आखिर क्यों नहीं बना पाए वैज्ञानिक मां के दूध की हूबहू कॉपी? जानिए हैरान कर देने वाली सच्चाई

मां के दूध नवजात बच्चे के लिए काफी जरूरी होता है, जो उसके विकास में अहम भूमिका निभाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं विज्ञान क्यों अब तक इसकी कॉपी नहीं बना सका?

breast milk
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हर साल 1 से 7 अगस्त तक वर्ल्ड ब्रेस्टफीडिंग वीक (World Breastfeeding Week) मनाया जाता है. इसका उद्देश्य स्तनपान के महत्व को समझाना और शिशुओं के बेहतर स्वास्थ्य के लिए मां के दूध को बढ़ावा देना है. ऐसे में हम जानेंगे आखिर मां के दूध में क्या ऐसे खास तत्व हैं, जिसनें विज्ञान को हिला कर रख दिया, यानी इसे रिसर्च सेंटर में बनाने उनके लिए अबतक संभव नहीं हो सका.  

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आम दूध से बहुत खास है मां का दूध

आम दूध से बहुत खास है मां का दूध2 / 9

मां का दूध नवजात शिशु के लिए प्रकृति का सबसे अनमोल तोहफा माना जाता है. इसमें सिर्फ पोषण ही नहीं, बल्कि बच्चे की रोगों से संक्रमण से लड़ने की क्षमता बढ़ाने वाले कई खास तत्व मौजूद होते हैं. यही कारण है कि आधुनिक विज्ञान अभी तक इसकी पूरी नकल नहीं कर पाया है.

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AI और आधुनिक तकनीक के छूटे पसीने

AI और आधुनिक तकनीक के छूटे पसीने3 / 9

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, आज के दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और अत्याधुनिक तकनीक तेजी से आगे बढ़ रही हैं, लेकिन मां के दूध की नकल तैयार कपना अब भी बड़ी चुनौती है. दुनियाभर की नामी कंपनियां और वैज्ञानिक कई सालों से इस विषय पर में रिसर्च कर रहे हैं, लेकिन वह अब तक सफल नहीं हो सके हैं.

मां के दूध में मौजूद खास शुगर बनाती है इसे अलग

मां के दूध में मौजूद खास शुगर बनाती है इसे अलग4 / 9

आपको शायद मालूम न हो, लेकिन वैज्ञानिकों के अनुसार मां के दूध में ह्यूमन मिल्क ओलिगोसैकेराइड्स (HMOs) नाम का खास शुगर मॉलिक्यूल पाए जाते हैं. मां के दूध में इनके 200 से ज्यादा प्रकार मिल चुके हैं, जो बच्चे की आंत और इम्यून सिस्टम के विकास में मदद करते हैं.

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क्यों काफी जरूरी है HMOs

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ये शुगर सीधे बच्चे को ऊर्जा देने के बजाय आंत में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ावा देते हैं. खासकर बिफिडोबैक्टीरियम जैसे लाभकारी बैक्टीरिया बच्चे की पाचन क्षमता मजबूत करते हैं और हानिकारक बैक्टीरिया से सुरक्षा देने में मदद करते हैं. इससे बच्चा बीमारियों से दूर रहता है और ज्यादा एक्टिव रहता है.

लैब में कहां अटक रहा रिसर्च

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कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी, बर्कले की एक रिसर्च कहती है, इनमें से अधिकांश शुगर मॉलिक्यूल को बनाना आज भी बेहद कठिन, यहां तक कि लगभग असंभव माना जाता है.

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बेहतर फॉर्मूला मिल्क बनाने के लिए हो रही नई रिसर्च

बेहतर फॉर्मूला मिल्क बनाने के लिए हो रही नई रिसर्च7 / 9

वैज्ञानिक अब जीन इंजीनियरिंग और आधुनिक बायोटेक्नोलॉजी की मदद से ऐसे तत्व तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं, जो फॉर्मूला मिल्क को ज्यादा पौष्टिक बना सकें. कुछ शोधों में पौधों के जरिए खास शुगर बनाने पर भी काम हो रहा है.

मां की नकल क्यों आसान नहीं

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मां के दूध में एंटीबॉडी, सक्रिय एंजाइम, हार्मोन, इम्यूनोग्लोबुलिन्स और ऐसे मॉलीक्यूल होते हैं, जो बच्चे की सुरक्षा में योगदान देती हैं. लेकिन इन तत्वों को फॉर्मूला मिल्क में शामिल नहीं क्या जा सकता, क्योंकि फॉर्मूला मिल्क को लंबे समय तक टिकाऊ रहना जरूरी होता है और मां के दूध के साथ ऐसी मुश्किल नहीं है.

