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क्या आपको पता है कि एक अप्रैल की सुबह जब आपके पास सैलरी का मैसेज आएगा तो आपके हाथ में आने वाले पैसे कम हो सकते हैं. घबराइए मत! ये कोई सैलरी कट नहीं बल्कि सरकार का एक ऐसा मास्टर स्ट्रोक है जो आज आपकी जेब थोड़ी खाली ज़रूर करेगा लेकिन आपके बुढ़ापे को करोड़ों की दौलत से भर देगा. 1 अप्रैल से लागू हो रहे नए श्रम कानून के कारण कर्मचारियों की सैलरी स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. नए नियम लागू होने के बाद बेसिक सैलरी बढ़ेगी, जिसका सीधा असर कर्मचारियों के प्रोविडेंट फंड (PF) और ग्रेच्युटी पर पड़ेगा.
रिटायरमेंट फंड तेजी से बढ़ेगा

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इससे पहले कंपनियां टैक्स बचाने के लिए बेसिक सैलरी कम रखती थीं और अलाउंस का हिस्सा ज्यादा कर देती थीं, जिससे कुल वेतन का ढांचा अलग नजर आता था. चूंकि PF का योगदान बेसिक सैलरी पर आधारित होता है, इसलिए बेसिक बढ़ते ही कर्मचारी और कंपनी दोनों का योगदान बढ़ जाएगा. इससे रिटायरमेंट फंड तेजी से बढ़ेगा और भविष्य में आर्थिक सुरक्षा मजबूत होगी, हालांकि इसका असर मौजूदा सैलरी पर दिखेगा.
बड़ा असर इन-हैंड सैलरी पर

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इन नियमों के अनुसार अब किसी भी कर्मचारी की बेसिक सैलरी उसके कुल वेतन यानी CTC का कम से कम 50 प्रतिशत होना जरूरी होगा. इस बदलाव का सबसे बड़ा असर इन-हैंड सैलरी पर पड़ेगा, जो हर महीने कर्मचारियों को मिलती है. PF में ज्यादा कटौती होने के कारण कर्मचारियों के हाथ में आने वाली राशि थोड़ी कम हो सकती है.
यह भविष्य को सुरक्षित बनाएगी

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हालांकि यह कटौती एक तरह का निवेश है, जो लंबे समय में फायदा देगा. रिटायरमेंट के समय कर्मचारियों के पास पहले से ज्यादा बड़ी रकम जमा होगी, जो उनके भविष्य को सुरक्षित बनाएगी. कुल मिलाकर, ये बदलाव शॉर्ट टर्म में सैलरी पर असर डाल सकते हैं, लेकिन भविष्य को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम हैं.
1 साल में भी ग्रेच्युटी का लाभ

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ग्रेच्युटी और काम के घंटों से जुड़े नियमों में भी अहम बदलाव किए गए हैं. अब कुछ शर्तों के तहत कर्मचारियों को 5 साल की जगह 1 साल में भी ग्रेच्युटी का लाभ मिल सकता है. इसके अलावा, हफ्ते में 48 घंटे काम का नियम तय किया गया है. यदि कर्मचारी इससे ज्यादा काम करते हैं, तो उन्हें दोगुना ओवरटाइम भुगतान देना होगा, जिससे उनके अधिकार मजबूत होंगे.