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13.65 मीटर व्यास वाली टनल बोरिंग मशीन (टीबीएम) भारत में पहली बार किसी रेल प्रोजेक्ट में इस्तेमाल होगा. मेट्रो टनल में इस्तेमाल होने वाले टर्नल मशीन का व्यास 5 से 6 मीटर का होता है. इससे आपको इसके साइज का अंदाजा लगाने में मदद मिलेगी. पानी के 213 फीट की गहराई में 250 KM/घंटे की स्पीड से ट्रेन को दौड़ाना इतना आसान नहीं है.
21 किमी हिस्सा जमीन और पानी के नीचे

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मुंबई-अहमदाबाद हाई-स्पीड रेल के लिए समंदर के नीचे टनल बननी है. पूरे रूट का 21 किमी हिस्सा जमीन और पानी के नीचे हैं. पानी के बोरिंग का काम करने के लिए चीन से खास मशीन मंगवाई गई है. चीन से आने वाले ‘महामशीन’ की मदद से अब ये काम और तेजी से हो सकेगा.
चीन से भारत पहुंची ‘महामशीन’

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चीन से ये मशीन टुकड़ों में आई है, जिसे असेंबल करने में कम के कम 90 दिनों का वक्त लगेगा. मिक्स्ड-शील्ड टनल बोरिंग मशीन को खुदाई वाली साइट तक पहुंचाने के लिए 150 से ज्यादा ट्रेलरों की जरूरत पड़ेगी. चीन ने आई ये टीएमसी मशीन बेहद कम कंपन और आवाज के साथ जमीन की कटिंग कर तेजी से खुदाई कर सकती है. कटिंग और खुदाई के साथ-साथ यह मशीन मलबा हटाना और टनल को कंक्रीट से मजबूत करने चाहे काम भी करेगी.
समंदर के नीचे 7 किमी का टनल

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नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड के एमडी अचल खरे के मुताबिक समंदर के नीचे 7 किलोमीटर लंबी टनल बनाने में आसानी होगी. ठाणे क्रीक के नीचे यह 7 किमी लंबा टनल बनना है. समुद्र तल से इस टनल की गहराई 25–65 मीटर (82–213 फीट) है. मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की अनुमानित खर्च पहले 1.1 लाख करोड़ रुपये थी, जिसे बाद में बढ़कर लगभग 1.98 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया.
अगस्त 2027 से चलेगी बुलेट ट्रेन

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देश की पहली हाई स्पीड बुलेट ट्रेन को अगस्त 2027 से चलाने की तैयारी है. बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के लिए तेजी से काम चल रहा है. अहमबाद से मुंबई के बीच ये ट्रेन 21 किमी की दूरी जमीन के नीचे तय करेगी. जिसका कुछ हिस्सा समंदर के नीचे से गुजरेगा. रेल मंत्रालय की ओर से साझा की गई जानकार के मुताबिक भारत की पहली बुलेट ट्रेन 15 अगस्त 2027 तक चलने की उम्मीद है. पहले चरण में यह गुजरात के सूरत से बिलिमोरा सेक्शन के बीच चलेगी.