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हर मां का दूध अलग और बच्चे की जरूरत के अनुसार बदलता है

हर मां का दूध अलग और बच्चे की जरूरत के अनुसार बदलता है9 / 9

मां का दूध एक तय फॉर्मूला नहीं होता, बल्कि यह समय और बच्चे की जरूरत के अनुसार बदलता रहता है. जानकारी के अनुसार, अलग-अलग माताओं के दूध में मौजूद तत्वों की मात्रा भी उनके जेनेटिक अंतर के कारण अलग हो सकती है. जिन मांओं में 'सेक्रेटर जीन' (FUT2) सक्रिय होता है, उनके दूध में कुछ खास शुगर मॉलिक्यूल पाए जाते हैं, जबकि 'नॉन-सेक्रेटर' माताओं के दूध में ये अनुपस्थित या बेहद कम होते हैं, जिसका सीधा असर बच्चे के आंत माइक्रोबायोम पर पड़ता है. यह भी पढ़ें: Friendship Day Trip: दोस्तों के साथ दिल्ली के आसपास घूमने का बना रहे हैं प्लान? ये हैं बेस्ट डेस्टिनेशन, अभी कर लें तैयारी अस्वीकरण: यह जानकारी मीडिया रिपोर्ट्स और पब्लिक डोमेन में मौजूद अन्य स्रोतों पर आधारित हैं. News24 इनकी पुष्टि नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Azhar Naim

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अज़हर नईम एक डिजिटल पत्रकार हैं. अज़हर नईम News24 Bag Convergence में सब-एडिटर के रूप में कार्यरत हैं. यहां वह मुख्य रूप से लाइफस्टाइल, हेल्थ और वायरल सेक्शन से जुड़ी खबरें लिखते हैं. उन्होंने साल 2024 में श्री वेंकटेश्वर यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (BJMC) की डिग्री हासिल की. पत्रकारिता की पढ़ाई के दौरान उन्होंने इंडिया न्यूज और खबरफास्ट जैसे मीडिया संस्थानों के साथ काम किया, जहां उन्हें डिजिटल न्यूज रिपोर्टिंग और कंटेंट लेखन का अनुभव मिला. इसके बाद उन्होंने एक साल से ज्यादा समय तक (2024-2026) इंडिया डॉट कॉम (Zee Media) में ट्रेनी के तौर पर काम किया और हेल्थ, लाइफस्टाइल, वायरल, ट्रेंडिंग, न्यूज और टेक्नोलॉजी समेत कई बीट्स पर डिजिटल कंटेंट तैयार किया. अपने अब तक के अनुभव में अज़हर डिजिटल मीडिया के बदलते ट्रेंड्स को समझने, SEO-फ्रेंडली कंटेंट तैयार करने और पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए उपयोगी व आकर्षक स्टोरीज लिख रहे हैं. अज़हर नईम का पत्रकारिता में अनुभव कुल अनुभव: 2 साल से ज्यादा योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: उन्होंने श्री वेंकटेश्वर यूनिवर्सिटी से बैचलर ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन (BJMC) की डिग्री हासिल की. पिछला अनुभव: अज़हर ने न्यूज 24 से पहले इंडिया न्यूज़, खबरफास्ट और इंडिया डॉट कॉम (Zee Media) में अपनी पत्रकारिता की समझ और अनुभव को और मजबूत किया. अपने प्रोफेशनल सफर में उन्होंने दिल्ली ब्लास्ट, जम्मू-कश्मीर ब्लास्ट, ईरान-अमेरिका युद्ध, रूस-यूक्रेन युद्ध और कई विधानसभा चुनावों के अलावा लाइफस्टाइल और हेल्थ जैसे विविध विषयों पर कंटेंट तैयार किया है. विशेषज्ञता और फोकस अज़हर नईम को लाइफस्टाइल और हेल्थ का खासा अनुभव है, वह इन खबरों को आसान भाषा में समझाने में माहिर हैं और इन्हीं से जुड़ी स्टोरी पर लगातार काम कर रहे हैं. इसके अलावा उन्हें टिप्स और ट्रिक्स, स्किन केयर, हेयर केयर, किचन-गार्डनिंग और फैशन से जुड़ी खबरों में भी महारत हासिल है.
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