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ओडिशा के पुरी में स्थित जगन्नाथ धाम मंदिर हिंदू धर्म के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है. वहीं, खबरों के अनुसार, पुरी के नीचे प्राचीन शहर है, जिसे ग्राउंड पेनिट्रेटिंग सर्वेक्षण के दौरान खोजा गया है.
क्या पुरी मंदिर के नीचे है एस शहर?

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जब से इस बात का पता चला है कि ओडिशा के मंदिर नगर पुरी के नीचे एक प्राचीन शहर भी है, इसने लोगों को चौंका दिया है. खबरों के अनुसार, यह शहर ग्राउंड पेनिट्रेटिंग सर्वेक्षण के दौरान खोजा गया. वैज्ञानिकों को एक और संरचना भी मिली है, जो संभवत जगन्नाथ मंदिर को समुद्र से जोड़ने वाली एक गुप्त सुरंग है. इस खोज ने मंदिर से जुड़े रहस्यों की श्रृंखला में एक और रहस्य को जोड़ दिया है.
हजारों श्रद्धालु आते हैं जगन्नाथ मंदिर

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जिन्हें इस मंदिर के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है, उन्हें बता दें कि पुरी के प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर में हर साल हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं. यह भारत के चारधाम तीर्थस्थलों में से एक है और अपनी वार्षिक रथ यात्रा के लिए भी जाना जाता है.
राजा इंद्रद्युम ने कराया था इस मंदिर का निर्माण

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इस मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा के अनुसार, राजा इंद्रद्युम ने इस पवित्र स्थल का निर्माण उस समय कराया था जब भगवान विष्णु ने उन्हें सपने में नील माधव को प्राप्त करने का आशीर्वाद दिया था.
पुरी जगन्नाथ धाम मंदिर चारधाम के पवित्र स्थानों में से एक है

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ऐसा भी माना जाता है कि जब पांडवों ने स्वर्ग की यात्रा की, तो सप्त ऋषियों ने उन्हें मोक्ष के समीप पहुंचने के लिए चारधाम की यात्रा करने की सलाह दी. पुरी जगन्नाथ धाम मंदिर चारधाम के पवित्र स्थानों में से एक है. तब से लेकर आज तक जगन्नाथ प्रतिमा के दर्शन आम लोगों के वर्जित रहे हैं.
हवा के विपरीत दिशा में लहराता है ध्वज

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जगन्नाथ धाम मंदिर विज्ञान से जुड़े कई सिद्धातों को चुनौती देता है और इसी वजह से इसने लोकप्रियता हासिल की है. इस मंदिर के सबसे ऊपर एक लाल रंग का ध्वज लगा है, जो हर समय लहराता रहता है. ध्वज का लहराना तो सामान्य बात है लेकिन चौंकाने वाली बात ये है कि ये ध्वज हमेशा हवा की विपरीत दिशा में लहराता है. इस झंडे को हर दिन मंदिर के पुजारी बदलते हैं. पुजारी हर दिन बिना किसी तरह की सुरक्षा के 200 फीट से ज्यादा ऊंचे मंदिर पर चढ़कर इसे बदलते हैं. पुरी का जगन्नाथ धाम कई अनोखे रहस्यों से भरा हुआ है.