'आने वाला है भयावह संकट', सऊदी-कतर-यूएई के गैस ठिकानों पर हमले से पूरी दुनिया में डर का माहौल

बुधवार रात इजरायल ने कथित रूप से अमेरिकी मदद से दुनिया के सबसे बड़े गैस फील्ड ईरान के साउथ पार्स पर हमला कर दिया. इस हमले से बौखलाए ईरान ने खाड़ी के देशों पर ताबड़तोड़ हमले किए हैं. ईरान खाड़ी देशों के गैस ठिकानों पर हमले कर रहा है जिसका सबसे ज्यादा नुकसान कतर को हुआ है.

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साउथ पार्स है दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस फील्ड

साउथ पार्स है दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस फील्ड2 / 7

वहीं, ईरानी शासन ने चेतावनी दी है कि उसके बड़े गैस फील्ड साउथ पार्स के प्रोडक्शन सेंटर पर हुए इजरायली हमले को वो पूर्ण आर्थिक युद्ध मानता है. साउथ पार्स दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस फील्ड है जिसे ईरान और कतर साझा करते हैं. यह दोनों खाड़ी देश के बीच समुद्र में स्थित है और कतर के विशाल नॉर्थ फील्ड का विस्तार माना जाता है.

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ईरान की मिसाइलों ने कतर के रास लाफान पर किया हमला

ईरान की मिसाइलों ने कतर के रास लाफान पर किया हमला3 / 7

साउथ पार्स पर हमले के कुछ ही घंटों के भीतर ईरान की मिसाइलों ने कतर के रास लाफान इलाके को निशाना बनाया, जहां लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की रिफाइनरी के मुख्य ठिकाने हैं. कतर की सरकारी गैस कंपनी के अनुसार, ईरान के हमले से समुद्री मार्ग से गैस आपूर्ति करने वाली दुनिया के सबसे बड़े गैस सिस्टम को भारी नुकसान हुआ है.

पूरी ग्लोबल सप्लाई पर बढ़ेगा संकट

पूरी ग्लोबल सप्लाई पर बढ़ेगा संकट4 / 7

कतर की सरकारी तेल-गैस कंपनी कतरएनर्जी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) साद अल-काबी के मुताबिक, 'ईरान के हमले में गैस रिफाइनरियों को इतना नुकसान हुआ है जिसे ठीक करने में पांच साल लग सकते हैं. इस वजह से चिंता बढ़ गई है कि ग्लोबल गैस सप्लाई का संकट लंबे समय तक बना रह सकता है.'

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देश के गैस निर्यात क्षेत्र पर हमला

देश के गैस निर्यात क्षेत्र पर हमला5 / 7

अल-काबी ने कहा, 'मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि रमजान के महीने में एक मुस्लिम देश हम पर इस तरह हमला करेगा.' कतर सरकार ने पुष्टि की कि ईरान की ओर से दागी गई पांच बैलिस्टिक मिसाइलों में से चार को रोक लिया गया, लेकिन एक मिसाइल रास लाफान औद्योगिक परिसर पर गिरी, जो देश के गैस निर्यात का मुख्य केंद्र है. सरकारी प्रवक्ता ने चेतावनी दी कि ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाना 'ग्लोबल एनर्जी सिक्योरिटी, क्षेत्र के लोगों और पर्यावरण के लिए खतरा' है.

एशियाई देश सबसे अधिक गैस खरीदते हैं कतर से

एशियाई देश सबसे अधिक गैस खरीदते हैं कतर से6 / 7

पिछले साल कतर की गैस सप्लाई वैश्विक LNG बाजार का लगभग पांचवां हिस्सा थी, जिसमें से करीब 80% एशिया के विकासशील देशों को भेजी गई. अगर इसका निर्यात लंबे समय तक बाधित होता है, तो दुनिया भर में गैस की कीमतों में भारी इजाफा हो सकता है.

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क्या भारत पर भी पड़ेगा असर?

क्या भारत पर भी पड़ेगा असर?7 / 7

इन हमलों के बाद गैस बाजार में तेल उछाल आया और यूरोपीय बेंचमार्क कीमतें 30% तक बढ़ गईं, जो 2023 के बाद का उच्चतम स्तर है. कंसल्टेंसी MST Marquee के रिसर्च प्रमुख सॉल कावोनिक ने ब्रिटिश अखबार द गार्डियन से बात करते हुए कहा, 'हम अब एक भयावह गैस संकट की स्थिति की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं. युद्ध खत्म होने के बाद भी एलएनजी सप्लाई में बाधा महीनों या यहां तक कि सालों तक बनी रह सकती है. इस कारण गैस की कीमतें ऊपर ही बनी रहेंगी.' होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने के बाद पहले से दबाव में चल रहे वैश्विक तेल बाजार में अब और चिंता बढ़ गई है. विश्लेषकों के मुताबिक, वैश्विक बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमतें जल्द ही 120 डॉलर प्रति बैरल के पार जा सकती हैं.

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लेखक के बारे में

Versha Singh

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वर्षा स‍िंह News 24 ड‍िजिटल में बतौर सीन‍ियर सब एड‍िटर के पद पर कार्यरत हैं. वर्षा को ड‍िजिटल मीड‍िया में 6 साल से अधि‍क का अनुभव है. राष्‍ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और समसमाय‍िक व‍िषयों पर वर्षा की अच्‍छी पकड़ है. इसके अलावा राजनीत‍िक, क्राइम और ट्रेंडिंग खबरें भी ल‍िखती हैं. वर्षा ने मास्टर इन न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी की पढ़ाई माखन लाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल से की है और जर्नलिज्म एवं मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री लखनऊ विश्वविद्यालय से प्राप्त की है. वर्षा अपने करियर में Jagran New Media, Asia News International (ANI) और ETV Bharat जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं. उन्हें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लेखन और समसामयिक घटनाओं, राजनीति, हाइपरलोकल खबरों और मानवीय रुचि से जुड़ी कहानियों को डिजिटल दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का अनुभव है.
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