकर भारत पेट्रोलियम (BPCL) बनी, लेकिन जो सिलेंडर का साइज उन्होंने तब तय किया था , वह आज के समय में भी वैसा ही है.

किस कंपनी ने शुरू किया था गैस सिलेंडर?

किस कंपनी ने शुरू किया था गैस सिलेंडर?4 / 8

बता दें कि बर्मा शेल कंपनी ने उस जमाने में तीन बातों का ध्यान रखकर 14.2 किलो का नंबर चुना था. सबसे पहली और जरूरी बात थी, उठाने और ले जाने में आसानी होना. जब सिलेंडर में 14.2 किलो गैस भरी होती है, तो खाली लोहे की टंकी की मिलाकर इसका कुल वजन करीब 29 से 30 किलो के आस-पास होता है. उस समय के सर्वे के हिसाब से एक औसत भारतीय व्यक्ति इतना वजन आसानी से उठाकर यहां-वहां रख सकता था. अगर सिलेंडर का वजन 30 किलो से ज्यादा का होता तो सिलेंडर को उठाना-रखना थोड़ा मुश्किल हो जाता.

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सिलेंडर के आकार और वजन के पीछे थी क्या वजह?

सिलेंडर के आकार और वजन के पीछे थी क्या वजह?5 / 8

वहीं, सिलेंडर के आकार और वजन के पीछे दूसरी बड़ी वजह थी एक परिवार की जरूरत का अंदाजा. उस समय एक्सपर्ट्स ने यह हिसाब लगाया कि एक मध्यमवर्गीय परिवार में महीनेभर का खाना बनाने के लिए कितनी गैस खर्च होगी. रिसर्च में यह पाया गया कि 14 किलो के आस-पास गैस एक सामान्य परिवार के लिए करीब 30 से 45 दिनों तक आराम से चल जाती है. यानी एक बार सिलेंडर आ गया तो महीने भर का काम पूरा.

ग्राहकों के बारे में सोच कर ही बनाया गया था सिलेंडर

ग्राहकों के बारे में सोच कर ही बनाया गया था सिलेंडर6 / 8

इस हिसाब से ग्राहकों के लिए भी आसानी हो गई कि उन्हें हर महीने या फिर डेढ़ महीने में ही नया सिलेंडर बुक करना पड़ता था. साथ ही गैस कंपनियों के लिए भी डिलीवरी का काम आसान हो गया, क्योंकि उन्हें पता था कि किस घर में कितने दिन बाद सिलेंडर की जरूरत पड़ेगी. यह सप्लाई का तरीका इतना कामयाब रहा कि यह मॉडल आज कई दशकों बाद भी पूरी तरह फिट बैठता है.

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सिलेंडर में क्यों नहीं भरी जाती 15 किलो गैस?

सिलेंडर में क्यों नहीं भरी जाती 15 किलो गैस?7 / 8

तीसरी और सबसे जरूरी तकनीकी कारण था. यह सुरक्षा और सिलेंडर की मजबूती से जुड़ा था. हम जानते हैं कि LPG सिलेंडर के अंदर गैस को बहुत तेज दबाव के साथ भरा जाता है. गैस के इस दबाव को झेलने के लिए लोहे की टंकी की दीवारें एक खास मोटाई की बनाई जाती है. अगर इसमें 14.2 किलो से ज्यादा गैस भरने की कोशिश की जाती तो सिलेंडर फटने का डर बढ़ जाता या फिर उसे बहुत ज्यादा मोटा और भारी बनाना पड़ता.

LPG में होती है कौन-कौन सी गैस?

LPG में होती है कौन-कौन सी गैस?8 / 8

अब मामले को थोड़ा और गहराई से समझते हैं. दरअसल, LPG कोई एक अकेली गैस नहीं है. यह असल में दो गैसों प्रोपेन (Propane) और ब्यूटेन (Butane) का मिश्रण है. इन दोनों ही गैसों का वजन और घनत्व (Density) अलग-अलग होता है. मौसम के हिसाब से इनका अनुपात भी थोड़ा-बहुत बदलता रहता है, ताकि गैस का प्रेशर सही बना रहे.

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लेखक के बारे में

Versha Singh

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वर्षा स‍िंह News 24 ड‍िजिटल में बतौर सीन‍ियर सब एड‍िटर के पद पर कार्यरत हैं. वर्षा को ड‍िजिटल मीड‍िया में 6 साल से अधि‍क का अनुभव है. राष्‍ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और समसमाय‍िक व‍िषयों पर वर्षा की अच्‍छी पकड़ है. इसके अलावा राजनीत‍िक, क्राइम और ट्रेंडिंग खबरें भी ल‍िखती हैं. वर्षा ने मास्टर इन न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी की पढ़ाई माखन लाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल से की है और जर्नलिज्म एवं मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री लखनऊ विश्वविद्यालय से प्राप्त की है. वर्षा अपने करियर में Jagran New Media, Asia News International (ANI) और ETV Bharat जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं. उन्हें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लेखन और समसामयिक घटनाओं, राजनीति, हाइपरलोकल खबरों और मानवीय रुचि से जुड़ी कहानियों को डिजिटल दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का अनुभव है.
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