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प्रशांत महासागर की गहराई में एक ऐसी हलचल शुरू हुई है, जो भारत के लिए खतरे की घंटी है. वैज्ञानिकों ने प्रशांत महासागर में एक विशाल 'केल्विन वेव' देखी है, जो दक्षिण अमेरिका के तट तक पहुंच चुकी है.
क्या है सुपर एल नीनो?

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यह लहर एक ऐतिहासिक 'सुपर एल नीनो' की जमीन तैयार कर रही है. भारत के लिए इसका सीधा मतलब है - भीषण गर्मी और चेन्नई जैसे शहरों के लिए विनाशकारी बाढ़ का डर.
प्रशांत महासागर में क्या हो रहा?

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वैज्ञानिकों के मुताबिक, प्रशांत महासागर के नीचे गर्म पानी की एक विशाल लहर भूमध्य रेखा को पार कर रही है. यह लहर ठंडे पानी को ऊपर आने से रोक रही है, जिससे समुद्र की सतह का तापमान तेजी से बढ़ रहा है. जब समुद्र की सतह गरम होती है, तो यह दुनिया भर के मौसम चक्र को उलट देती है.
भारत पर क्या होगा असर?

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एल नीनो के कारण उत्तर और मध्य भारत में जून-जुलाई का मानसून कमजोर पड़ सकता है, जिससे खेती पर बुरा असर पड़ेगा. इसके ठीक उलट, यह अक्टूबर से दिसंबर के दौरान बंगाल की खाड़ी से भारी नमी खींचकर तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के तटों पर 'बरसाती कहर' बरपा सकता है.
चेन्नई पर सकंट

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चेन्नई के लोग आज भी 2015 की उस महाप्रलय को नहीं भूले हैं, जब आधा शहर पानी में समा गया था. संयोग से, 2015 में भी एक शक्तिशाली 'एल नीनो' सक्रिय था. चेन्नई एक नीचा और सपाट इलाका है. अगर भारी बारिश हुई, तो नदियां समुद्र में पानी नहीं गिरा पातीं और शहर डूबने लगता है.
कितना बड़ा है खतरा?

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NOAA और वैश्विक मौसम मॉडल संकेत दे रहे हैं कि 2026 का एल नीनो 'सुपर' कैटेगरी का हो सकता है, जो 2015 से भी अधिक भयानक बारिश ला सकता है.