Golgappa Origin: भारत में ऐसा कोई शहर नहीं होगा, जहां गोलगप्पे न बनाए और खाए जाते हों. हर गली कूचे में गोलगप्पे की दुकान मिल जाएगी, जिस पर बहुत ही भीड़ हमेशा मिलेगी. आप भी गोलगप्पे खाते बड़े चाव से हैं, लेकिन क्या इसकी हिस्ट्री के बारे में कुछ भी जानते हैं? तो यह लेख आपके लिए मददगार साबित हो सकता है. हम गोलगप्पे के इतिहास से जुड़े कुछ तथ्य आपके साथ साझा कर रहे हैं.
गैस्ट्रोनॉमी पर शेफ रणवीर बरार ने बताया

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गोलगप्पे खाने की तकनीक काफी पुरानी है. मॉलिक्यूलर गैस्ट्रोनॉमी की प्रसिद्ध तकनीक स्फेरिकिफिकेशन में पानी को एक पतली झिल्ली के अंदर भरा जाता है और यह गोलगप्पे का रूप ही है.
हेल्थ से जुड़ा है कनेक्शन

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शेफ बरार का मानना है कि पानी पुरी सिर्फ एक स्ट्रीट फूड नहीं है, बल्कि यह हमारे आंतों की हेल्थ को भी प्रभावित करता है. इसमें इस्तेमाल होने होने वाले मसाले और चटनी पेट में मौजूद बैक्टीरिया को बाहर निकालने का काम करते हैं.
इंडियन चाट का हिस्सा

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गोलगप्पा हमेशा से ही भारतीय इतिहास का हिस्सा रहा है. इसे बड़े ही चाव से खाया जाता है. भारत में इसकी कई वैरायटीज मौजूद हैं, जिसे मीठा, खट्टा, चटनी और मसाले के साथ सर्व किया जाता है.