जगन्नाथ पुरी के रत्न भंडार में है कितना सोना-चांदी? 15 बार हुई लूटने की नाकाम कोशिश

ओडिशा के पुरी में मौजूद भगवान जगन्नाथ मंदिर का खजाना इस समय एक बार फिर से चर्चा में है. इसे रत्न भंडार के नाम से जाना जाता है. रत्न भंडार में मौजूद संपत्ति का डॉक्यूमेंनटेशन किया जा रहा है, जिससे तकरीबन 48 साल बाद ये सामने आएगा कि रत्न भंडार में कितना सोना-चांदी है. इस तरह पुरी के इस प्रसिद्ध मंदिर के खजाने को लेकर दिलचस्पी बढ़ गई है. बता दें कि बुधवार को दोपहर 12 बजे के बाद से शुभ मुहूर्त में रत्न भंडार में क्या-क्या और कितना है, इसकी जांच शुरू की गई है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि जगन्नाथ पुरी के रत्न भंडार का इतिहास क्या है और यह क्यों चर्चा का विषय है?

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रत्न भंडार का इतिहास

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पुरी के श्रीमंदिर में रत्न भंडार की मौजूदगी मंदिर के निर्माण के समय से ही है. यानी इसे बी 12वीं सदी के आस-पास का माना जा सकता है. जगन्नाथ मंदिर से जुड़ी कहानियों में दो राजाओं इंद्रद्यम्न और राजा गालु माधव का जिक्र कई बार होता है. कहते हैं कि रत्न भंडार राजा इंद्रद्यम्न का ही शाही खजाना था, जिसे उन्होंने जन कल्याण के लिए भगवान नीलमाधव (जनन्नाथ महाप्रभु) पर न्योछावर कर दिया था. तब देवी लक्ष्मी ने उन्हें वरदान दिया था कि वह खुद इस क्षेत्र में निवास करेंगी. उनकी कृपा से रत्न भंडार कभी खाली नहीं होगा.

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किसने दिया था इतना सोना चांदी?

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रत्न भंडार के दो कक्ष हैं, भीतर भंडार (आंतरिक खजाना) और बाहरी भंडार (बाहरी खजाना). ओडिशा मैग्जीन (राज्य सरकार की प्रकाशित पत्रिका) के अनुसार, राजा अनंगभीम देव ने जगन्नाथ के आभूषण तैयार करने के लिए बहुत बड़ी मात्रा में सोना दान किया था. बाहरी खजाने में भगवान जगन्नाथ के सोने से बने मुकुट, सोने के तीन हार (हरिदाकंठी माला) हैं, जिनमें से हर एक का वजन 120 तोला है.

क्या-क्या है रत्न भंडार में?

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रिपोर्ट के अनुसार, भगवान जगन्नाथ और बलभद्र के सोने से बने श्रीभुजा और श्रीपयार का भी जिक्र किया गया है. इसके मुताबिक आतंरिक खजाने में सोने के 74 आभूषण हैं, जिनमें से हर एक का वजन 100 तोला से अधिक है. सोने, हीरे, मूंगा और मोतियों से बनी प्लेटें भी हैं. इसके अलावा 140 से ज्यादा चांदी के आभूषम भी खजाने में रखे हुए हैं. भगवान जगन्नाथ की निधि होने के कारण पुरी मंदिर के रत्न भंडार को लेकर भक्तों में गहरी आस्था है. यह रत्न भंडार भगवान जगन्नाथ को चढ़ाए गए बहुमूल्य सोने और हीरे के आभूषणों का घर है.

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कब-कब खोला गया रत्न भंडार?

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रत्न भंडार को 48 साल पहले 13 मई 1978 को खोला गया था. तब ये प्रक्रिया 23 जुलाई 1978 तक चली थी. तब हुई गिनती में 454 सोने-मिश्रित वस्तुए (128.38 किलो), 293 चांदी की वस्तुएं (221.53 किलो) और कई कीमती रत्न दर्ज किए गए थे. रत्न भंडार को 1905 और 1926 में भी खोला गया था. साल 2018 में रत्नभंडार की जानकारी को लेकर विधानसभा में बताया गया कि रत्न भंडार में 12,831 भरी (एक भरी 11.66 ग्राम के बराबर) से ज्यादा सोने के जेवर हैं. इनमें कीमती पत्थर लगे हैं. साथ ही 22,153 भरी चांदी के बर्तन और दूसरे कीमती सामान भी हैं.

भगवान लोकनाथ करते है सुरक्षा

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दो साल बाद बुधवार को एक बार फिर से रत्न भंडार खोला गया है. इसे खोलने से पहले सभी जरूरी परंपराओं का पालन किया गया. भगवान जगन्नाथ और लोकनाथ से अनुमति ली गई. लोकनाथ मंदिर जगन्नाथ मंदिर से सिर्फ दो किलोमीटर की दूरी पर है. यह एक शिवमंदिर है, जो रत्न भंडार के रखवाले भी हैं. बाबा लोकनाथ के रूप में शिवजी के गण ही श्रीरत्न क्षेत्र की रक्षा करते हैं.

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जब खो गई थी चाबी

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ओडिशा हाईकोर्ट ने साल 2018 में राज्य सरकार को रत्न भंडार खोलने के लिए निर्देश दिए थे. 4 अप्रैल 2018 को कोर्ट के आदेश पर 16 लोगों की टीम रत्न भंडार तक पहुंची थी, लेकिन रत्न भंडार खोला नहीं जा सका था, क्योंकि अचानक सामने आया कि इस भंडार की चाबी खो गई है. तब सीएम थे नवीन पटनायक. उन्होंने 4 जून 2018 को न्यायिक जांच के आदेश दिए थे. जांच कमेटी ने 29 नवंबर 2018 को चाबी से जुड़ी अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी थी लेकिन सरकार ने इस रिपोर्ट को कभी सार्वजनिक नहीं किया और चाबी का कुछ पता नहीं चला.

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लेखक के बारे में

Versha Singh

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वर्षा स‍िंह News 24 ड‍िजिटल में बतौर सीन‍ियर सब एड‍िटर के पद पर कार्यरत हैं. वर्षा को ड‍िजिटल मीड‍िया में 6 साल से अधि‍क का अनुभव है. राष्‍ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और समसमाय‍िक व‍िषयों पर वर्षा की अच्‍छी पकड़ है. इसके अलावा राजनीत‍िक, क्राइम और ट्रेंडिंग खबरें भी ल‍िखती हैं. वर्षा ने मास्टर इन न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी की पढ़ाई माखन लाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल से की है और जर्नलिज्म एवं मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री लखनऊ विश्वविद्यालय से प्राप्त की है. वर्षा अपने करियर में Jagran New Media, Asia News International (ANI) और ETV Bharat जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं. उन्हें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लेखन और समसामयिक घटनाओं, राजनीति, हाइपरलोकल खबरों और मानवीय रुचि से जुड़ी कहानियों को डिजिटल दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का अनुभव है.
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