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Fauji wala Gaon : क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसा गांव भी है, जहां की पहचान खेती या कारोबार से नहीं, बल्कि फौज से जुड़ी है? कहा जाता है कि यहां की हवा में देशभक्ति बसती है और हर गली में वर्दी का सम्मान दिखता है. इस गांव का नाम सुनते ही गर्व महसूस होता है, क्योंकि यहां के लोग पीढ़ियों से देशसेवा को अपना कर्तव्य मानते आए हैं. आखिर कौन सा है यह गांव, जिसे लोग 'फौजियों का गढ़' कहते हैं, आइए जानते हैं.

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भारत की असली ताकत उसके गांवों में बसती है. देश की तरक्की, संस्कृति और परंपराएं गांवों से ही आगे बढ़ती हैं. कुछ गांव ऐसे भी हैं जो सिर्फ खेती या व्यापार के लिए नहीं, बल्कि सेना में योगदान के लिए मशहूर हैं. ऐसे ही एक गांव ने अपनी अलग पहचान बनाई है, जहां युवाओं के लिए फौज में जाना गर्व की बात है.

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इस गांव की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां से हजारों युवा भारतीय सेना में शामिल हुए हैं. आंकड़ों के अनुसार, 12,000 से ज्यादा जवान अलग-अलग समय में सेना में भर्ती होकर देश की रक्षा कर चुके हैं.

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इस गांव की सैन्य परंपरा कोई नई नहीं है. यहां के लोग प्रथम विश्व युद्ध के समय से सेना में अपनी भूमिका निभाते आ रहे हैं. पीढ़ी दर पीढ़ी परिवारों ने देशसेवा को अपनाया है. आज भी गांव के लगभग हर घर से एक सदस्य सेना में योगदान दे रहा है.

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यह खास गांव उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में स्थित गहमर है. गहमर को 'फौजियों का गढ़' और 'सैनिकों का गांव' कहा जाता है. इसकी पहचान सिर्फ जिले या राज्य तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे देश में फैली हुई है.

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रिपोर्ट्स बताते हैं कि, गहमर ने भारतीय सेना को कई उच्च अधिकारी भी दिए हैं. लेफ्टिनेंट से लेकर ब्रिगेडियर तक कई पदों पर यहां के लोग सेवा दे चुके हैं. वर्तमान में भी दर्जनों कर्नल रैंक के अधिकारी इसी गांव से जुड़े हैं.

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रिपोर्ट्स के मुताबिक, गांव को 22 हिस्सों या टोलों में बांटा गया है, और खास बात यह है कि इन टोलों के नाम सैनिकों के नाम पर रखे गए हैं. यह परंपरा दर्शाती है कि गांववाले अपने वीर जवानों का कितना सम्मान करते हैं.

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मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गहमर को एशिया के बड़े गांवों में गिना जाता है. करीब 1 लाख 20 हजार की आबादी वाला यह गांव लगभग 8 वर्ग मील में फैला है. (Image: Pexels)