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जयपुर को 'पिंक सिटी' क्यों कहा जाता है? इसके पीछे 150 साल पुरानी दिलचस्प कहानी छिपी है. एक शाही मेहमान के स्वागत में पूरे शहर को गुलाबी रंग में रंग दिया गया था, जो आज भी इसकी पहचान बना हुआ है.
जयपुर- गुलाबी शहर की पहचान

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राजस्थान की राजधानी जयपुर दुनिया भर में 'पिंक सिटी' के नाम से मशहूर है. शहर के पुराने हिस्से में लगभग सभी इमारतें गुलाबी रंग में रंगी हुई दिखाई देती हैं, जो इसे एक अलग और आकर्षक पहचान देती हैं.
1876 में शुरू हुई कहानी

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जयपुर को गुलाबी रंग में रंगने की शुरुआत साल 1876 में हुई थी. उस समय के महाराजा सवाई राम सिंह द्वितीय ने ब्रिटेन के प्रिंस ऑफ वेल्स (अल्बर्ट एडवर्ड) के स्वागत के लिए पूरे शहर को गुलाबी रंग से रंगने का आदेश दिया था.
गुलाबी रंग का मतलब?

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राजपूताना संस्कृति में गुलाबी रंग को मेहमान नवाजी का प्रतीक माना जाता है. इसलिए महाराजा ने इस रंग को चुना ताकि विदेशी मेहमान पर अच्छा प्रभाव पड़े और शहर की शान दिखाई जा सके.
पूरे शहर को एक जैसा रंग

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पुराने जयपुर (वॉल्ड सिटी) की खासियत ये है कि यहां की सभी इमारतें एक ही रंग यानी टेराकोटा गुलाबी में रंगी गई हैं. इससे शहर की वास्तुकला और भी सुंदर दिखाई देती है.
गुलाबी रंग बना कानून

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प्रिंस की यात्रा के बाद महाराजा ने 1877 में एक कानून बना दिया, जिसके मुताबिक पुराने शहर की सभी इमारतों को गुलाबी रंग में ही रंगना अनिवार्य कर दिया गया. ये नियम आज भी लागू है.
असली रंग ‘पिंक’ नहीं, टेराकोटा

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दिलचस्प बात ये है कि जयपुर का रंग असल में चमकीला गुलाबी नहीं बल्कि टेराकोटा या हल्का लाल-गुलाबी होता है. समय, मौसम और सामग्री के मुताबिक इसके शेड्स अलग-अलग दिखते हैं.
भारत का पहला प्लान्ड सिटी

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जयपुर सिर्फ रंग के लिए नहीं, बल्कि अपनी प्लानिंग के लिए भी खास है. इसे 1727 में महाराजा सवाई जय सिंह द्वितीय ने बसाया था और ये भारत का पहला योजनाबद्ध शहर माना जाता है.
(All Photos Credit: Social Media)